जिनकी जयंती पर ज्योतिरादित्य ने छोड़ी कांग्रेस, उन माधव राव ने भी दिए थे जनसंघ को 10 साल

मध्य प्रदेश की सियासी बिसात में ज्योतिरादित्य सिंधिया किंगमेकर बनने जा रहे हैं. कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के लिए मुसीबत खड़ी करके उन्होंने कांग्रेस का दामन छोड़ दिया. अब वह बीजेपी में जा रहे हैं और ऐसे समय में लोग उनके परिवार के राजनैतिक इतिहास को याद कर रहे हैं.
madhav rao scindia, जिनकी जयंती पर ज्योतिरादित्य ने छोड़ी कांग्रेस, उन माधव राव ने भी दिए थे जनसंघ को 10 साल

मध्य प्रदेश की सियासी बिसात में ज्योतिरादित्य सिंधिया किंगमेकर बनने जा रहे हैं. कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के लिए मुसीबत खड़ी करके उन्होंने कांग्रेस का दामन छोड़ दिया. अब वह बीजेपी में जा रहे हैं और ऐसे समय में लोग उनके परिवार के राजनैतिक इतिहास को याद कर रहे हैं.

ज्योतिरादित्य सिंधिया  के पिता माधव राव सिंधिया कांग्रेस से पहले जनसंघ में हुआ करते थे. दरअसल वो जनसंघ के टिकट पर ही पहली बार संसद पहुंचे थे. उससे भी पहले माधव राव सिंधिया की मां विजया राजे सिंधिया कांग्रेस में थीं और एक असंतोष के चलते यह राजनैतिक उठापटक शुरू हुई थी.

बात 1969 की है, इंदिरा गांधी ने राजशाही परिवारों की सारी सुविधाएं छीन लीं. उस वक्त तक कांग्रेस में रहीं विजया राजे सिंधिया ने गुस्से में पार्टी छोड़ दी. उसी दौरान 25 साल के माधव राव सिंधिया विदेश से पढ़ाई करके लौटे थे और राजनीति में आने का मन बना रहे थे. मां ने कांग्रेस छोड़कर जनसंघ जॉइन किया, साथ में बेटे माधव राव सिंधिया को भी ले आईं. कहा जाता है कि माधव राव सिंधिया की सदस्यता की पर्ची अटल बिहारी वाजपेयी ने काटी थी.

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1971 में लोकसभा चुनाव हुए और 26 साल के माधव राव सिंधिया को जनसंघ ने गुना सीट से टिकट दिया. माधव राव की लोकप्रियता ऐसी थी देश भर में इंदिरा लहर होने के बावजूद वो पहली ही बार में चुनाव जीतकर संसद पहुंचे.

इमरजेंसी के बाद अगला लोकसभा चुनाव हुआ तो माधव राव सिंधिया ने गुना से ही निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीते भी. 1980 तक उनका झुकाव कांग्रेस की तरफ हो चुका था. इस साल उन्होंने कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा. साल 1984 उनके लिए एकदम अलग था क्योंकि इस बार उनके खिलाफ बीजेपी से अटल बिहारी वाजपेयी खड़े थे, जिन्होंने कभी उन्हें जनसंघ की सदस्यता दिलाई थी और जिनको राजनीति का अजातशत्रु कहा जाता था. अटल बिहारी वाजपेयी को माधव राव सिंधिया ने बड़े अंतर से हराया था.

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