कौन थे भूपेंद्र कुमार दत्ता, लोकसभा में भाषण के दौरान पीएम मोदी ने लिया जिनका नाम

पीएम मोदी ने कहा कि भारत-पाकिस्तान का बटवारा होने के बाद वे पाकिस्तान में ही रह गए थे और वहां की संविधान सभा के सदस्य थे. संविधान बनने का काम शुरुआती दौर में था तभी उन्होंने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का दर्द बयान किया था.

लोकसभा में पीएम मोदी ने अपने भाषण के दौरान भूपेंद्र कुमार दत्ता का नाम लिया और बताया कि वह एक समय ऑल इंडिया कांग्रेस कमिटी में थे. स्वतंत्रता आंदोलन के समय उन्होंने 23 साल जेल में बिताए थे. उन्होंने जेल में लगातार 78 दिनों तक भूख हड़ताल की थी जो कि एक रिकॉर्ड है.

पीएम मोदी ने कहा कि भारत-पाकिस्तान का बटवारा होने के बाद वे पाकिस्तान में ही रह गए थे और वहां की संविधान सभा के सदस्य थे. संविधान बनने का काम शुरुआती दौर में था तभी उन्होंने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों का दर्द बयान किया था. आइए जानते हैं कि कौन थे भूपेंद्र नाथ दत्ता जिनका जिक्र पीएम मोदी ने अपने भाषण में किया.

अनुशीलन समिति ने बनाया क्रांतिकारी

भूपेंद्र नाथ दत्ता 8 अक्टूबर 1892 में जसोर के ठाकुरपुर गांव(वर्तमान बांग्लादेश) में पैदा हुए. भूपेंद्र ने बचपन में रामायण की एक कथा पढ़ी और तय किया कि जीवन भर अविवाहित रहेंगे. यह प्रतिज्ञा उन्होंने अंत समय तक निभाई. अंग्रेजों के खिलाफ उनका संघर्ष अनुशीलन समिति में शामिल होने के साथ शुरू हुआ. यह समिति ए ओ ह्यूम के नेतृत्व में 1902 में बनाई गई थी. देश भर के युवाओं को इकट्ठा करना और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष को धार देना इस समिति का उद्देश्य था.

क्रांतिकारी जीवन में भूपेंद्र नाथ दत्ता ने अपने जीवन के अधिकांश साल जेल में बिताए. यहां तक कि अखबारों में कॉलम लिखने के लिए भी उनको 3 साल जेल में बिताने पड़े. 1947 में आजादी के बाद उन्होंने पाकिस्तान में रहना मंजूर किया और वहां पहले एमएलए फिर एमपी बने.

भारत वापसी

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की खराब हालत को लेकर भूपेंद्र दत्ता हमेशा मुखर रहे और वहां की हुकूमत से लोहा लेते रहे. 1958 में पाकिस्तान में सेना का शासन लागू हो जाने के बाद उन्होंने चार साल तक सार्वजनिक जीवन में वापसी करने का इंतजार किया. इंतजार न खत्म होता देख आखिर 1962 में उन्होंने पाकिस्तान और राजनीति को अलविदा कहा और वापस भारत आ गए. 29 दिसंबर 1979 को कोलकाता में उन्होंने अंतिम सांस ली.

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