‘मेरा जन्मदिन मत मनाओ, शिक्षकों का सम्मान करो’, …यहां से हुई 5 सितंबर को टीचर्स डे मनाने की शुरुआत

शिक्षक दिवस (Teacher's Day) देश के पूर्व राष्ट्रपति, प्रथम उपराष्ट्रपति और जाने-माने शिक्षाविद रहे डॉ. राधाकृष्णन (Dr. Sarvepalli Radhakrishnan ) के जन्मदिन पर मनाया जाता है. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन साल 1962 में देश के राष्ट्रपति बने थे.
Former President sarvepalli radhakrishnan, ‘मेरा जन्मदिन मत मनाओ, शिक्षकों का सम्मान करो’, …यहां से हुई 5 सितंबर को टीचर्स डे मनाने की शुरुआत

पूरे देश में आज यानी 5 सितंबर (5 September) को शिक्षक दिवस (Teacher’s Day) मनाया जा रहा है. आज के दिन छात्र अपने शिक्षकों के प्रति आभार जता रहे हैं और उनके सुखमय जीवन की कामना कर रहे हैं. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने भी 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर परिश्रमी शिक्षकों का आभार जताया है. पीएम मोदी ने कहा कि हमारे राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने वाले परिश्रमी शिक्षकों के हम आभारी रहेंगे. शिक्षक दिवस पर, हम अपने शिक्षकों का उनके उल्लेखनीय प्रयासों के लिए आभार व्यक्त करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि 5 सितंबर को ही शिक्षक दिवस क्यों मनाया जाता है. अगर नहीं तो, चलिए हम आपको विस्तार से बताते हैं.

शिक्षक दिवस देश के पूर्व राष्ट्रपति, प्रथम उपराष्ट्रपति और जाने-माने शिक्षाविद रहे डॉ. राधाकृष्णन (Dr. Sarvepalli Radhakrishnan) के जन्मदिन पर मनाया जाता है. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन साल 1962 में देश के राष्ट्रपति बने थे. दिलचस्प किस्सा है कि एक बार डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के दोस्त 5 सितंबर को उनका जन्मदिन धूमधाम से मनाना चाहते थे. जब डॉ. राधाकृष्णन को यह बात पता चली तो उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया. उन्होंने कहा कि मेरा जन्मदिन मत मनाओ, बल्कि शिक्षकों का सम्मान करो. तभी से 5 सितंबर को शिक्षक दिवस को मनाने की शुरुआत हुई.

5 अक्टूबर को विश्व श‍िक्षक दिवस 

यह जानना भी मजेदार है कि यूनेस्को ने साल 1994 में 5 अक्टूबर को श‍िक्षक दिवस मनाने की घोषणा की थी. शिक्षक दिवस विश्व के अधिकांश देशों में मनाया तो जाता है, लेकिन सबने इसके लिए अलग-अलग दिन निर्धारित किए हुए हैं. जैसे कि भारत में शिक्षक दिवस 5 सितंबर को मनाया जाता है.

क्या है शिक्षक दिवस का महत्व

शिक्षक दिवस मनाए जाने का मकसद यह है कि स्टूडेंट्स में टीचर्स के प्रति सहयोग की भावना को बढ़ाया जाए. साथ ही भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शिक्षकों के महत्व के प्रति जागरुकता को लाई जाए. हर एक छात्र यह समझ सके कि उसके जीवन में शिक्षक का कितना अहम योगदान है.

भारत रत्न से सम्मानित डॉ. राधाकृष्णन

डॉ. राधाकृष्णन के बारे में और अधिक जानकारी दें तो उनका जन्म 5 सितंबर 1888 को हुआ था. वो एक नामी स्कॉलर, फिलॉसफर थे. डॉ. राधाकृष्णन को भारत रत्न से भी सम्मानित किया जा चुका है. वो कहते थे कि ‘समाज को आकार देने, दिशा देने का काम एक शिक्षक ही करता है, लेकिन उस शिक्षक की अनदेखी भी होती है. ऐसे में उनके लिए भी एक दिन होना चाहिए, ताकि समाज उनके योगदान को याद करे. उनका सम्मान करे.’

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