मुजफ्फरनगर दंगा केस में 11 आरोपी सबूत के अभाव में बरी, तीन गवाह भी मुकर गए

दरअसल 2013 में उत्तर प्रदेश के शामली और मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच दंगा भड़क गया था. इस दंगे में 62 लोगों की जान चली गई थी जबकि 93 लोग घायल हुए थे.

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में साल 2013 में हुए दंगा मामले में स्थानीय अदालत ने सबूत के आभाव में 11 लोगों को बरी कर दिया है.

इस बारे में जानकारी देते हुए सरकारी अभियोजक दुष्यंत त्यागी ने कहा कि ‘स्थानीय कोर्ट ने सबूतों के अभाव में मुज़फ़्फ़रनगर दंगा के 11 आरोपियों को सभी तरह के आरोप से मुक्त कर दिया है. ‘ उन्होंने कहा, ‘पहले अभियोजन पक्ष की तरफ से जो तीन गवाह पेश होने थे उन्होंने बयान देने से मना कर दिया.

बता दें कि सुनवाई के दौरान, शिकायतकर्ता मोहम्मद सुलेमान समेत तीन गवाह मुकर गए और उन्होंने अभियोजन का साथ नहीं दिया.

लिसाढ़ निवासी मोहम्मद सुलेमान ने 16 सितंबर 2013 को फुगान थाने में आगजनी और डकैती का मामला दर्ज कराया था. शिकायत में आरोप लगाया था कि सात सितंबर 2013 की शाम आरोपी हथियारों से लैस होकर उनके घर में घुसे और परिजनों से मारपीट की, करीब डेढ़ लाख की नकदी, जेवरात, अन्य सामान लूट ली और मकान में आग लगा दी.

पिछले साल जून महीने में मुज़फ़्फ़रनगर दंगों से जुड़े एक मामले के संबंध में अदालत में पेश नहीं होने पर पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद संजीव बालियान, विहिप नेता साध्वी प्राची, भाजपा विधायक उमेश मलिक तथा दो अन्य के खिलाफ स्थानीय अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी किए थे.

दरअसल 2013 में उत्तर प्रदेश के शामली और मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच दंगा भड़क गया था. इस दंगे में 62 लोगों की जान चली गई थी जबकि 93 लोग घायल हुए थे. इसके अलावा 50,000 लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा था.