12 साल बाद नन्दीग्राम मे लहराया लाल झंडा, बीजेपी ने करार दी साजिश

स्थानीय बीजेपी के लोगों ने दवा किया की सीपीआईएम को असल मे यहां के तृणमूल से ही मदद मिली है. हाल ही में बीजेपी की बढ़ती हुई लोकप्रियता पर रोक लगाने के लिए ही ऐसा किया जा रहा है.

नन्दीग्राम: करीब 12 साल बाद पूर्व मेदिनीपूर जिला के नन्दीग्राम मे पहली बार लाल झंडा लहराते हुए दिखाई दिया है. साथ ही यहाँ के सीपीआईएम पार्टी ऑफिस को भी आज खोला गया है. सीपीआईएम के राज्य नेता रबिन देब के नेतृत्व मे इस पार्टी ऑफिस को खोला गया है. इससे पहले सन 2007 मे आखरी बार इस पार्टी ऑफिस को खोला गया था.

सन 2007 मे जमीन अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन को लेकर नन्दीग्राम मे सीपीआईएम के खिलाफ लोगो ने आंदोलन किये थे और तब यहां पर स्थित सीपीआईएम के पार्टी ऑफिस को लोगों ने आग से जला दिया था. तब से लेकर अब तक नन्दीग्राम बाजार मे स्थित इस पार्टी ऑफिस जैसे भूतों का घर बन गया था. धीरे धीरे नन्दीग्राम से ही सीपीआईएम का नामों निसान मिटने लगा था. पिछले कई सालों में नन्दीग्राम में सीपीआईएम अपना रंग नहीं दिखा पाया है. तब से लेकर आज तक यहां पर तृणमूल ने अपना डेरा जमा लिया है. इस दौरान राज्य के परिवहन मंत्री शुभेंदु अधिकारी इसी नंदीग्राम क्षेत्र से भारी मतों से जीत रहे हैं.

इस बार कुछ नजारा कुछ अलग ही देखने को मिल रहा है. रविवार को सीपीआईएम के लोगो ने नंदीग्राम मे एक बहुत बड़ा जुलुस निकाला है. इस रोड शो में तमलुक लोकसभा केन्द्र के सीपीआईएम उम्मीदवार सेक इब्राहिम, रबिन देब सहित लेफ्ट फ्रन्ट के नेता भी शामिल थे.

स्थानीय बीजेपी के लोगों ने दवा किया की सीपीआईएम को असल मे यहां के तृणमूल से ही मदद मिली है. हाल ही में बीजेपी की बढ़ती हुई लोकप्रियता पर रोक लगाने के लिए ही ऐसा किया जा रहा है. क्यों की नंदीग्राम मे इन दिनों कोई सीपीआईएम के नेता नहीं है. वोट भी नहीं मिलता है. तो फिर 12 साल बाद कहां से पार्टी ऑफिस खोलने की ताकत आई. इस के पीछे जरूर कोई राज छुपा है.

इस बारे मे रबिन देब ने बताया की यह आरोप झूठा है. इस राज्य मे उनका लड़ाई तृणमूल के खिलाफ है. तो फिर तृणमूल के साथ साझेदारी का बात कहां से आया है. तृणमूल के नेता आबू ताहेर ने भी इस बात को मानने से साफ इंकार किया है. उनका दवा है की सीपीआईएम नंदीग्राम मे अपना डेरा कभी नहीं जमा पायेगा.