‘मर जाएंगे पर पाकिस्तान नहीं जाएंगे’, बेघर हुए हिंदुओं ने सुनाई दास्तां ए दर्द

इन परिवारों के बिजली कनेक्शन, शौचालय और आधार कार्ड तक बन चुके हैं. बच्चे भी दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने जाते हैं, लेकिन जो नहीं है वह है सिर के ऊपर एक छत.
Pakistani Refugees, ‘मर जाएंगे पर पाकिस्तान नहीं जाएंगे’, बेघर हुए हिंदुओं ने सुनाई दास्तां ए दर्द

ये राधे कृष्ण आडवाणी हैं. राधे कृष्ण जब पाकिस्तान से भारत आए तो उनकी उम्र महज 12 साल थी. पाकिस्तान में हिंदुओं पर जो अत्याचार होता रहा है, उसको राधे कृष्ण भूले नहीं हैं. वहां अत्याचार इतना था कि पाकिस्तान वापस जाने की बात पर राधे कृष्ण कहते हैं कि ‘मर मिट जाएंगे, लेकिन पाकिस्तान वापस नहीं जाएंगे.’

Pakistani Refugees, ‘मर जाएंगे पर पाकिस्तान नहीं जाएंगे’, बेघर हुए हिंदुओं ने सुनाई दास्तां ए दर्द

 

अब राधे कृष्ण जैसे इन पाकिस्तान से आए हिंदुओं के सामने एक बहुत बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है.

आपको बता दें कि साल 2011 से 2014 के बीच तीर्थ यात्रा वीज़ा पर पाकिस्तान से आए 128 हिंदू परिवार दिल्ली के मजनू टीला इलाके में झुग्गी बस्ती में रहते हैं. अब एनजीटी कोर्ट ने इस झुग्गी बस्ती को अवैध करार दे दिया है.

Pakistani Refugees, ‘मर जाएंगे पर पाकिस्तान नहीं जाएंगे’, बेघर हुए हिंदुओं ने सुनाई दास्तां ए दर्द

 

अब जाएं तो जाएं कहां

ऐसे में इन परिवारों के सामने यह समस्या खड़ी हो गई है कि आखिर अब जाएं तो जाएं कहां? क्योंकि मजनू के टीला इलाके में रहते-रहते, इन्हें भारत देश अपना लगने लगा है. क्या बच्चे, क्या बुजुर्ग और क्या महिलाएं, सभी भारत से प्यार करने लगे हैं. अब वे मुड़कर वापस पाकिस्तान नहीं जाना चाहते.

 

पाकिस्तान के अत्याचारों से तंग आकर हिंदू परिवार साल 2011 में एक-एक करके तीर्थ यात्रा वीजा पर भारत आने लगे. धीमे-धीमे इन परिवारों की संख्या बढ़ती गई. अब इन परिवारों के बिजली कनेक्शन, शौचालय और आधार कार्ड तक बन चुके हैं. बच्चे भी दिल्ली के सरकारी स्कूलों में पढ़ने जाते हैं, लेकिन जो नहीं है वह है सिर के ऊपर एक छत.

Pakistani Refugees, ‘मर जाएंगे पर पाकिस्तान नहीं जाएंगे’, बेघर हुए हिंदुओं ने सुनाई दास्तां ए दर्द

एक हैं सोनादास, इनका दर्द एकदम वाजिब लगता है क्योंकि पाकिस्तान ने नहीं अपनाया तो वे भारत चले आए. अब भारत में भी उन्हें रहने के लिए जगह नहीं मिल रही. हालांकि इन पाकिस्तानी हिंदुओं के सिर पर छत देने की पैरवी दिल्ली हाईकोर्ट भी कर चुका है.

 

अप्रैल 2012 में दिल्ली हाईकोर्ट ने अपना फैसला इन परिवारों के पक्ष में सुनाते हुए कहा था कि इन परिवारों की पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है और केंद्र सरकार इनको हर तरह की सुरक्षा मुहैया कराए.

 

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