know about friend of pil Justice S Muralidhar, हाशिमपुरा केस में 16 पुलिसकर्मियों को सुनाई थी सजा, पढ़ें- कौन हैं जनहित याचिकाओं के ‘फ्रेंड’ जस्टिस मुरलीधर
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हाशिमपुरा केस में 16 पुलिसकर्मियों को सुनाई थी सजा, पढ़ें- कौन हैं जनहित याचिकाओं के ‘फ्रेंड’ जस्टिस मुरलीधर

साल 2018 में जस्टिस एस मुरलीधर ने गौतम नवलखा समेत कई लेफ्ट एक्टिविस्ट को माओवादियों से जुड़े होने के मामले में जमानत दिया था.
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दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस एस मुरलीधर का तबादला कर दिया गया है. उन्हें पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में भेजा गया है. मुरलीधर ने बुधावर को दिल्ली हिंसा पर सुनवाई के दौरान पुलिस को फटकार लगाई थी.

केंद्रीय कानून मंत्रालय की ओर से इस तबादले पर एक गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया. इसमें कहा गया कि सीजेआई एस. ए. बोबडे की सलाह पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिल्ली हाई कोर्ट के जज जस्टिस एस. मुरलीधर को पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में ट्रांसफर किया है. इसमें यह भी कहा गया है कि राष्ट्रपति ने जस्टिस मुरलीधर को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में बतौर जज पद संभालने का निर्देश दिया है.

बार असोसिएशन ने किया था तबादले का विरोध

– सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने 12 फरवरी को ही मुरलीधर के तबादले की सिफारिश की थी. कॉलेजियम के इस फैसले का दिल्ली हाई कोर्ट बार असोसिएशन ने विरोध किया था. वकीलों ने इसके लिए 20 फरवरी को प्रदर्शन भी किया

– मुरलीधर दिल्ली हाई कोर्ट के तीसरे वरिष्ठ जज थे. पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में वह वरिष्ठता में चीफ जस्टिस रवि शंकर झा के बाद दूसरे नंबर पर होंगे.

साल 1984 में शुरू की लॉ प्रैक्टिस

– दिल्ली हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार मुरलीधर ने सितंबर 1984 में चेन्नई में अपनी कानून प्रैक्टिस शुरू की थी. वह 1987 में सुप्रीम कोर्ट और फिर दिल्ली हाई कोर्ट में स्थानांतरित हुए.

– जस्टिस एस मुरलीधर ने 29 मई 2006 को दिल्ली हाई कोर्ट के जज का कार्यभार संभाला था. इससे पहले दिसंबर 2002 से मई 2006 तक वो लॉ कमिशन के पार्ट टाइम सदस्य भी रहे हैं.

– जस्टिस एस. मुरलीधर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और भारतीय निर्वाचन आयोग के सलाहकार भी रहे हैं.

– – जस्टिस एस. मुरलीधर को साल 2003 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री मिली.

– मुरलीधर ने साल 2004 में ‘लॉ, पॉवर्टी एंड लीगल एड: एक्सेस टु क्रिमिनल जस्टिस’ नाम की एक किताब भी लिखी है.

जस्टिस एस मुरलीधर राव के महत्वपूर्ण केस

– मुरलीधर कई अहम फैसलों को सुनाने वाली बेंच का हिस्सा रह चुके हैं. वो साल 2009 में नाज फाउंडेशन के मामले की सुनवाई के दौरान आईपीसी की धारा 377 को गैरआपराधिक घोषित किए जाने वाली बेंच में शामिल थे.

– एस. मुरलीधर बिना किसी फीस के लोगों के केस लड़ने के लिए चर्चित रहे हैं. इनमें भोपाल गैस त्रासदी और नर्मदा बांध पीड़ितों के केस भी शामिल हैं.

– जनहित याचिकाओं के मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें न्याय मित्र बनाया हुआ था. दो बार वह सुप्रीम कोर्ट की लीगल सर्विस कमेटी के सक्रिय सदस्य रहे.

– साल 2018 में उन्होंने गौतम नवलखा समेत कई लेफ्ट एक्टिविस्ट को माओवादियों से जुड़े होने के मामले में जमानत दिया था.

– साल 1987 में हुए हाशिमपुरा नरसंहार मामले में भी उन्होंने दोषी 16 पुलिसकर्मियों को सजा सुनाई थी.

– दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस मुरलीधर के घर मंगलवार आधी रात को दिल्ली हिंसा मामले में सुनवाई हुई थी. मानवाधिकार मामलों की वकील सुरूर मंदर की एक याचिका पर देर रात लगभग 12:30 बजे सुनवाई हुई थी. दिल्ली हिंसा में अबतक 27 लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं 250 से ज्यादा लोग जख्मी हैं.

– दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली पुलिस को राष्ट्रीय राजधानी में कथित रूप से हिंसा भड़काने के मामले में तीन प्रमुख राजनीतिक नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए एक ‘सचेत निर्णय’ लेने का निर्देश दिया था. उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंसा भड़काने के लिए भाजपा नेता अनुराग ठाकुर, कपिल मिश्रा और प्रवेश वर्मा को गिरफ्तार करने की मांग के साथ दायर की गई याचिका पर जस्टिस मुरलीधर और जस्टिस तलवंत सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई की. इस दौरान जस्टिस मुरलीधर ने कहा था कि हम एक और 1984 नहीं चाहते हैं.

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