गोदामों में सड़ गया 19 हजार टन प्याज, AAP ने की CBI जांच की मांग

TV9 भारतवर्ष के हाथ कुछ ऐसे दस्तावेज लगे हैं जिससे ये साफ होता है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार की मिलीभगत के चलते जनता प्याज के आंसू रोने को मजबूर हुई.

प्याज को लेकर जनता त्राहि-त्राहि कर रही है तो वहीं प्याज की वजह से सड़क से लेकर संसद तक नेता अपनी राजनीति चमकाने में लगे हुए हैं. सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर किसकी की नीतियों की वजह से जनता प्याज के आंसू रो रही है? आखिर किसकी नीतियों की वजह से जनता 100 रुपये के भाव से प्याज खरीदने को मज़बूर हो रही है?

TV9 भारतवर्ष के हाथ कुछ ऐसे दस्तावेज लगे हैं जिससे ये साफ होता है कि राज्य सरकार और केंद्र सरकार की मिलीभगत के चलते जनता प्याज के आंसू रोने को मजबूर हुई.

बता दें कि सरकार ने मार्च और मई के बीच 57372 टन प्याज महाराष्ट्र और गुजरात से नेफेड के गोदामों में पहुंचाया. इसमें से 26735 टन प्याज राज्यों में सप्लाई किया गया. नेफेड के सूत्रों के मुताबिक 19229 टन प्याज सड़ गया. इसके अलावा 11408 टन प्याज खराब स्तर का था इसलिए ट्रांसपोर्ट करने की बजाय उसे लोकल बाजार में पहुंचाया गया.

यानी सड़े प्याज और खराब स्तर की प्याज को मिला दिया जाए तो यह आंकड़ा 30000 के पार पहुंच जाता है यानी करीब 57372 टन प्याज में से करीब 30,000 टन प्याज जनता तक पहुंच ही नहीं पाया.

नेफेड के मुताबिक प्याज की सेल्फ लाइफ 3 से 4 महीने होती है लेकिन इस साल नेफेड ने प्याज को सितंबर तक अपने गोदाम में रखा. इसके पीछे वजह यह बताई जा रही है कि राज्यों की तरफ से प्याज की डिमांड काफी देरी से नेफेड के पास पहुंची. यानी जो प्याज मार्च और मई के बीच नेफेड के गोदामों में पहुंचा था, वो प्याज सितंबर तक उनके गोदामों में ही पड़ा रहा, नतीजन वह प्याज सड़ गया.

सड़े प्याज की बदबू में आम आदमी पार्टी को केंद्र सरकार की बड़ी चाल दिखाई पड़ रही है. आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह यह आरोप लगा रहे हैं कि केंद्र सरकार की मिलीभगत के चलते प्याज नेफेड के गोदामों में पड़ा-पड़ा सड़ गया. प्याज घोटाले का नाम देकर इसकी सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं.

वहीं नेफेड के सूत्र ये दावा कर रहे हैं कि राज्य सरकारों ने समय रहते प्याज की मांग को लेकर केंद्र सरकार को नहीं लिखा और जिसके चलते प्याज ने फिर के गोदामों में पड़ा-पड़ा सड़ गया.