दिल्ली दंगा: रुश्दी, मीरा नायर समेत 200 शख्सियतों ने की उमर खालिद की रिहाई की मांग

200 से ज्यादा हस्तियों (Personalities) ने एक बयान जारी कर कहा कि सरकार को उमर खालिद और उन सभी को मुक्त करना चाहिए, जिन्हें नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ विरोध करने के लिए गलत तरीके से फंसाया गया और अनुचित तरीके से उकसाया गया था.

दिल्ली दंगों (Delhi Riots) के आरोपी उमर खालिद की रिहाई को लेकर फिल्म, साहित्य, लेखन और दूसरे क्षेत्रों से जुड़ी 200 से ज्यादा भारतीय और विदेशी नामचीन हस्तियों ने गुरुवार को एक बयान जारी किया है. सभी ने बयान जारी कर जेएनयू (JNU) के पूर्व छात्र उमर खालिद की रिहाई की मांग की है. उमर खालिद  (Umar Khalid) को उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किया गया था. उमर खालिद की रिहाई (Release) के समर्थन में बयान जारी करने वालों में भाषाविद् नोम चोम्स्की, लेखक सलमान रुश्दी, अमिताव घोष, अरुंधति रॉय, रामचंद्र गुहा और राजमोहन गांधी, फिल्म निर्माता मीरा नायर और आनंद पटवर्धन, इतिहासकार  इरफान हबीब, रोमिला थापर, कार्यकर्ता मेधा पाटकर और अरुणा रॉय शामिल हैं.

सभी हस्तियों ने दंगा (Riots) मामले में दिल्ली पुलिस की जांच को पूर्व-निर्धारित करार दिया है. उन्होंने कहा कि सरकार को उमर खालिद और उन सभी को मुक्त करना चाहिए, जिन्हें नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के खिलाफ विरोध करने के लिए गलत तरीके से फंसाया गया और अनुचित तरीके से उकसाया गया था. उन्होंने कहा, यह सुनिश्चित किया जाए कि दिल्ली पुलिस (Delhi Police) संविधान के हिसाब से अपने द्वारा ली गई शपथ का पालन करते हुए दिल्ली दंगों की निष्पक्ष जांच करे. वहीं दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता ने इस मामले पर कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

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200 हस्तियों ने उमर खालिद के लिए दिखाई एकजुटता

200 नामी हस्तियों द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि, हम सभी 14 फरवरी 2020 को दिल्ली दंगों के आरोपों के तहत नई दिल्ली में गिरफ्तार (Arrest) किए गए बहादुर, युवा और स्कॉलर उमर खालिद पर देशद्रोह, हत्या की साजिश, और भारत के कड़े आतंकवाद विरोधी कानून, गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) की लगाई गई धाराओं के खिलाफ एकजुटता के साथ खड़े हैं.

हस्ताक्षरकर्ताओं ने स्वतंत्र भारत में सीएए (CAA) आंदोलन को सबसे बड़े शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक अधिकार आंदोलन करार दिया और कहा कि उमर खालिद इस आंदोलन में युवाओं की ताकतवर आवाज बन कर सामने आए. खालिद ने पूरे भारत के छोटे, बड़े शहरों में करीब 100 बैठकों में हिस्सा लिया और भारतीय युवाओं के सपनों को सबके सामने रखा. साथ ही कहा गया है कि उमर खालिद ने हाशिये पर लिए गए लोगों और शांति के लिए बात की.

’19 मुस्लिमों को गलत तरीके से फंसाया गया’

एक बयान में कहा गया है कि गिरफ्तार किए गए 21 लोगों में से 19 मुस्लिमों को झूठे आतंकवादी कानूनों के तहत आरोपी (Accused) बनाया गया है, अगर उनकी पहचान को अपराध माना जाता है, तो भारत को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्रों के वैश्विक समुदाय में शर्मिंदगी उठानी पड़ेगी. साथ ही कहा गया है कि ये लोग आतंकवादी नहीं हैं, इसके साथ ही पुलिस की निष्पक्ष जांच पर भी सवाल उठाए गए हैं.

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दरअसल उमर खालिल को इस साल फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के तहत गैरकानूनी गतिविधि अधिनियम -यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया था. बयान जारी करने वाली हस्तियों ने कहा है कि वह दिल्ली दंगों के मामले में मनगढ़ंत आरोपों में गिरफ्तार किए गए पूर्व जेएनयू छात्र उमर खालिद के साथ खड़े हैं.

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