kumbh-in-allahabad, ऐसा पहली बार हुआ है संगम की रेती में
kumbh-in-allahabad, ऐसा पहली बार हुआ है संगम की रेती में

ऐसा पहली बार हुआ है संगम की रेती में

kumbh-in-allahabad, ऐसा पहली बार हुआ है संगम की रेती में

नयी दिल्ली
माथे में त्रिपुंड लगाए, देह में भस्म लपेटे, हाड़कंपाऊ ठंड में सिर्फ अपनी नहीं पूरे घरवालों के बदले डुबकी लगाने वालों का जमघट गंगा किनारे जुटने लगा है. एक ओर जहां घाट फूलों से सज चुके हैं वहीं दूसरी ओर पूरा संगम तट चार वेदों की ऋचाओं से गूँज उठा है. इस बार का कुम्भ भव्य और दिव्य है. आइये जानते हैं तम्बुओं की नगरी में इस बार ऐसा क्या पहली बार होने जा रहा है…

फाइव स्टार सुख
फाइव स्टार सुख सुविधाओं से लैस महाराजा स्विस कॉटेज इस बार पर्यटकों के लिए बेहद ख़ास होंगे. रिपोर्टों के मुताबिक़ पचास के करीब स्विस कॉटेज बनाये जा रहे हैं, जिसमें तीस महाराजा स्विस कॉटेज होंगे. लक्ज़री डबल बेड, चेयर, यूरोपियन बाथरूम, टीवी, फ्रिज, ब्लोअर के अलावा ध्यान लगाने के लिए अलग से बाहर एक लॉबी जैसी सुविधाओं से महाराजा स्विस कॉटेज लैस होंगे. पर्यटक विभाग के मुताबिक़ डीलक्स कॉटेज की एक दिन की बुकिंग नौ हज़ार जबकि महाराजा स्विस कॉटेज की बुकिंग उन्नीस हजार रुपए में हो रही है.

चुस्त दुरुस्त रखिये शरीर और मन
दुनियाभर में योग का डंका बजने के बाद इस बार परमार्थ निकेतन की पहल पर योग कुम्भ भी लगने जा रहा है. इसमें योगगुरु बाबा रामदेव, डॉक्टर नागेंद्र, श्री श्री रविशंकर के अलावा विदेशों की जानी मानी हस्तियां योग की बारीकियों से श्रद्धालुओं को परिचित कराएँगे. परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने बताया कि इस दौरान श्रद्धालुओं को ऋषियों, मनीषियों के योगदान को बताने के अलावा उन्हें प्रशिक्षण भी दिलाया जाएगा.

आठ देशों की रामलीला
संस्कृति विभाग ने इस बार दुनियाभर में होने वाली रामलीलाओं और कृष्णलीलाओं के मंचन की योजना बनायीं है. रिपोर्टों की माने तो इस कुम्भ में कंबोडिया, त्रिनिदाद, बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका और इंडोनेशिया समेत आठ देशों की रामलीलाएं श्रद्धालुओं के लिए कराई जाएंगी. इसके लिए विदेश मंत्रालय ने भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद के महानिदेशक को कहा है कि वह पड़ोसी देशों समेत अन्य देशों की रामलीला से जुड़े सांस्कृतिक दलों को आमंत्रित करें. मेले में मलेशिया की कृष्णलीला का मंचन भी कराया जाएगा.

हाईटेक एटीवी भी तैयार
संगम की रेत पर हाईटेक आल टेरन वीकल यानि एटीवी दौड़ने के लिए तैयार हैं. मेले में करोड़ों श्रद्धालुओं के जुटान की संभावना जताई जा रही है. ऐसे में किसी भी आपात स्थिति में पीड़ित को कम से कम समय में राहत पहुंचाने के लिए ये वाहन काम आएंगे. यह स्कूटर जैसा तिपहिया या चौपहिया वाहन होता है.

इस बार गंगा पार
कटान के चलते इस बार अखाड़े गंगा पार बसाये जाएंगे. मेला क्षेत्र के सेक्टर 16 में अखाड़ों को बसाया जाएगा. पिछली बार की तुलना में इस बार संगम किनारे पांच सौ महामंडलेश्वर भी जुटेंगे. 2013 के कुम्भ में जहाँ 333 महामंडलेश्वरों के शिविर लगे थे वहीं इस बार यह संख्या पांच सौ के पार जाने की उम्मीद जताई जा रही है. मेला प्रशासन ने अखाड़ों के आसपास ही महामंडलेश्वरों को भी बसाने की योजना बनाई है.

एनएसजी ने संभाला मोर्चा
कुम्भ शुरू होने के पहले ही मेला क्षेत्र में एनएसजी की एक टीम कैम्प कर चुकी है. डीजी सुदीप लखटकिया के मुताबिक़ प्रदेश सरकार की मांग के बाद इनकी तैनाती की गयी है, ताकि किसी भी तरह की परिस्थिति से निपटा जा सके. मालूम हो कि पहले एनएसजी की टीम यहाँ आकर सर्वे करके चली जाती थीं. बिना किसी देरी के कहीं भी पहुँचने के लिए टीम ने राज्य सरकार से अपने लिए एक चॉपर की मांग की है.

इस बार दो गुने क्षेत्र में मेला
– 658 करीब योजनाएं कुम्भ को लेकर शुरू की गयीं.
– 2800 करोड़ तीन चरणों में योगी सरकार ने जबकि 600 करोड़ केंद्र सरकार ने दिए.
– 3200 हेक्टेयर में इस बार कुम्भ मेला का आयोजन होगा. पिछले बार यह सत्रह सौ में था.
– 15 जनवरी से होगी कुम्भ की शुरुवात.
– 04 मार्च को आयोजित होगा आखिरी स्नान.
– 182 देशों के प्रतिनिधियों को कुम्भ के लिए आमंत्रित किया गया है.
– 30 जनवरी को होगा प्रयागराज में संस्कृति कुम्भ का आयोजन
– 12 करोड़ लोगों का होगा जमावड़ा।
– 06 वर्ष में मनाये जाने वाले अर्द्धकुम्भ को इस बार कुम्भ का नाम दिया गया है.

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