देश में कम हो रहे हैं गधे, गायों की संख्‍या 18 फीसदी बढ़ी

भैंसों की कुल संख्या लगभग एक प्रतिशत बढ़कर 10 करोड़ 98.5 लाख हो गई, जबकि गायों और भैंसों सहित दुधारू पशुओं की गिनती 12 करोड़ 53.4 लाख है, जो पिछली जनगणना से छह प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है.

भारत में मवेशियों की आबादी में इज़ाफ़े के बावजूद हिंदी प्रांत उत्तर प्रदेश में इनकी संख्या कम हुई है. वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में मवेशियों की संख्या बढ़ी है.

बुधवार को पशुपालन विभाग ने जनगणना में यह जानकारी दी. जिसके मुताबिक भारत की पशुधन आबादी 2012 की तुलना में बढ़कर 53 करोड़ 57.8 लाख हो गई है जबकि इसी दौरान गायों की संख्या 18 प्रतिशत बढ़कर 14 करोड़ 51.2 लाख हो गई है.

बुधवार को जारी पशुधन गणना -2019 में पता चला कि पश्चिम बंगाल में पशुधन संख्या में सर्वाधिक 23.32 प्रतिशत की वृद्धि हुई. इसके बाद वृद्धि के मामले में तेलंगाना (22.21 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (15.79 प्रतिशत), बिहार (10.67 प्रतिशत) और मध्य प्रदेश (11.81 प्रतिशत) का स्थान है.

बयान में कहा गया है, ‘वर्ष 2019 में देश में कुल गोधन (गाय-बैल) की संख्या 19 करोड़ 24.9 लाख है, जो पिछली जनगणना की तुलना में 0.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. इसमें मादा गोधन (गायों की आबादी) 14 करोड़ 51.2 लाख है, जो पिछली जनगणना (2012) के मुकाबले 18 प्रतिशत बढ़ी है.’

विदेशी / क्रॉसब्रीड तथा स्वदेशी / गैर-विवरणित मवेशी आबादी क्रमशः पांच करोड़ 4.2 लाख और 14 करोड़ 21.1 लाख है. पिछलीगणना की तुलना में वर्ष 2019 में स्वदेशी / गैर-विवरणी मादा मवेशियों की संख्या में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. पिछली गणना की तुलना में वर्ष 2019 में कुल विदेशी / क्रॉसब्रीड मवेशियों की आबादी 26.9 प्रतिशत बढ़ी है.

भैंसों की कुल संख्या लगभग एक प्रतिशत बढ़कर 10 करोड़ 98.5 लाख हो गई, जबकि गायों और भैंसों सहित दुधारू पशुओं (दूध दे रहे और शुष्क) की गिनती 12 करोड़ 53.4 लाख है, जो पिछली जनगणना से छह प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. आंकड़ों के मुताबिक, देश में वर्ष 2019 में कुल भेड़ें सात करोड़ 42.6 लाख हैं, जो पिछली गणना से 14.1 फीसदी अधिक है.

उत्तर प्रदेश (1.35 प्रतिशत), राजस्थान (1.66 प्रतिशत) और गुजरात (0.95 प्रतिशत) में पशुधन में गिरावट हुई है.

भेड़, बकरी और मिथुन की आबादी दोहरे अंकों में बढ़ी है, जबकि घोड़े और टट्टू, सूअर, ऊंट, गधे, खच्चर और याक की गिनती में गिरावट आई है.

मतस्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘देश में कुल पशुधन की संख्या 53 करोड़ 57.8 लाख है, जो पशुधन गणना -2018 की तुलना में 4.6 प्रतिशत अधिक है.’

पशुधन की इस 20 वीं जनगणना के अनुसार, गोधन की हिस्सेदारी 35.94 प्रतिशत, बकरी (27.8 प्रतिशत), भैंस (20.45 प्रतिशत), भेड़ (13.87 प्रतिशत) और सूअर (1.69 प्रतिशत) है.

वर्ष 2012 की जनगणना की तुलना में गोधन, भैंस, मिथुन और याक की संख्या एक प्रतिशत बढ़कर 30 करोड़ 27.9 लाख हो गई. मिथुन अरुणाचल प्रदेश का राज्य पशु है.

नवीनतम गणना के अनुसार, बकरियों की संख्या 10 प्रतिशत बढ़कर 14 करोड़ 88.8 लाख हो गई है लेकिन सुअर की संख्या 12 प्रतिशत घटकर 90.6 लाख है. कुल मवेशियों में मिथुन, याक, घोड़े, टट्टू, खच्चर, गधे, ऊंट सहित अन्य पशुधन का 0.23 प्रतिशत का योगदान हैं और उनकी कुल संख्या 12.4 लाख है.

ताजा गणना रपट के अनुसार देश में 2019 में गधों की संख्या 61 फीसदी घटकर 1,20,000 रह गई, जबकि ऊंटों की संख्या 37 फीसदी घटकर 2,50,000 रह गई है.

बयान में कहा गया है, ‘देश में वर्ष 2019 में कुल घोड़े और टट्टू 3.4 लाख (3,40,000) हैं, जो पिछली गणना के मुकाबले 45.6 प्रतिशत कम है.’

मंत्रालय ने कहा कि पशुधन के अलावा, वर्ष 2019 में कुक्कुट की संख्या लगभग 17 प्रतिशत बढ़कर 85 करोड़ 18.1 लाख हो गई है.

बीसवीं पशुधन गणना सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी के साथ आयोजित की गई थी. इसमें लगभग 6.6 लाख गांव, 89,000 शहरी वार्ड को शामिल किया गया और इनमें 27 करोड़ से अधिक घरों और घुमन्तू परिवारों को शामिल किया गया.

चूंकि दिल्ली में जनगणना अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए इस रपट में दिल्ली के आंकड़े पिछली गणना के हैं.