आग की भट्टी बनी स्लीपर-जनरल बोगी, केरल एक्सप्रेस में सवार 4 यात्रियों की चली गई जान

इससे पहले 2 जून को भी यूपी की संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में सवार एक 18 वर्षीय युवती की ट्रेन में दम घुटने की वजह से मौत हो गई थी.

नई दिल्ली: उत्तर भारत में गर्मी और लू का प्रकोप अपने चरम पर है. सोमवार को नई दिल्ली-त्रिवेंद्रम केरल एक्सप्रेस (Kerala Express) जब झांसी रेलवे स्टेशन पर रुकी तो S-8 और S-9 बोगी में चार लोग अचेत अवस्था में पाए गए.

डॉक्टर्स की टीम जब वहां पहुंची तो मालूम पड़ा कि तीन लोगों की पहले ही मौत हो चुकी थी जबकि एक अन्य गंभीर हालत में था. उसे इलाज़ के लिए अस्पताल लाया गया था लेकिन उसकी भी मौत हो गई.

झांसी रेलवे मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने मंगलवार को इस बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए कहा, ‘सोमवार की रात 7 बजे गाड़ी संख्या 12626 केरल एक्सप्रेस स्टेशन पर पहुंची. इस रेल के डिब्बा संख्या एस-8 की बर्थ 59 के यात्री की तबीयत खराब होने की सूचना मिली. जब चिकित्सकों का दल पहुंचा तो पता चला कि, एस-8 के अलावा एस-9 में कई यात्री बीमार और अचेत हैं.’

बताया जा रहा है कि ये लोग वाराणसी और आगरा से घूम कर वापस कोयंबटूर लौट रहे थे. गाड़ी जब आगरा से निकल रही थी तो लू और गर्मी की वजह से इन यात्रियों की तबियत बिगड़ने लगी. झांसी पहुंचने तक ये लोग अचेत हो गए.

रेलवे के अनुसार, एस-8 डिब्बे में यात्रा कर रहे पचाया (80) व बालकृष्ण (67), एस-9 में यात्रा कर रही धन लक्ष्मी (74) और एक अन्य की मौत हो गई. तीनों ने यात्रा के दौरान ही दम तोड़ दिया, जबकि एक की मौत अस्पताल में उपचार के दौरान हुई.

रेलवे प्रशासन के मुताबिक केरल एक्सप्रेस में अतिरिक्त लगेज कोच लगाकर चारों रेल यात्रियों के शव उनके गृह राज्य भेजे जाएंगे, साथ ही इस घटना की उच्चस्तरीय जांच भी की जा रही है.

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इससे पहले 2 जून को भी यूपी की संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में सवार एक 18 वर्षीय युवती की ट्रेन में दम घुटने की वजह से मौत हो गई थी. युवती ट्रेन के जनरल डिब्बे में सवार थी, डिब्बे के अंदर बड़ी तादाद में लोग मौजूद थे. भीड़ की वजह से लड़की को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और आख़िरकार उसकी जान चली गई.

लड़की का नाम सीता बताया गया, जोकि उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की रहने वाली थी. सीता के पिता रामप्रकाश अहिरवार दिल्ली में मजदूरी करते हैं. सीता ने 31 मई को दिल्ली के लिए ट्रेन पकड़ी, उसके साथ परिवार भी मौजूद था. उन्हें दिल्ली के हज़रत निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर उतरना था. ट्रेन के जनरल डिब्बे में भीड़ होने के बावजूद किसी तरह से सीता और परिवार के बाकी लोगों को कामयाबी तो मिल गई लेकिन भीड़ की वहज से सीता की हालत बिगड़ने लगी.

सीता ने पिता से कहा भी कि गर्मी बहुत है उतर जाते हैं, मेरा दम घुट रहा है. लेकिन भीड़ अधिक होने की वजह से वो किसी स्टेशन पर उतरने की जगह नहीं बना पाए. ये भीड़ डिब्बे से कम होने की बजाय बढ़ती ही गई.

सही मौके पर भीड़ से बाहर न निकल पाने पर सीता बेहोश हो गई. ट्रेन जब झांसी पहुंची तो पिता ने बेहोश बेटी को ट्रेन से नीचे उतारा. रेलकर्मियों की मदद से डिप्टी एसएस को इस बात की जानकारी दी गई. खबर मिलते ही मौके पर पहुंची एंबुलेंस के जरिए सीता को रेलवे हॉस्पिटल ले जाया गया. जहां डॉक्टरों ने सीता को मृत घोषित कर दिया.

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