प्रिंसिपल बोले-रिक्‍शावालों संग भाग जाती हैं लड़कियां, गर्ल्‍स कॉलेज में दिलाई शपथ-लव मैरिज नहीं करेंगे

इस मामले में कॉलेज के प्रिंसिपल राजेंद्र हावरे ने कहा कि लड़कियां ऑटो-रिक्शा चालकों और पान की दुकान वालों के साथ भाग जाती हैं. क्या माता-पिता अपनी बेटियों को इसके लिए कॉलेज भेजते हैं.

महाराष्ट्र के अमरावती जिले के एक महिला कॉलेज में लगभग 40 छात्राओं ने वेलेंटाइन डे पर लव मैरेज नहीं करने का संकल्प किया है. उन्होंने शादी के दौरान दहेज देने या लेने के खिलाफ भी प्रतिज्ञा ली. इस मामले में कॉलेज के प्रिंसिपल राजेंद्र हावरे ने कहा कि लड़कियां ऑटो-रिक्शा चालकों और पान की दुकान वालों के साथ भाग जाती हैं. क्या माता-पिता अपनी बेटियों को इसके लिए कॉलेज भेजते हैं? इसलिए यह किया गया है, उनको पहले अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए और बाद में शादी के बारे में सोचना चाहिए.

राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) शिविर के दौरान चंदुर रेलवे शहर के महिला कला वाणिज्य महाविद्यालय के शिक्षकों ने छात्राओं को शपथ दिलाई. इसमें 100 छात्राओं ने भाग लिया. कॉलेज एक शैक्षिक संगठन विदर्भ यूथ वेलफेयर सोसाइटी द्वारा चलाया जाता है. जिसकी स्थापना कांग्रेस नेता और पूर्व राज्य शिक्षा मंत्री राम मेघे ने की थी. इस कॉलेज में कला और वाणिज्य में स्नातक और स्नातकोत्तर कराया जाता है.

छात्रों को शपथ दिलाई गई कि मैं शपथ लेता हूं कि मुझे अपने माता-पिता पर पूरा भरोसा है. इसलिए, चारों ओर हो रही घटनाओं को देखते हुए मैं प्यार में नहीं उलझूंगा और प्रेम विवाह नहीं करूंगी. इसके अलावा मैं दहेज की मांग करने वाले किसी से भी शादी नहीं करूंगी. अगर सामाजिक मजबूरियों के कारण मेरे माता-पिता दहेज देकर मेरी शादी करते हैं, तो मैं भविष्य में एक मां के रूप में अपनी होने वाली बहू के माता-पिता से दहेज नहीं लूंगी और अपनी बेटी की शादी के लिए भी दहेज नहीं दूंगी. मैं मजबूत और स्वस्थ भारत के लिए यह शपथ ले रही हूं.

कॉलेज में राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर प्रदीप डांडे ने कहा कि शिविर में महिलाओं के साथ चर्चा के दौरान शपथ दिलाने का विचार मेरे मन में आया. इससे महिलाओं के खिलाफ अपराधों को जन्म दिया है. हमने इस तरह के कई अपराध देखे हैं. सवाल यह है कि ऐसा क्यों हो रहा है? क्या हम इसे खत्म करने के लिए कुछ नहीं कर सकते?

उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान मैंने लड़कियों से पूछा कि वे प्रेम विवाह की ओर क्यों करना चाहती हैं? लड़कियां क्यों भागती हैं? क्या उन्होंने अपने माता-पिता पर विश्वास खो दिया है? इसी चर्चा के दौरान मुझे शपथ का विचार आया.

क्या शपथ लेना अनिवार्य है यह पूछने पर प्रदीप डांडे ने कहा कि नहीं. यह वैकल्पिक था. हमारा इरादा उनको जबरदस्ती शपथ दिलाना नहीं था, जो लड़कियां सहमत थीं उन्होंने शपथ ली जबकि अन्य बाहर थी. कॉलेज के प्रिंसिपल राजेंद्र हावरे के अनुसार शिविर में भाग लेने वाली 100 में से लगभग 40 लड़कियों ने ही शपथ ली है.

प्रिंसिपल ने कहा कि कोई भी प्यार का विरोध नहीं करता है, लेकिन युवाओं को प्यार और यौन आकर्षण के बीच अंतर को समझना चाहिए. माता-पिता अपने बच्चों को शिक्षा के लिए भेजते हैं और लड़कियां किसी के साथ भाग जाती हैं. यह हमारा कर्तव्य है कि हम छात्रों के बीच उनके माता-पिता और उनके करियर के प्रति जिम्मेदारी के मूल्यों को विकसित करें. इसलिए शपथ दिलाया गया है.

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