तेलंगाना के 460 गांव, 2 कस्बे हो गए लापता, जानिए कैसे हुई इतनी बड़ी गड़बड़ी

केंद्र और राज्य निदेशालय की नजर इस गड़बड़ी पर उस वक्त पड़ी जब वो 2011 की जनगणना के आंकड़ों का अध्ययन कर रहे थे.

तेलंगाना के 460 गांव और 2 कस्बे लापता हो गए हैं. इन लापता गांवों की पहचान केंद्रीय गृह मंत्रालय और तेलंगाना-आंध्र प्रदेश जनसंख्या निदेशालय ने जनगणना-पूर्व की एक गणना में की है.

केंद्र और राज्य निदेशालय की नजर इस गड़बड़ी पर उस वक्त पड़ी जब वो 2011 की जनगणना के आंकड़ों का अध्ययन कर रहे थे. ये 460 गांव प्रदेश के 14 नव-निर्मित जिलों का हिस्सा थे, जिनका निर्माण तेलंगाना राज्य सरकार ने साल 2016 के अक्टूबर महीने में जिलों के पुनर्गठन के समय किया था.

निदेशालय ने राज्य सरकार में मांगी सफाई
निदेशालय ने लापता हुए इन गांवों को लेकर तेलंगाना सरकार को सूचना भेजी है और इस पर सफाई मांगी है. लापता हुए ये गांव आदिलाबाद, खम्माम, वारंगल, करीमनगर, रंगारेड्डी, महबूबनगर और मेडक जिलों में स्थित हैं.

इनमें से ज्यादातर गांव महबूबनगर और रंगारेड्डी जिले में स्थित हैं. वहीं, गोडवाल और वाणापार्थी नाम के दो कस्बे भी लापता हैं.

उठा रहे थे सरकारी योजनाओं का लाभ
हैरानी की बात है कि 58 मंडलों में स्थित ये गांव सभी सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं. एक अधिकारी ने बताया कि तकनीकी रूप से देखें तो ये लोग राजस्व गांव के तौर पर लाभ नहीं उठ सकते हैं क्योंकि सरकार द्वारा जारी GOs में इनका नाम नहीं है.

अधिकारियों को एक और झटका तब लगा जब उन्हें पता चला कि इनमें से 36 गांवों के नाम 2011 की जनगणना से ही गायब थे. उच्च अधिकारियों ने इसके लिए जिला राजस्व अधिकारियों को दोषी ठहराया है. कहा जा रहा है कि मंडल और गांव के बार्डर में दुविधा होने की वजह से ये नाम छूट गए थे.

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