समझौता ब्लास्ट केसः पाकिस्तानी नागरिक ने असीमानंद की रिहाई को HC में दी चुनौती

राहिला ने अपने वकील मोमिन मलिक के माध्यम से हाई कोर्ट में अपील दाखिल की.

नई दिल्ली: समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस में स्वामी असीमानंद और बाकी आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ एक पाकिस्तानी महिला ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की है.

इस ब्लास्ट में 68 लोगों की मौत हुई थी.

पाकिस्तान मूल की नागरिक राहिला वकील ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर स्वामी असीमानंद और तीन अन्य लोगों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी है. राहिला के पिता मुहम्मद वकील की विस्फोट में मौत हो गई थी.

हरियाणा के पंचकूला स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की स्पेशल कोर्ट ने समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट केस के मुख्‍य आरोपी असीमानंद और तीन अन्‍य को बरी कर दिया था.

कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए राहिल वकील ने पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है. उन्होंने दावा किया है कि साल 2007 के समझौता एक्सप्रेस विस्फोट में उसके पिता भी मारे गए थे.

राहिला ने अपने वकील मोमिन मलिक के माध्यम से हाई कोर्ट में अपील दाखिल की. मलिक ने शुक्रवार को कहा, ‘उनकी ओर से मैंने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की जिसमें हमने पंचकूला एनआईए अदालत द्वारा स्वामी असीमानंद और तीन अन्य को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी है.

मलिक ने कहा कि राहिला विस्फोट में मारे गए पाकिस्तानी नागरिक मुहम्मद वकील की बेटी हैं. एआईए कोर्ट द्वारा आरोपियों को बरी किए जाने का पाकिस्तान में काफी विरोध हुआ था. ब्लास्ट में मारे गए लोगों के परिजन ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान से इस मामले को अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत में ले जाने की मांग की थी.

अमित शाह ने क्या कहा था?

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि “समझौता विस्फोट मामले में सात लोग पकड़े गए थे, जिन्हें देश की ही एजेंसियों ने पकड़ा था. अमरीका की एजेंसियों ने भी कहा कि इन्होंने विस्फोट किया है लेकिन बाद में अचानक एक धर्म विशेष के साथ टेररिज़्म को जोड़ने के लिए एक केस बनाया गया और जिन्होंने समझौता विस्फोट किया था, उन्हें बरी करके नए अभियुक्त बनाए गए. लेकिन इन लोगों को सज़ा इसलिए नहीं हुई क्योंकि इनके ख़िलाफ़ कोई सबूत नहीं थे.”

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टाइम्स ऑफ़ इंडिया की ख़बर के मुताबिक़ अमित शाह ने आरोप लगाया कि ये मामला राजनीतिक भावना से दर्ज किया गया था. उन्होंने ये भी कहा कि असली दोषियों को छोड़ दिया गया था, जिससे समझौता एक्सप्रेस के पीड़ितों को न्याय नहीं मिला.