74वां स्वतंत्रता दिवस: जांबाजों के नाम 1 कीर्ति और 9 शौर्य चक्र समेत 84 वीरता पुरस्कार

जम्मू कश्मीर पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल अब्दुल रशीद कालस को उनकी बहादुरी के लिए मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है. कीर्ति चक्र शांतिकाल में दिया जाने वाला दूसरा सबसे बड़ा सम्मान होता है.
Gallantry Awards on 74th Independence Day, 74वां स्वतंत्रता दिवस: जांबाजों के नाम 1 कीर्ति और 9 शौर्य चक्र समेत 84 वीरता पुरस्कार

स्वतंत्रता दिवस की 74वीं सालगिरह पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश की सुरक्षा के लिए बहादुर सैनिकों को वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया है. इसबार जम्मू और कश्मीर (J&K) पुलिस कांस्टेबल, एक स्पेशल फोर्स के ऑफिसर और एक भारतीय वायु सेना (IAF) पायलट समेत 84 सुरक्षा कर्मियों को वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है.

जम्मू कश्मीर पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल अब्दुल रशीद कालस को उनकी बहादुरी के लिए मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है. कीर्ति चक्र शांतिकाल में दिया जाने वाला दूसरा सबसे बड़ा सम्मान होता है. वहीं 9 सुरक्षाकर्मियों को उनकी बहादुरी के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है, जो कि शांतिकाल में दिया जाने वाला तीसरा सबसे बड़ा सम्मान है.

इसबार लेफ्टिनेंट कर्नल कृष्ण सिंह रावत, मेजर अनिल उर्स, हवलदार आलोक कुमार दुबे, विंग कमांडर विशाल नायर, जम्मू कश्मीर पुलिस डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल अमित कुमार, CISF सब इंस्पेक्टर महावीर प्रसाद (मरणोपरांत), CISF हेड कॉन्स्टेबल ई नायक (मरणोपरांत), CISF कॉन्स्टेबल महेंद्र कुमार पासवान (मरणोपरांत) और CISF कॉन्स्टेबल सतीश प्रसाद कुशवाह (मरणोपरांत) को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है.

5 सेना मेडल बार, 60 सेना मेडल

इसके अलावा पांच सेना मेडल बार (दूसरी बार सेना मेडल), 60 सेना मेडल, चार नव सेना मेडल और पांच वायु सेना मेडल से भी सुरक्षाबलों को सम्मानित किया गया है. 1 पैरा (स्पेशल फोर्स) के लेफ्टिनेंट कर्नल रावत को जम्मू कश्मीर में LoC के पास एक ऑपरेशन के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है. लेफ्टिनेंट कर्नल रावत और उनकी टीम ने घुसपैठ कर रहे आतंकियों से मुठभेड़ के पहले 36 घंटे तक घात लगाकर इंतजार किया और इस ऑपरेशन में चार आतंकी मारे गए थे. उनके दृढ़ नेतृत्व और वीरता की प्रशंसा के लिए उन्हें सम्मानित किया गया है.

मेजर अनिल उर्स ने भी एक ऐसे ही ऑपरेशन का नेतृत्व किया था, जिसमें पांच आतंकी मारे गए थे. उन्हें दिए गए प्रशस्ति पत्र के मुताबिक उन्होंने अपनी टीम की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए “साहस और दुर्लभ युद्ध नेतृत्व का प्रदर्शन किया.” वहीं जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-रोधी ऑपरेशन के दौरान, हवलदार दुबे ने A++ कैटेगरी के आतंकवादी को बेहद करीब जाकर मार गिराया था. प्रशस्ति पत्र में कहा गया है कि उनके साहस के चलते आतंकवादी भागने में कामयाब नहीं हो सके और आखिरकार सभी चार आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया.

राष्ट्रपति कोविंद ने अलग-अलग सैन्य अभियानों में उल्लेखनीय योगदान के लिए 19 सैन्यकर्मियों को मेंशन-इन-डिस्पैच दिए जाने की भी मंजूरी दी है. इनमें से आठ को ऑपरेशन मेघदूत और ऑपरेशन रक्षक के लिए मरणोपरांत दिया गया है.

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