अनुच्छेद 370 में संशोधन का विरोध कर बुरे फंसे सीएम नीतीश, सोशल साइट्स पर ऐसे बन रहा मज़ाक

शाह ने जम्मू कश्मीर से राज्य का दर्जा लिये जाने पर नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद द्वारा जतायी गयी चिंता का जिक्र करते हुए कहा, 'जैसे ही स्थिति सामान्य होगी और उचित समय आयेगा, हम जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा दे देंगे.'

नई दिल्ली: राज्यसभा ने सोमवार को अनुच्छेद 370 की अधिकतर धाराओं को खत्म कर जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख को दो केन्द्र शासित क्षेत्र बनाने संबंधी सरकार के दो संकल्पों को मंजूरी दे दी.

हालांकि कांग्रेस, जेडीयू (जनता दल यू ), आरजेडी (राष्ट्रीय जनता दल) समेत कई पार्टियों ने इस बिल का विरोध किया.

अनुच्छेद 370 समाप्त करने के संकल्प के विरोध में जनता दल यू और तृणमूल कांग्रेस ने सदन से वाक आउट किया.

जेडीयू नेता केसी त्यागी ने बिल का विरोध करते हुए कहा, ‘हमारे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जम्मू-कश्मीर मुद्दे को लेकर जय प्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया और जॉर्ज फर्नाडीस के विचारों का समर्थन करते हैं. इसलिए हमारी पार्टी राज्यसभा में पेश किए गए इस बिल का विरोध करती है. हमारी इस मुद्दे को लेकर अलग राय है. हमारे मुताबिक अनुच्छेद 370 को नहीं हटाया जाना चाहिए.’

नीतीश कुमार के स्टैंड को लेकर अब सोशल साइट्स पर उनकी खूब खिंचाई हो रही है. निशांत मिश्रा नाम के एक ट्विटर यूज़र ने लिखा, ‘आपको कराड़ा जवाब मिलेगा. आज पहली बार बिहारी होने पर शर्म महसूस हो रहा है.’

हरी विश्वास नाम के एक यूजर ने लिखा, ‘जेडीयू ने पहले तीन तलाक़ बिल पर केंद्र सरकार का विरोध किया. अब 370 और 35ए को लेकर नीतीश कुमार मोदी सरकार का विरोध कर रहे हैं. लेकिन जब चुनाव आता है तो नीतीश बीजेपी के साथ हो जाते हैं. नीतीश जी शर्म करो आप दल बदलू पार्टी ऑफ़ इंडिया हो गए हैं.’

श्रीकांत गणेश सिंह ने लिखा, ‘नीतीश कुमार और जेडीयू ने फिर से स्पष्ट कर दिया है कि वो राष्ट्र विरोधी हैं और तुष्टीकरण की राजनीति करते हैं.’

इससे पहले पूर्व पार्टी प्रवक्ता डॉ अजय आलोक ने बिहार के सीएम और पार्टी प्रमुख नीतीश कुमार से आर्टिकल 370 बिल में संशोधन पर केंद्र सरकार को सपोर्ट देने की अपील की है.

उन्होंने लिखा, ‘देश हित में अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार जी से अपील हैं की आर्टिकल 370 पे जो बिल आया हैं उस पे पार्टी के पूर्व के स्टैंड पर पुनःविचार होना चाहिए. देश और बिहार की जनता और जम्मू कश्मीर और लद्दाख़ की जनता की भावनाओं का सम्मान सर्वोपरि हैं उसको ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाए.’

बता दें कि गृह मंत्री अमित शाह ने अनुच्छेद 370 के कारण राज्य में विकास नहीं होने और आतंकवाद पनपने का दावा करते हुए आश्वासन दिया कि जम्मू कश्मीर को केन्द्र शासित क्षेत्र बनाने का कदम स्थायी नहीं है तथा स्थिति समान्य होने पर राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा.

उच्च सदन में कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के भारी हंगामे के बीच गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पेश किए गये दो संकल्पों एवं जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक को चर्चा के बाद मंजूरी दी गयी. साथ ही सदन ने जम्मू कश्मीर आरक्षण (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2019 को भी मंजूरी दी.

इनको पारित किये जाने के समय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी सदन में मौजूद थे. प्रधानमंत्री मोदी ने शाह की पीठ थपथपाते हुए उन्हें बधाई दी और गृह मंत्री शाह ने हाथ जोड़कर उनका आभार जताया.

बाद में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गृह मंत्री शाह द्वारा सदन में दिये गए भाषण की सराहना करते हुए उसे ‘व्यापक और सारगर्भित’ बताया.

सरकार के दोनों संकल्पों के एवं पुनर्गठन विधेयक के प्रावधानों के तहत जम्मू कश्मीर विधायिका वाला केन्द्र शासित क्षेत्र बनेगा जबकि लद्दाख बिना विधायिका वाला केन्द्र शासित क्षेत्र होगा. इन दोनों संकल्पों को साहसिक और जोखिमभरा माना जा रहा है.

दोनों संकल्पों और दोनों विधेयकों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री शाह ने जम्मू कश्मीर में आतंकवाद सहित वहां की तमाम समस्याओं की जड़ करार दिया.

शाह ने जम्मू कश्मीर से राज्य का दर्जा लिये जाने पर नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद द्वारा जतायी गयी चिंता का जिक्र करते हुए कहा, ‘जैसे ही स्थिति सामान्य होगी और उचित समय आयेगा, हम जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा दे देंगे.’

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर ‘देश का मुकुट मणि’ है और बना रहेगा.

गृह मंत्री ने जम्मू कश्मीर में आतंकवाद और सभी प्रकार के सामाजिक अन्याय के लिये सिर्फ अनुच्छेद 370 को जिम्मेदार ठहराते हुये कहा कि इसके हटने पर राज्य में विकास, अन्याय और आतंकवादी हिंसा सहित सभी प्रकार की बाधायें दूर हो जायेंगी.

शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में पिछले कुछ सालों में 41,849 स्थानीय लोग आतंकवाद के रक्तपात की भेंट चढ़े.

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