पैसों को लालच ने आशिक अहमद को बनाया काफिर, पहले था भारतीय सेना का खबरी, अब जैश का आतंकी

पुलवामा के ट्रक ड्राइवर नेंगरू को कभी भारत के पक्षधर कश्मीरी के रूप में जाना जाता था, लेकिन आज वह पैसों के लालच ने उसे काफिर बना डाला. नेंगरू भारतीय सीमा में हथियार, नशीले पदार्थ और आतंकवादियों भेजने वाले टॉप के आतंकियों में शुमार हो चुका है.
आशिक अहमद नेंगरू, पैसों को लालच ने आशिक अहमद को बनाया काफिर, पहले था भारतीय सेना का खबरी, अब जैश का आतंकी

नई दिल्ली: हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी, जिस को भी देखना हो कई बार देखना…निदा फाजली साहब का ये मशहूर शेर आशिक अहमद नेंगरू के ऊपर बिल्कुल सटीक बैठता है. नेंगरू कभी भारतीय सेना का विश्वसनीय खबरी होता था लेकिन इसके दूसरे चेहरे को सेना पहचान नहीं सकी. अब ये आदमी जैश का खूंखार आतंकी बन चुका है.

ऑन लाइन न्यूज के मुताबिक, पुलवामा के ट्रक ड्राइवर नेंगरू को कभी भारत के पक्षधर कश्मीरी के रूप में जाना जाता था, लेकिन आज वह पैसों के लालच ने उसे काफिर बना डाला. नेंगरू भारतीय सीमा में हथियार, नशीले पदार्थ और आतंकवादियों भेजने वाले टॉप के आतंकियों में शुमार हो चुका है.

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पंजाब में खुफिया ड्रोन गिरने के बाद कश्मीर घाटी में उन 40 से ज्यादा आतंकवादियों को दबोचने के लिए बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चालाया जिन्हें नेंगरू ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से भारत भेजा था. नेंगरू पीओके में पाकिस्तान के खूंखार आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का नया पोस्टर बॉय बनने के बाद से भारत में कुछ बड़ा ऑपरेशन करने को उतावला है.

जानकारी के मुताबिक नेंगरू पाकिस्तान में प्रशिक्षण प्राप्त किया. इसके बाद बड़ी संख्या आतंकवादियों को अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए जम्मू-कश्मीर में भेजा है जिनमें फिदायिनों के भी कुछ छोटे-छोटे समूह हैं. नेंगरू पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) की मदद से पिछले महीने पंजाब में हथियार उतारने की तैयारी की थी. सीमापार से स्मगलिंग के जरिए भारत में घातक हथियार भेजने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था. कितनी दिलचस्प बात है कि कभी नेंगरू की खबर पर घाटी में कई खूंखार आतंकियों को मार गिराया गया था.

नेंगरू पुलवामा के काकापोरा इलाके का निवासी है जो श्रीनगर से 12 किमी दूर पड़ता है. उसने अलगाववादी नेताओं और भारत विरोधी ताकतों के बीच अच्छी पैठ बनाई है. इंटेलिजेंस एजेंसियों के एक डोजियर से पता चलता है कि इसी नेटवर्क के दम पर उसकी श्रीनगर और उसके आसपास के इलाकों में आतंकी गतिविधियों पर गहरी पकड़ बन गई है.
डोजियर बताता है कि नेंगरू हिज्बुल मुजाहिद्दीन के एक लीडर के संपर्क में आया जिसने उसे पुलवामा में पत्थरबाजी करवाने का जिम्मा सौंप दिया. वह इलाका घाटी के पत्थरबाजों का सबसे बड़ा केंद्र है. भारत विरोधी हर काम के लिए नेंगरू को कुछ हजार रुपये मिला करते थे. जब उसका लालच बढ़ा तो उसने हिज्बुल को अलविदा कह आईएसआई के हाथों में खेलने लगा.

सुरक्षा बलों ने 12 सितंबर को JK3E 2000 नंबर के ट्रक को पंजाब और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर लखनपुर में पकड़ लिया. इसमें चार एके 56 और दो एके 47 राइफलें बरामद की गईं. सूत्रों ने बताया कि इन हथियारों की रिकवरी के बाद एजेसियों ने आईएसआई की एक खतरनाक आतंकवादी योजना पर से पर्दा उठा दिया जिसे नेंगरू की देखरेख में अंजाम दिया जाना था. फिलहाल, नैशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) पंजाब और जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ तालमेल करते हुए मामले की जांच कर रही है.

Related Posts