रातोंरात ABVP ने DU कैंपस में लगवाई सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह और सावरकर की मूर्ति

AISA अध्यक्ष कवलप्रीत कौर का कहना है कि ABVP सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह की ओट में सावरकर के विचारों को साधने और उन्हें वैध बनाने की कोशिश में जुटी है. इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा.

दिल्ली विश्वविद्यालय में मंगलवार को बीजेपी-आरएसएस की छात्र विंग ABVP के नेतृत्व वाले विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) ने नॉर्थ कैंपस की आर्ट फैकल्टी के गेट के बाहर वीडी सावरकर, भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस के स्टैचू स्थापित करवा दिए.

विश्वविद्यालय के अधिकारियों की अनुमति लिए बिना DUSU ने रातोंरात ये स्टैचू लगवा दिए. लॉ फैकल्टी के गेट पर तैनात गार्ड ने बताया कि एक मिनी ट्रक लगभग 2 बजे एक हरे रंग के टैंट जैसी कोई चीज लाया था, जिसे गेट के बाहर स्थापित किया गया. लगभग 9.30 बजे, स्टैचू लगने के बाद हरे रंग के उस टैंट जैसी चीज को हटा लिया गया था.

दिल्ली विश्विद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष और ABVP नेता शक्ति सिंह ने अनुमति संबंधित सवाल के जवाब पर कहा कि इन मूर्तियों को लगाने के लिए उन्होंने कई बार विश्विद्यालय प्रशासन से संपर्क किया था, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया. हालांकि ABVP के इस कदम की कांग्रेस की छात्र इकाई NSUI और और लेफ्ट समर्थित छात्र संगठन AISA ने आलोचना की है.

दोनों ही छात्र संगठन दे रहे हैं विरोध प्रदर्शन की धमकी

छात्रसंघ अध्यक्ष शक्ति सिंह का साफ कहना है अगर इस प्रतिमा को हटाए जाने की कोई भी कोशिश की गई तो वह विरोध प्रदर्शन करेंगे. उनका कहना है कि वह पिछले साल नवंबर से इन प्रतिमाओं को लगवाने के लिए प्रशासन से संपर्क कर रहे थे, लेकिन प्रशासन इस पर चुप्पी साधे रहा.

शक्ति सिंह ने कहा कि 9 अगस्त को उन्होंने एक बार फिर ये मूर्ति लगाने के लिए प्रशासन से आग्रह किया, लेकिन इस बार भी उन्हें कोई जवाब नहीं मिला. इशके बाद उन्होंने खुद मुर्ति लगवाने का जिम्मा उठाया. छात्रसंघ के इस कदम की आलोचना करते हुए NSUI की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा का कहना है कि वो भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस के बराबर पर सावरकर को नहीं रख सकते हैं.

वहीं AISA अध्यक्ष कवलप्रीत कौर का कहना है कि ABVP सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह की ओट में सावरकर के विचारों को साधने और उन्हें वैध बनाने की कोशिश में जुटी है. इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा. कौर का कहना है कि उन्होंने जिस जगह पर मूर्ति स्थापित की है वह सार्वजनिक है किसी की निजी नहीं है. NSUI का कहना है कि अगर मूर्ति नहीं हटाई गई तो वह विरोध प्रदर्शन करेंगे.

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