अमित शाह के साथ फोटो में दिखे सनी देओल, भाजपा में शामिल होने के लगाए जा रहे हैं कयास

सनी देओल (Sunny Deol) के बीजेपी में शामिल होने की खबरों ने जोर पकड़ लिया है. बीजेपी (BJP) अध्यक्ष अमित शाह (Amit Shah) के साथ सनी देओल की फोटो वायरल हो रही है.

नई दिल्ली: सनी देओल (Sunny Deol) की अमित शाह (Amit Shah) से मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद एक बार फिर चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है कि सनी देओल भाजपा (BJP) ज्वाइन कर सकते हैं और पंजाब की गुरदासपुर या अमृतसर सीट से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं. सनी देओल अपने परिवार में अकेले नहीं हैं जो राजनीति में उतर सकते हैं उनसे पहले उनके पिता धर्मेंद्र राजस्थान की बीकानेर सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर सांसद बने थे.

क्या है पंजाब का समीकरण

पंजाब की बात की जाए तो यहां शिरोमणि अकाली दल भाजपा के साथ मिलकर गठबंधन में चुनाव लड़ती है जिसमें से 10 सीटों पर शिरोमणि अकाली दल जबकि 3 सीटों पर भाजपा चुनाव लड़ती है. माना यह जा रहा है कि सनी देओल खुद गुरदासपुर सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं. पंजाब के माझा इलाके में पड़ने वाली गुरदासपुर लोकसभा सीट जाट बाहुल्य सीट मानी जाती है. ऐसे में यदि सनी देओल यहां से चुनावी मैदान में उतरते हैं तो उन्हें बड़ा फायदा हो सकता है. सनी देओल की स्टार इमेज उन्हें चुनाव जीतने में मदद कर सकती है.

विनोद खन्ना की पत्नी भी हैं दावेदार

वहीं दूसरी ओर गुरदासपुर सीट से भाजपा स्वर्गीय विनोद खन्ना की पत्नी कविता खन्ना और भाजपा के स्थानीय नेता स्वर्ण सलारिया के नाम पर भी विचार कर रही है. कविता खन्ना की बात की जाए तो उन्हें इस सीट पर एक स्ट्रांग कैंडिडेट के तौर पर नहीं देखा जा रहा. कारण यह है कि कविता खन्ना स्थानीय नहीं है और साथ में विनोद खन्ना की मौत के बाद इलाके में ज्यादा एक्टिव भी नहीं रही हैं जिस वजह से लोकल लीडरशिप भी उनके पक्ष में नहीं है.

स्वर्ण सलारिया भी हैं मैदान में

दूसरी ओर स्वर्ण सलारिया जाने-माने व्यापारी हैं और गुरदासपुर लोकसभा सीट पर विनोद खन्ना की मौत के बाद उपचुनाव लड़ चुके हैं जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. उपचुनाव में उनकी हार उनके खिलाफ जाती है जबकि उनका बड़ा व्यापारी होना उनके पक्ष में जाता है. ऐसे में माना जा रहा है कि बीजेपी उनके नाम को भी अनदेखा नहीं कर रही है.

अमृतसर सीट से हार चुके हैं जेटली

अमृतसर लोकसभा सीट भी सनी देओल के लिए विकल्प के तौर पर देखी जा रही है. याद रहे देश भर में मोदी लहर होने के बावजूद अमृतसर लोकसभा सीट पर भाजपा के सीनियर नेता अरुण जेटली को बड़ी हार का सामना करना पड़ा था. इसलिए भगवा ब्रिगेड इस सीट पर कोई बड़ा चेहरा तलाश रही है जिसकी या तो स्टार इमेज हो या फिर सिख चेहरे के तौर पर एक बड़ी छवि हो. इस सीट पर चुनावी समीकरण के हिसाब से सनी देओल का नाम फिट बैठता है पर एक कांटा है साल 2014 में अरुण जेटली की हार.

धर्मेंद्र और बादल परिवार रहे हैं करीबी

धर्मेंद्र और बादल परिवार दोनों के बीच काफी गहरे संबंध हैं. इन संबंधों में किसी भी तरह का टकराव ना आए इसलिए गुरदासपुर सनी देओल के लिए एक फिट सीट हो सकती है पर भाजपा उन्हें अमृतसर से चुनावी मैदान में उतारने पर गंभीर तौर पर मंथन कर रही है. हालांकि पार्टी के पास अमृतसर सीट के लिए विकल्प के तौर पर हरदीप सिंह पुरी और राजेंद्र मोहन सिंह छीना भी हैं पर हरदीप सिंह पुरी का कोई जमीनी आधार ना होना उनके खिलाफ जाता है जबकि राजेंद्र मोहन सिंह छीना का इस सीट पर उपचुनाव हार जाना उनके खिलाफ जाता है. पर फिर भी छीना स्थानीय नेता हैं इसलिए पार्टी उनके नाम को अनदेखा नहीं कर रही है.