गलवान संघर्ष: ICRC ने किया था भारत और चीन से संपर्क, पूछा था – जिनेवा कन्वेंशन का पालन हुआ?

गलवान घाटी में 15 जून की रात को हिंसक संघर्ष हुआ था. इसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे, जिसमें कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू भी शामिल थे.

india china face off on LAC
वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारतीय सैनिक (FILE)

गलवान घाटी में हुए हिंसक संघर्ष (Galwan Clash) को तीन महीनों का वक्त बीत चुका है. अब संघर्ष के बाद की एक अहम बात सामने आई है. पता चला है कि गलवान संघर्ष के बाद भारत और चीन दोनों से ही यह पूछा गया था कि क्या उन्होंने जिनेवा कन्वेंशन का पालन किया या नहीं. गलवान घाटी में 15 जून की रात को हिंसक संघर्ष हुआ था. इसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे, जिसमें कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू भी शामिल थे. चीन ने अबतक खुलकर मारे गए अपने जवानों के बारे में नहीं बताया है.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, भारत और चीन दोनों से यह सवाल इंटरनैशनल कमिटी फॉर द रेड क्रॉस (ICRC) ने किया था. दरअसल, जिनेवा कन्वेंशन के तहत ICRC को यह काम सौंपा गया है कि वह अंतरराष्ट्रीय और आंतरिक सशस्त्र संघर्ष की स्थिति में पीड़ितों की मदद करे. इसमें घायल, कैदी, रिफ्यूजी, नागरिक आदि शामिल होते हैं.

भारत और चीन से ICRC ने किया था संपर्क

खबर के मुताबिक, संघर्ष के कुछ दिन बाद ही दोनों देशों से ICRC ने संपर्क किया था. ICRC ने जिनेवा स्थित पर्मानेंट मिशन ऑफ इंडिया से इस बारे में पूछा था. यह बात पर्मानेंट मिशन ऑफ चाइना से भी पूछी गई थी. ICRC से जब इस बारे में ज्यादा जानकारी लेने की कोशिश की गई तो कहा गया कि ऐसी बातें सीक्रेट होती हैं, जिन्हें बताया नहीं जा सकता. बस यह बताया गया कि जहां भी मानवीय मुद्दे होते हैं वहां ICRC नियमित तौर पर पक्षों से बातचीत करता है.

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दरअसल, बाकी सदस्यों की तरह भारत और चीन जिनेवा कन्वेंशन (1949) पर राजी हुए थे. इसमें 4 अंतरराष्ट्रीय समझौते हुए थे जो यह सुनिश्चित करते थे कि विवाद की स्थिति में दोनों पक्ष आम नागरिकों और मेडिकल कर्मियों के साथ मानवीय व्यवहार करेंगी. इसके साथ-साथ जब युद्ध की स्थिति ना हो तो जवानों के साथ, युद्ध बंदियों के साथ और घायल जवानों के साथ भी ऐसा ही बर्ताव किया जाना है.

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