कीर्ति आजाद और शत्रुध्न सिन्हा के बाद अब आरके सिंह हो गए हैं बागी?

आरा से इस बार आर.के. सिंह को भी टिकट मिलने में संदेह है. भाजपा आरा से मीना सिंह को लड़ाना चाहती है. सूत्रों की मानें तो आर. के. सिंह को काराकाट सीट से लड़ने का प्रस्ताव दिया गया था, जहां से उपेंद्र कुशवाहा सांसद हैं और अब वह महागठबंधन के साथ हैं.

पटना: बिहार के आरा से सांसद और केंद्रीय मंत्री आर. के. सिंह राज्य की नीतीश कुमार सरकार से बहुत खफा मालूम पड़ते हैं. आर. के. सिंह अपने बयानों के जरिए सीधे राज्य सरकार पर हमला कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “बिहार का सरकारी सिस्‍टम इस कदर घूसखोरी में जी रहा है कि गरीब को गरीब ही रहना है. बिहार का कुछ भी नहीं हो सकता है. देशभर में ऐसा सिर्फ बिहार में हो रहा है. हां, कुछ रोग उत्‍तर प्रदेश को भी लगा हुआ है.”

आर. के. सिंह ने राज्य की स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि विभाग पर भी कई सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा, “सिविल सर्जन घुस लेते हैं. विद्यालयों में छात्र नहीं आते और शिक्षा अधिकारी पैसे खाते हैं. किसानों को अपनी फसल सरकार को बेचने के लिए घूस देना पड़ता है.” आर. के. सिंह ने ये बातें अपने संसदीय क्षेत्र आरा के चैम्बर ऑफ कॉमर्स में कहीं.

बिहार में भाजपा गठबंधन के बदले स्वरूप और बदली परिस्थितियों में इस बार सिर्फ 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. जबकि 2014 में भाजपा के 22 सांसदों ने जीत दर्ज की थी. इनमें से बेगूसराय के भोला सिंह का निधन हो गया, जबकि कीर्ति आजाद और शत्रुध्न सिन्हा बागी हो गए हैं. इसके बावजूद दो सिटिंग सांसदों का टिकट कटना तय माना जा रहा है.

आरा से इस बार आर.के. सिंह को भी टिकट मिलने में संदेह है. भाजपा आरा से मीना सिंह को लड़ाना चाहती है. भाजपा के सूत्रों की मानें तो आर. के. सिंह को बगल की सीट काराकाट से लड़ने का प्रस्ताव दिया गया था, जहां से उपेंद्र कुशवाहा सांसद हैं और अब वह महागठबंधन के साथ हैं.

वहीं, काराकाट से नीतीश कुमार उपेंद्र कुशवाहा के खिलाफ अपना उम्मीदवार उतारना चाहते हैं. ऐसे में आर. के. सिंह के टिकट पर तलवार लटक रही है. माना जा रहा है कि इसी आशंका को भांपकर आर. के. सिंह एनडीए सरकार (खासकर नीतीश कुमार पर) बरस रहे हैं.