सीमा विवाद के बीच रोहतांग पास के बाद अब शिंकू ला में टनल बनाने पर विचार

अधिकारियों का कहना है कि अब केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख (Ladakh) के आगे के इलाकों के लिए 13.5 किलोमीटर लंबी शिंकू ला सुरंग (Shinku La tunnel) बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है.

शिंकू ला (Twitter)

हिमालय रेंज में चीन (China) और पाकिस्तान (Pakistan) दोनों के साथ बढ़े सीमा तनाव के बीच सड़क निर्माण परियोजना के तहत रोहतांग पास हाइवे सुरंग के काम को शुरू किया था. अधिकारियों का कहना है कि अब केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख (Ladakh) के आगे के इलाकों के लिए 13.5 किलोमीटर लंबी शिंकू ला सुरंग (Shinku La tunnel), जो सबसे छोटी, सुरक्षित और सुरक्षाबलों के लिए तीसरा वैकल्पिक गलियारा बनाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है.

IANS न्यूज एजेंसी के मुताबिक, विशेषज्ञों ने बताया कि 475- किलोमीटिर लंबे मनाली-कीलोंग-लेह हाइवे पर 9.2 किमी लंबी घोड़े की नाल के आकार की सिंगल-ट्यूब, टू-लेन सुरंग, जो समुद्र तल से 3,000 मीटर से अधिक लंबी दुनिया की सबसे लंबी मोटर योग्य सुरंग बनाना रक्षा मंत्रालय का एक महत्वपूर्ण कदम है. ये हाइवे मुख्य रूप से सशस्त्र बलों द्वारा लद्दाख में चीन और पाकिस्तान की सीमा पर स्थित क्षेत्रों में पहुंचने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

मालूम हो कि रोहतांग सुरंग, जो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का एक सपना थी और मरणोपरांत उनके नाम पर इसका उद्घाटन 3 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दौरे के दिन करेंगे. सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा 3.10 करोड़ रुपए से ज्यादा की लागत और साथ 10 साल की कठिन मेहनत के बाद सुरंग को पूरा किया गया है.

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BRO के एक अधिकारी ने कहा, “रोहतांग सुरंग अकेले मनाली-कीलोंग-लेह एक्सिस को सभी मौसम में जोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं है, क्योंकि ये सुरंग केवल किलोंग के नागरिकों के लिए ज्यादा मददगार साबित होगी.”

“किलोंग और लेह के बीच कई इलाकों में बर्फ से बंद होता है रास्ता”

उन्होंने आगे कहा “तीन अन्य ऊंचाई वाले पहाड़ पास किलोंग और लेह के बीच स्थित हैं. अभी भी वहां साल में कम से कम छह महीने तक बर्फ के कारण हाइवे रुक जाता है.” अधिकारी के अनुसार, ऑल-वेदर रोड के लिए मनाली हाइवे पर शिंकू ला या हाइवे पर तीन के पास पर रोहतांग पास जैसी और ज्यादा सुरंगों जरूरत है.

बीआरओ भी राजसी पास से बचने के लिए रोहतांग सुरंग की तरह 13.5 किलोमीटर लंबी बर्फबारी से बचाव के लिए शिंकू ला के नीचे एक सुरंग बनाने के बारे में भी सोच रहा है. एक अधिकारी ने बताया, “शिंकू ला के नीचे की सुरंग मनाली और लेह के बीच की दूरी को काफी कम कर देगी.”

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