कृषि कानून: सीतारमण का सोनिया पर निशाना, पूछा- ‘क्या कांग्रेस ने घोषणापत्र में झूठ कहा’

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने कांग्रेस शासित राज्यों से कहा था कि वह कृषि कानून (Farm Act) के खिलाफ कानून पारित करें जिसे लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को उन पर जमकर निशाना साधा.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 12:00 am, Wed, 30 September 20

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने कांग्रेस शासित राज्यों से कहा था कि वह कृषि कानून (Farm Act) के खिलाफ कानून पारित करें जिसे लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को उन पर जमकर निशाना साधा.

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 2019 के लोकसभा चुनाव के अपने घोषणा पत्र में APMC एक्ट में संशोधन की बात की थी, जिसे बीजेपी ने कर दिखाया है. ऐसे में कांग्रेस विरोध क्यों कर रही है. अगर उसे विरोध ही करना है तो वह कह दे कि उसने घोषणा पत्र में झूठा वादा किया था. आज आखिर कांग्रेस राज्यों से केंद्र के खिलाफ कानून लाने की बात क्यों कह रही है?

निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कांग्रेस घोषणापत्र ट्वीट करते हुए पूछा कि क्या कांग्रेस ने देश की जनता से झूठा वादा किया था?

यह भी पढ़ें- DGCA के साथ तनाव के बाद लुफ्तांसा ने 20 अक्टूबर तक सभी भारतीय फ्लाइट्स रद्द की

आपको बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेस शासित प्रदेशों की सरकारों से सोमवार को कहा कि वे केंद्र सरकार के कृषि कानून को निष्प्रभावी करने के लिए अपने यहां कानून पारित करने की संभावना पर विचार करें. कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बयान जारी करते हुए कहा कि सोनिया गांधी ने कांग्रेस शासित राज्यों को सलाह दी है कि वो संविधान के अनुच्छेद 254(A) के तहत कानून पारित करने के संदर्भ में गौर करें.

तीनों कानून हो जाएंगे अस्वीकार्य

वेणुगोपाल ने कहा कि यह अनुच्छेद इन कृषि विरोधी एंव राज्यों के अधिकार क्षेत्र में दखल देने वाले केंद्रीय कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए राज्य की विधानसभाओं को अधिकार देता है. वर्तमान में पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पुडुचेरी में कांग्रेस की सरकारे हैं. महाराष्ट्र और झारखंड में वहग गठबंधन का सरकार का हिस्सा हैं.

यह भी पढ़ें- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के पिता श्रीकृष्ण बिरला का निधन

वेणुगोपाल ने दावा किया कि राज्य के इस कदम से कृषि संबंधी तीन कानूनों के अस्वीकार्य एवं किसान विरोधी प्रावधानों को दरकिनार किया जा सकेगा. इन प्रावधानों में न्यनतम समर्थन मूल्य को खत्म करने और मंडियों को बाधित करने का प्रावधान शामिल है.