डोभाल को प्रमोशन के साथ मोदी की टीम में मिली जगह, किन वजहों ने बनाया खास जानिए

अजीत डोभाल एक बार फिर बतौर एनएसए मोदी सरकार को ज्वाइन कर चुके हैं. जानिए वो बातें जिनकी वजह से डोभाल खास हैं.
ajit doval, डोभाल को प्रमोशन के साथ मोदी की टीम में मिली जगह, किन वजहों ने बनाया खास जानिए

एक बार फिर मोदी सरकार में अजीत डोभाल की उपस्थिति तय हो गई है. इस बार भी वो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार होंगे मगर उनका प्रमोशन कर दिया गया है. अब वो कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त कर चुके हैं.

हालांकि डोभाल के मोदी सरकार में फिर से आने पर किसी को शक नहीं था लेकिन बीजेपी के बागी यशवंत सिन्हा ने उनकी उम्र का हवाला देकर इस चयन पर सवाल खड़ा करने की कोशिशें की हैं. उन्होंने ट्वीट किया कि अजीत डोभाल 74 साल के हो चुके हैं तब भी उन्हें कैबिनेट रैंक के साथ 5 साल के लिए एनएसए नियुक्त किया गया है. जो सासंदों और मंत्रियों पर लागू होता है शायद वो नियम कैबिनेट रैंक के लिए लागू नहीं होता.

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अजीत डोभाल पिछली सरकार में भी काफी प्रभावशाली थे. उन्हें तो ज़ेड श्रेणी की सुरक्षा दी ही गई है, उनके बेटे शौर्य डोभाल को भी इसी दर्जे की सुरक्षा मिली है.

डोभाल ने पांच सालों के कार्यकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा की ज़िम्मेदारी तो उठाई ही थी, साथ ही उनके प्रयासों से अगस्टा वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर मामले के बिचौलिये क्रिश्चियेन मिशेल को भारत लाया जा सका था. ये भी बताया जाता है कि 2016 में पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक का आइडिया भी उन्हीं का था.

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पुलवामा में 26 फरवरी को हुए आतंकी हमले के बाद बालाकोट एयर स्ट्राइक का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है. कहा जाता है कि इस हमले में 250 आतंकियों की मौत हुई थी जिसके बाद आतंकी गतिविधियो को धक्का पहुंचा था.

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अजीत डोभाल 1968 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं जिनका अधिकांश वक्त आईबी में गुज़रा है. वो तरक्की करते हुए आईबी चीफ तक बने थे. कहा जाता है कि उन्होंने 6 साल पाकिस्तान में भी बिताए. वो पहले पुलिस अधिकारी हैं जिन्हें 1988 में कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया. अपने आईबी के कार्यकाल के दौरान उन्होंने अहम ऑपरेशंस को सफलतापूर्वक अंजाम दिया जिस वजह से सरकारें उन पर भरोसा करती रही हैं.

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