अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री की शपथ लेकर शरद पवार को दिया धोखा या खेल कुछ और?

दरअसल एक वक्त ऐसा था जब लगभग यह तय माना जाने लगा था कि अजित पवार ही शरद पवार के राजनीतिक उत्तराधिकारी होंगे, लेकिन बाद में अजित फ्रेम से बाहर होते गए.
Ajit pawar Sharad Pawar, अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री की शपथ लेकर शरद पवार को दिया धोखा या खेल कुछ और?

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए देंवेंद्र फडणवीस एक बार फिर से राज्य के मुख्यमंत्री बन गए है. राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के सामने देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार सुबह मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. वहीं एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) प्रमुख शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

सूत्रों के मुताबिक कहा जा रहा है कि बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने के फैसले के बाद एनसीपी में फूट पड़ सकती है. संभवत: पार्टी के 22 विधायक एनसीपी से अलग हो सकते हैं. वहीं दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि अजित पवार ने शरद पवार की सहमति के बाद ही मिलकर सरकार बनाने का फैसला किया है. हालांकि अजित पवार ने ख़ुद इस बात की अब तक पुष्टि नहीं की है.

वहीं एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने स्पष्ट किया है कि उन्हें इस गठबंधन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, उन्हें सुबह सात बजे इस बात की जानकारी मिली है.

एनसीपी परिवार में पहले से थी फूट

महाराष्ट्र चुनाव से पहले ही सबसे बड़े राजनीतिक परिवार एनसीपी में फूट पड़ गई थी. जब शरद पवार के भतीजे अजित पवार ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया. अजित पवार ने कहा कि कथित एमएससी बैंक घोटाले में पार्टी प्रमुख शरद पवार का बेवजह नाम लिए जाने से दुखी होकर उन्होंने ‘अंतरआत्मा’ की आवाज पर विधायक पद से इस्तीफा दिया. हालांकि उन्होंने संकेत दिया कि वह राजनीति नहीं छोड़ रहे हैं. वह वही करेंगे जो उनके चाचा उनसे कहेंगे.

अजित से जब पूछा गया कि क्या वह बारामती से दोबारा चुनाव लड़ेंगे तो उन्होंने कहा, “पवार साहेब मुझसे जो कहेंगे, मैं वो करूंगा.”

लेकिन क्या यह फैसला ईडी के नोटिस की वजह से ली गई थी या असल में यह लड़ाई उत्तराधिकार को लेकर था.

दरअसल एक वक्त ऐसा था जब लगभग यह तय माना जाने लगा था कि अजित पवार ही शरद पवार के राजनीतिक उत्तराधिकारी होंगे, लेकिन बाद में अजित फ्रेम से बाहर होते गए.

पहले सुप्रिया की एंट्री हुई और उन्होंने अपने को अच्छे से स्थापित भी कर लिया. फिर अजित के दूसरे चाचा का परिवार भी पॉलिटिक्स में आ गया.

अजित अपने पुत्र को स्थापित भी नहीं कर पाए थे कि दूसरे चाचा के पौत्र ने अपना दावा ठोक दिया.

अजित को लगता है कि शरद चाचा दूसरे चाचा के परिवार को ज्यादा तव्वजो दे रहे हैं. इस बीच एनसीपी ने महाराष्ट्र की बीजेपी-शिवसेना सरकार के खिलाफ यात्रा निकाली, लेकिन उसका नेतृत्व अजित पवार को सौंपने के बजाय शरद पवार ने पार्टी के दो दूसरे नेताओं को दिया.

बताया जाता है कि यहीं से अजित के दिल में यह बात पक्के तौर पर घर कर गई कि उन्हें किनारे लगाने की कोशिश हो रही है. राजनीति के वह कोई नए खिलाड़ी तो हैं नहीं, लिहाजा उन्होंने अपना दांव चलने के लिए ऐसा मौका चुना, जब एनसीपी के सामने महाराष्ट्र की पॉलिटिक्स में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की सबसे बड़ी चुनौती है.

Related Posts