26 नवंबर को अज‍ित पवार ने डिप्‍टी CM पद से इस्‍तीफा दिया, अगले दिन सिंचाई घोटाले में मिली क्‍लीन चिट

27 नवंबर को, हाई कोर्ट में एंटी करप्‍शन ब्‍यूरो (ACB) ने हलफनामा लगाया. 28 दिसंबर को उद्धव के नेतृत्‍व में शिवसेना-NCP-कांग्रेस की सरकार बनी.

महाराष्‍ट्र में उद्धव ठाकरे सरकार के शपथ लेने से एक दिन पहले ही अजित पवार को सिंचाई घोटाले में क्‍लीन चिट दी गई. 27 नवंबर को, बॉम्‍बे हाई कोर्ट में एंटी करप्‍शन ब्‍यूरो (ACB) ने हलफनामा लगाया. इसमें कहा गया कि “VIDC चेयरमैन/जन संसाधन विकास मंत्री को एजेंसियों के कृत्‍यों के लिए जिम्‍मेदार नहीं ठहराया जा सकता.” NCP नेता पवार पिछले एक दशक से इस घोटाले में जांच का सामना कर रहे थे.

26 नवंबर को BJP के देवेंद्र फडणवीस ने मुख्‍यमंत्री और पवार ने डिप्‍टी सीएम पद से इस्‍तीफा दिया था. सुप्रीम कोर्ट से बहुमत परीक्षण के आदेश के बाद, दोनों नेताओं ने राज्‍यपाल को इस्‍तीफा सौंपा. एक दिन पहले ही, 25 नवंबर को ACB ने कथित घोटाले में शुरू की गईं नौ जांचों को बंद कर दिया. 28 दिसंबर को उद्धव के नेतृत्‍व में शिवसेना-NCP-कांग्रेस की सरकार बनी.

अजित पवार की जांच फडणवीस के नेतृत्‍व वाली बीजेपी-शिवसेना की सरकार में पूरी हुई थी. हलफनामे में सारा ठीकरा मंत्रालय के प्रिंसिपल सेक्रेट्री और VIDC के एक्‍जीक्‍यूटिव डायरेक्‍टर पर फोड़ा गया है. इसके मुताबिक, किसी जांच कमेटी ने अनियमितताओं के लिए चेयरमैन को जिम्‍मेदार नहीं ठहराया था.

हलफनामे में नागपुर डिविजन के 17 सिंचाई प्रोजेक्‍ट्स और 302 टेंडर्स की जांच की प्रगति के बारे में भी जानकारी दी गई है. अदालत से याचिकाओं को खारिज करने की मांग की गई है.

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