श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में अब तक 80 लोगों की हुई मौत, 3840 में से 71 हुईं डायवर्ट

रेलवे बोर्ड (Railway Board) के चेयरमेन विनोद कुमार यादव ने कहा कि ट्रेनों में भूख से हुईं मौत की खबर गलत है, जो भी मौत हुई है उसकी जांच की जा रही है. लेकिन उन्होंने बताया कि ट्रेनों में पर्याप्त खाना और पानी दिया जा रहा है.
Eighty deaths on board, श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में अब तक 80 लोगों की हुई मौत, 3840 में से 71 हुईं डायवर्ट

कोरोनावायरस (Coronavirus) लॉकडाउन (Lockdown) में प्रवासी मजदूरों (Migrant Workers) को उनके घर पहुंचाने के लिए रेलवे ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनें (Shramik Special Trains) चलाई हैं. एक अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट ने रेलवे सुरक्षा बल की ओर से जारी आंकड़ों का अध्ययन करके बताया है कि 9 मई से 27 मई के बीच ट्रेन से यात्रा के दौरान 80 लोगों की मौत हुई.

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रिपोर्ट के मुताबिक, 26 मई को 13 मौतें, 23 मई को 10 मौतें, 24 मई को 9 मौतें, 25 मई को 9 मौतें और 27 मई को 8 मौतें श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में दर्ज हुई हैं.

इनमें से 11 मौतों को लेकर रेलवे की ओर से कारण बताए गए हैं, जोकि पुरानी बीमारी या फिर अचानक बीमार पड़ने का हवाला दिया गया है. इसमें एक उस शख्स की मौत हुई है, जिसको कोरोना पॉजिटिव बताया गया है.

‘भूख से हुई मौत की खबर गलत’

वहीं, रेलवे बोर्ड के चेयरमेन विनोद कुमार यादव ने साफ किया कि ट्रेनों में भूख से हुई मौत की खबर गलत है, जो भी मौत हुई है उसकी जांच की जा रही है. लेकिन उन्होंने बताया कि ट्रेनों में पर्याप्त खाना और पानी दिया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि ट्रेनों में अब तक 30 से ज्यादा डिलीवरी हुई है, इन महिलाओं को निकटस्थ रेलवे स्टेशन पर चिकित्सा सुविधा पहुचाई गई हैं. लोगों से अपील है कि जो महिलाएं गर्भवती हैं, या जो लोग गंभीर रुप से बीमार हैं वो इस समय यात्रा न करें.

भारतीय रेल ने साफ किया है कि कोई भी ट्रेन अपने मार्ग से नहीं भटकी है. रेलवे बोर्ड के चेयरमेन विनोद कुमार यादव ने इस बात का खंडन किया है कि ट्रेनों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में 9 दिनों तक समय लगा है.

नई दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने कहा, “शनिवार तक 3840 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को चलाया गया है, जिनमे सिर्फ 71 ट्रेनों का रूट ही बदला गया. इनमें से सिर्फ 4 ट्रेनों को ही 72 घंटे से ज्यादा का समय लगा. जो 4 ट्रेनें ज्यादा लेट हुईं, वो उत्तरपूर्व में भूस्खलन की वजह से हुई.”

’90 फीसदी ट्रेनें समय पर चलाई गईं’

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने साफ किया कि 19 मई से पहले किसी भी ट्रेन के रूट में बदलाव नही किया गया, जबकि 20 से 24 मई के बीच 1279 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाई गईं. उन्होंने साफ किया कि 3840 ट्रेनों में से 90 फीसदी यानी 3500 ट्रेन समय पर चलाई गई.

शुक्रवार तक ट्रेनों का व्यौरा देते हुए CRB ने कहा कि अब तक 3840 ट्रेनों के जरिये कुल 52 हजार 40 हजार यात्री अपने गंतव्य स्थान को पहुंच चुके हैं. उन्होंने यह भी बताया कि 15 मई से 24 मई के बीच 20 लाख यात्रियों को अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचाया गया. इसके हिसाब से प्रतिदिन 3 लाख यात्रियों को घर पहुंचाया गया. इन ट्रेनों में से 80 फीसदी बिहार और उत्तर प्रदेश के लिए चलाई गईं.

उन्होंने कहा कि अब राज्यों की तरफ से श्रमिक स्पेशल ट्रेनों की मांग कम आ रही है, आज 279 ट्रेनों की मांग आई थी, जबकि 28 मई को 137 और 27 मई को 172 ट्रेनों की मांग आई थी. उन्होंने यह भी बताया कि अधिकतर ट्रेनों को दोपहर 2 बजे से 12 बजे के बीच चलाया गया, जिसकी वजह से ट्रैक पर ट्रैफिक ज्यादा रही.

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(IANS इनपुट के साथ)

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