भारत की पहली रिवर टनल को केंद्र की मंजूरी, इस कदम से चीन के पेट में हो सकता है दर्द!

भारत में प्रस्तावित टनल रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण होने जा रही है, क्योंकि यह असम (Assam) और अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) के बीच साल पर की कनेक्टिविटी देगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये गोला-बारूद के परिवहन में भी मदद करेगी, क्योंकि यहां वाहन 80 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ सकेंगे.
Central Government approved river tunnel on Brahmaputra, भारत की पहली रिवर टनल को केंद्र की मंजूरी, इस कदम से चीन के पेट में हो सकता है दर्द!

चीन के साथ तनाव के बीच केंद्र ने ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे सुरंग बनाने के लिए सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दी है. हिन्दुस्तान पब्लिकेशन की रिपोर्ट के मुताबिक चार-लेन की सुरंग असम में गोहपुर और नमालीगढ़ शहरों को जोड़ेगी.

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पहली बार रिवर टनल बनाएगा भारत

यह पहली बार है कि भारत एक अंडर रिवर टनल का निर्माण करेगा. रिपोर्ट में बताया गया है कि यह चीन सीमा के करीब होगी. यह चीन के जिआंगसु प्रांत में ताइहू झील के नीचे बनाई जा रही रिवर टनल से लंबी होगी.

इसलिए अहम होगी टनल

भारत में प्रस्तावित टनल रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण होने जा रही है, क्योंकि यह असम और अरुणाचल प्रदेश के बीच साल पर की कनेक्टिविटी देगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये गोला-बारूद के परिवहन में भी मदद करेगी, क्योंकि यहां वाहन 80 किलोमीटर की रफ्तार से वाहन टनल को पार कर सकेंगे.

अमेरिकी कंपनी करेगी मदद

नेशनल हाईवे एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHAIDCL) ने अमेरिका की लुइस बर्जर कंपनी से काम करने के लिए बात की है. हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र ने इस परियोजनो को मार्च में मंजूरी दी थी.

ये होगी टनल की खासियत

रिपोर्ट में NHAIDCL के वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि 14.85 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण दिसंबर में शुरू होगा और इसे तीन चरणों में बनाया जाएगा. अधिकारी ने हिंदुस्तान को बताया कि चीन के जिआंगसु प्रांत में सुरंग 10.79 किलोमीटर लंबी होगी जबकि ये उससे ज्यादा है. उन्होंने ये भी कहा कि सुरंग में पानी को घुसने से रोकने के लिए डिजाइन में कई मज़बूत सुरक्षा उपाय भी किए गए हैं.

सेना ने टनल के निर्माण के लिए कहा था

हिंदुस्तान के मुताबिक इसमें वेंटिलेशन सिस्टम के साथ अग्निशमन तंत्र, फुटपाथ, ड्रेनेज सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट जैसी चीज़ें भी होंगी, यह क्रैश बैरियर से भी लैस होगा. सेना ने सरकार से कहा था कि वह ब्रह्मपुत्र के नीचे इंग्लिश चैनल के लिए टनल के निर्माण के लिए कहा था, क्योंकि दुश्मन सेना पुलों को निशाना बना सकता है.

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