चेन्नई में भयावह होता जा रहा है जलसंकट, स्टालिन के नेतृत्व में DMK करेगा प्रदर्शन

कई होटलों ने स्टील की थालियों के बजाय केले के पत्तों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है जिससे कि बर्तन धोने में खर्च होने वाले पानी को बचाया जा सके.

चेन्नई: तमिलनाडु की राजधानी में जल संकट के समाधान की मांग कर रही द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के सोमवार को राज्य सरकार के खिलाफ होने जा रहे प्रदर्शन की अगुवाई पार्टी अध्यक्ष एम.के. स्टालिन करेंगे.

द्रमुक ने शनिवार को एक बयान में इस बात की घोषणा की. बयान में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) सरकार के खिलाफ प्रदर्शन में बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की गई है.

द्रमुक ने सरकार पर लोगों की समस्या हल करने के लिए जरूरी कदम उठाने का दबाव बनाने के मकसद से शनिवार को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया.

इस बीच, द्रमुक के कोषाध्यक्ष व वरिष्ठ नेता दुरईमुरुगन ने पानी ट्रेन के मार्फत चेन्नई से जोलारपेट्टी भेजे जाने के खिलाफ प्रदर्शन किए जाने की चेतावनी दी.

नगरपालिका प्रशासन मंत्री एस.पी. वेलुमणि ने द्रमुक को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जोलारपेट्टी से पानी भेजे जाने से वेल्लोर जिले को की जा रही पानी की आपूर्ति में कमी नहीं आएगी.

मुख्यमंत्री के. पलनीस्वामी ने शुक्रवार को घोषणा की थी कि एक करोड़ लीटर प्रतिदिन पानी वेल्लोर जिले में स्थित जोलारपेट्टी से ट्रेन के जरिए चेन्नई भेजा जाएगा, जिस पर 65 करोड़ रुपये की लागत आएगी.

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चेन्नई में जल संकट

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में कड़ी गर्मी के बीच जल संकट की स्थिति पैदा हो गई है. बीते कुछ हफ्तों से चेन्नई में पानी इकठ्ठा करने को लेकर कई हिंसक झड़पें हुई हैं, पानी की कमी अब शहर के होटल, मॉल और अन्य व्यावसायिक उपक्रम भी प्रभावित हो रहे हैं.

चेन्नई के एक उपनगर में तमिलनाडु विधानसभा के स्पीकर पी.धनपाल के ड्राइवर रामकृष्णन को बीते गुरुवार उनकी पड़ोसी सुहासिनी पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. बताया गया कि रामकृष्णन ने सुहासिनी के पति को पानी भरने के लिए मोटर चलाने से रोका था. इससे पता चलता है कि चेन्नई में जलसंकट कितना गहराता जा रहा है.

मानसून का इंतज़ार कर रहा चेन्नई बीते दो हफ़्तों से पानी की भीषण कमी से जूझ रहा है.

हाल यह है कि अब शहर की कई आईटी कंपनियों ने अपने कर्मचारियों से घर से काम करने को कहा है, होटल-रेस्टोरेंट में काम के घंटे कम कर दिए गए हैं, स्थानीय पानी के टैंकर बुक करने के लिए जूझते नजर आ रहे हैं, वहीं राज्य सरकार अवैध रूप से पानी भरने के लिए घरों से पानी के कनेक्शन काट रहे हैं.

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टैंकरों से पहुंचाया जा रहा पानी

चेन्नई के गली-मुहल्लों में जैसे ही पानी-टैंकर दिखता है लोग पानी भरने के लिए बर्तन लेकर दौड़ते हुए कतार में पहुंच जाते है. लाइन में अपनी बारी का इंतजार करती महिलाएं और घरों में सूखे पड़े नल, यह नजारा चेन्नई में आम हो गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक एक आवासीय एसोसिएशन के सदस्य रवींद्रनाथ ने बताया था कि उन्हें जल आपूर्ति के लिए निजी टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है क्योंकि सरकारी टैंकरों को दो से तीन हफ्ते लग जाते हैं. उन्होंने दावा किया था कि निजी आपूर्तिकर्ताओं ने दरों में बढ़ोतरी की है और प्रति ट्रक पानी के लिए 3,000 से 5,000 रुपये की मांग कर रहे हैं.

2017 के उत्तर-पूर्व मानसून के दौरान कम बारिश होने और 2018 में भी मानसून की भारी कमी के कारण भूजल में कमी आई है और चेम्बरमबक्कम झील जैसे कई प्रमुख जल निकाय सूखने के करीब है. इसके चलते लोगों को अब जल-टैंकर के संचालकों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जिसके सहारे वे अपना दैनिक काम चला रहे हैं.

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केले के पत्तों पर होटलों में दिया जा रहा है खाना

जल संकट के चलते पिछले कई हफ़्तों से शहर के होटलों ने दोपहर का खाना देना बंद कर दिया है. रिपोर्ट के अनुसार बीते कुछ हफ्तों में होटलों का पानी पर होने वाला खर्च 25 फीसदी बढ़ गया है. पानी की कमी के कारण कई होटलों में टंकी की जगह मग और बाल्टी से पानी का इस्तेमाल किया जा रहा है.

कई होटलों ने स्टील की थालियों के बजाय केले के पत्तों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है जिससे कि बर्तन धोने में खर्च होने वाले पानी को बचाया जा सके.

नीति आयोग ने जल-संकट को जल्द समझने की जरूरत पर दिया ज़ोर

पिछले साल नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा था कि भारत में जल-संकट की भयावहता को नहीं समझा जा रहा है, जबकि 2030 तक देश के 10 बड़े नगरों में भारी जल संकट छाने वाला है. उन्होंने यमुना को मृत नदी बताया.

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उन्होंने कहा कि समग्र जल प्रबंधन सूचकांक पर नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि 60 करोड़ लोग पानी की कमी वाले क्षेत्र में रहते हैं और 2030 तक देश में पानी की मांग दोगुनी हो जाएगी.