अमित शाह और रविशंकर प्रसाद के बीच हैं ये खास किस्‍मत कनेक्‍शन

अमित शाह और रवि शंकर प्रसाद दोनों ही लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में खड़े हैं. यह ऐसा पहला मौका है जब ये दोनों ही नेता किसी भी लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी बने हैं.
Lok Sabha Election 2019, अमित शाह और रविशंकर प्रसाद के बीच हैं ये खास किस्‍मत कनेक्‍शन

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो बड़े चेहरे अमित शाह और रवि शंकर प्रसाद इस बार चुनावी मैदान में कूद रहे हैं. फिलहाल, एक तरफ जहां अमित शाह पार्टी अध्यक्ष की भूमिका निभा रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ, एनडीए सरकार में सूचना एवं प्रसारण और कानून मंत्रालय का जिम्मा रवि शंकर प्रसाद के पास है.

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इन दोनों ने ही पार्टी के लिहाज से अच्छा काम किया है. खैर, लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में खड़ा होने के अलावा भी कई ऐसी बातें हैं जो इन्हें करीब लाती हैं.

जनता से चुनकर संसद जाना
अमित शाह और रवि शंकर प्रसाद दोनों ही राज्यसभा सदस्य हैं. राज्यसभा में इन दोनों ने ही बड़े जोर-शोर से पार्टी की बात रखी है. लेकिन ये अभी तक सीधे जनता से चुनकर संसद नहीं पहुंच पाए हैं. इसे देखते हुए इनका चुनाव में उतरना साहसिक फैसला माना जा रहा है.

अमित शाह भाजपा के पितामह लालकृष्ण आडवाणी का गढ़ मानी जाने वाली गांधीनगर लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतर रहे हैं. उनका यहां से जीतना तय माना जा रहा है. हालांकि आडवाणी के कुछ समर्थक जरूर उनसे ख़फ़ा हो सकते हैं.

Lok Sabha Election 2019, अमित शाह और रविशंकर प्रसाद के बीच हैं ये खास किस्‍मत कनेक्‍शन
अमित शाह के भाषणों पर जनता खूब तालियां बजाती है.

वहीं, रवि शंकर प्रसाद बिहार की शायद सबसे महत्त्वपूर्ण ‘पटना साहेब लोकसभा सीट’ ताल ठोकेंगे. यहां पर उनका भाजपा के बागी नेता शत्रुघ्न सिन्हा से हो सकता है. कहा जा रहा है कि कांग्रेस उन्हें इस सीट से रवि शंकर के मुकाबले खड़ा कर सकती है. और अगर ऐसा हुआ तो निश्चित रूप से यहां जोरदार टक्कर देखने को मिलेगी.

बेहतरीन वक्ता
अमित शाह और रवि शंकर प्रसाद दोनों ही बेहतरीन वक्ता माने जाते हैं. अमित शाह की पकड़ पार्टी कार्यकर्ताओं पर काफी मजबूत है और जब वो अपनी बात रखते हैं तो उन्हें कार्यकर्ता काफी ध्यान से सुनते हैं. उनके भाषणों पर तालियां भी खूब बजती हैं.

वहीं, रवि शंकर प्रसाद एक चतुर वक्ता माने जाते हैं. उन्होंने कई सालों तक वकालत की है. बात कैसे रखनी है, ये वो बखूबी जानते हैं. रवि शंकर की गिनती उन नेताओं में होती है जो काफी तोल-मोलकर बोलते हैं. पार्टी पर जब कभी भी विपक्ष हमलावर होता है, रवि शंकर प्रसाद बीच-बचाव के लिए खड़े हो जाते हैं.

राजनीतिक महत्वकांक्षा
राजनीतिक पंडित बताते हैं कि अमित शाह और रवि शंकर प्रसाद दोनों में ही अभी राजनीतिक महत्वकांक्षा शेष है. माना जा रहा है कि अगर 2019 लोकसभा चुनाव भाजपा पूर्ण बहुमत से जीतती है तो इनकी राजनीतिक महत्वकांक्षा और भी उभरकर सामने आएगी.

Lok Sabha Election 2019, अमित शाह और रविशंकर प्रसाद के बीच हैं ये खास किस्‍मत कनेक्‍शन
रवि शंकर प्रसाद की गिनती उन नेताओं में होती है जो काफी तोल-मोलकर बोलते हैं.

2024 लोकसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी 73 साल के हो जाएंगे. और वो शायद ही प्रधानमंत्री के रूप में एक और कार्यकाल की चाह रखें. वहीं, भाजपा में 75 वर्ष के बाद चुनाव नहीं लड़ने का मानक तय किया गया है. इसे देखते हुए लोग शाह को मोदी का उत्तराधिकारी भी कहते हैं.

वहीं, रवि शंकर प्रसाद का भी राजनीतिक करियर शानदार रहा है. 1980 में बतौर अधिवक्ता अपने करियर की शुरुआत करने वाले रवि शंकर सत्ता के कई शीर्ष पदों पर पहुंचे हैं. 65 वर्षीय रवि शंकर प्रसाद ने अपनी प्रतिभा के बूते ये सब हासिल किया है. 2019 में ‘पटना साहेब लोकसभा सीट’ जीतने पर वो निश्चित रूप से और बड़ी भूमिका निभाते नजर आएंगे.

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