विपक्ष को कश्मीरी पंडितों की चिंता नहीं, घाटी की अवाम का दिल तो हम ही जीतेंगे: अमित शाह

"कश्मीरियत, इंसानियत, जमूहिरियत का हमारा लक्ष्य है. लोकतंत्र तीन परिवारों तक सीमित नहीं रह सकता. नरेन्द्र मोदी सरकार की आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति है"
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नई दिल्ली: गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर आरक्षण संसोधन बिल पर चर्चा करते हुए कहा, “हम विकास के मामले में कोई ऊंच नीच नहीं करेंगे.

जानिए राज्यसभा में अमित शाह ने क्या-क्या  कहा…

  • जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है. आतंकवाद को हम जड़ से उखाड़ फेंकेंगे. हम विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम किसी के साथ विकास के मामले में कोई ऊंच नीच नहीं करेंगे.
  • कश्मीरियत, इंसानियत, जम्हूरियत का हमारा लक्ष्य है. लोकतंत्र तीन परिवारों तक सीमित नहीं रह सकता. मैं फिर दोहराना चाहता हूं कि नरेन्द्र मोदी सरकार की आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति है.
  • कश्मीर की संस्कृति का संरक्षण करेंगे, विपक्ष को कश्मीरी पंडितों की चिंता क्यों नहीं? हमने गांव तक लोकतंत्र को पहुंचाया है.
  • कश्मीरी पंडितों को घर से निकाल दिया गया, उन्हें खदेड़ दिया गया. चुनाव के दौरान कश्मीर में खून का एक कतरा भी नहीं बहा. जम्हूरियत सिर्फ परिवार वालों के लिए ही सीमित नहीं रहनी चाहिए. जम्हूरियत गांव तक जानी चाहिए. चालीस हजार पंच, सरपंच तक जानी चाहिए और ये ले जाने का काम हमने किया.
  • हमारी सरकार अटल जी के रास्ते पर है. जो भारत को तोड़ने वाले हैं हम उन्हें उनकी ही भाषा में जवाब देंगे. जनता हम पर विश्वास करे हम दुश्मनों को देख लेंगे. कश्मीर में दहशत फैलाने की कोशिश को पूरा नहीं होने दिया जायेगा.
  • हमारे पास सरकारों का अकाल नहीं है. सुरक्षा कारणों से जम्मू कश्मीर में चुनाव अभी संभव नहीं है.
  • पीडीपी के साथ हम गठबंधन करें ये हमारा फैसला नहीं था. ये वहां की अवाम का फैसला था. खंडित जनादेश मिला था वहां. जब हमें लगा वहां सर के ऊपर पानी जा रहा है तो हमने तुरंत वहां समर्थन वापस ले लिया.
  • सूफी परंपरा कश्मीरियत का हिस्सा नहीं थी क्या? पूरे देश में सूफियत का गढ़ था कश्मीर, कहां चली गई वो संस्कृति? उनको घरों से निकाल दिया गया. उनके धार्मिक स्थानों को तोड़ दिया गया. सूफी संतों को चुन-चुन कर मारा गया.
  • कश्मीर की आवाम की संस्कृति का संरक्षण हम ही करेंगे. एक समय आएगा जब माता क्षीर भवानी मंदिर में कश्मीर पंडित भी पूरा करते दिखाई देंगे और सूफी संत भी वहां होंगे. मैं निराशावादी नहीं हूं. हम इंसानियत की बात करते हैं.
  • हम नेहरू की छवि नहीं खराब करना चाहते हैं, पर इतिहास की भूलें याद रखनी होगी. नेहरू की नीतियों की वजह से ही आतंकवाद बढ़ा. कश्मीर पर नेहरू ने ऐतिहासिक गलती की. पूरा देश इस सवाल पर जवाब चाहता है.
  • हम इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश नहीं करते. नेहरू कश्मीर मसले को यूएन क्यों ले गए? तुष्टिकरण की नीति ने कश्मीर को बर्बाद कर दिया. घाटी की अवाम का दिल हम जीतेंगे.

बता दें कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि छह महीने बढ़ाने संबंधित बिल पेश किया.

इस बिल को लेकर सदन के अंदर विपक्ष बंटा हुआ दिखाई दे रहा है. जहां एक तरफ पूरा विपक्ष राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़ाए जाने का विरोध कर रहा है वहीं समाजवादी पार्टी इसका समर्थन कर रही है.  बता दें कि यह बिल लोकसभा में पहले ही पारित हो चुकी है.

इसके अलावा उन्‍होंने जम्मू-कश्मीर आरक्षण (संशोधन) बिल 2019 भी अपर हाउस में रखा. यह बिल भी लोकसभा से पिछले हफ्ते ही पास हुआ था.

जम्मू एवं कश्मीर में 3 जुलाई से छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन का विस्तार करने की लोकसभा ने शुक्रवार को अनुमति दे दी. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि केंद्र तैयार है, चुनाव आयोग जब चाहे राज्य में विधानसभा चुनाव कराने का फैसला ले सकता है.

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