अमित शाह ने नए सांसदों को समझाया धर्म का सही मतलब

अमित शाह ने कहा कि हमें ये सदैव ध्यान रखना चाहिए कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में जवाब देना कोई बुरी बात नहीं है. लेकिन...

नई दिल्ली: गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को सत्रहवीं लोकसभा के नए निर्वाचित सदस्यों को संबोधित किया. इस दौरान शाह ने सांसदों को प्रभावी सांसद बनने के कुछ तरीके भी बताए. उन्होंने कहा कि हमें इस बात का एहसास होना चाहिए कि हम जो बोल रहे हैं, वह पूरी दुनिया देख रही है. हम जो बोलते हैं, उसके आधार पर संसद की छवि बनती है और बिगड़ती है.

गृह मंत्री ने कहा, “हमें ये सदैव ध्यान रखना चाहिए कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में जवाब देना कोई बुरी बात नहीं है. लेकिन इसके साथ में कानून बनाने की प्रक्रिया में हमारा योगदान महत्वपूर्ण और सटीक होना चाहिए.”

‘देश ने लोकतंत्र को स्वीकार किया’
उन्होंने कहा कि देश ने लोकतंत्र को पहले ही स्वीकार कर लिया था. उसके बाद बहस हुई कि लोकतंत्र के किस स्वरूप को हम स्वीकार करें. उस पर हमारी संविधान सभा ने तय किया कि भारत के लिए बहुदलीय संसदीय व्यवस्था हमारे लिए उपयुक्त होगी और उसे हमने स्वीकार किया.

अमित शाह ने सासंदों से कहा कि धर्म शब्द को कोई ओछी तरीके और कंजर्वेटिव तरीके न लें. ‘धर्मचक्र प्रवर्तनाय’ का मतलब है कि भारत के शासक धर्म के रास्ते आगे बढ़े. धर्म का मतलब रीलीजन नहीं होता है. धर्म का मतलब हमारा फर्ज और दायित्व होता है.

‘सूत्र अध्यक्ष की कुर्सी के पीछे लिखा है’
उन्होंने कहा कि एक नागरिक का देश के प्रति धर्म क्या होता है, एक सासंद का संसद के प्रति धर्म क्या होता है, इसका बोध कराने के लिए धर्मचक्र प्रवर्तनाय का यह सूत्र अध्यक्ष की कुर्सी के पीछे लिखा है.

अमित शाह ने कहा कि सदन का प्राथमिक दायित्व कानून बनाना है. यहां बजट पेश होता है, बजट पर अलग-अलग विचार व्यक्त होते हैं. बजट के माध्यम से देश का खाका खींचने का काम ये संसद ही करती है.

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