6 माह और बढ़ाया जाए राष्‍ट्रपति शासन, साल के आखिर तक जम्‍मू-कश्‍मीर में चुनाव संभव: अमित शाह

जम्‍मू-कश्‍मीर में 6 महीने के लिए राष्‍ट्रपति शासन बढ़ाने का प्रस्‍ताव पेश करते हुए शाह ने कहा कि आतंकवाद पर हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति है.

नई दिल्ली: लोकसभा में शुक्रवार को जम्मू एवं कश्मीर आरक्षण अधिनियम, 2004 में संशोधन के लिए विधयेक पर चर्चा हो रही है. यह कानून, जम्मू एवं कश्मीर आरक्षण (संशोधन) अध्यादेश 2019 की जगह लेगा.

लोकसभा में गृहमंत्री अमित शाह ने जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति/राज्यपाल शासन को आगे जारी रखने को लेकर धारा 356 के प्रस्ताव को लोकसभा में रखा. इस प्रस्‍ताव पर बोलते हुए शाह ने कहा कि जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि बढ़नी चाहिए.

शाह ने अपनी सरकार के कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि “पहली बार जम्मू कश्मीर में पंचायत चुनाव करवाए. इस बार चुनाव में रक्त नहीं बहा. इस बार किसी की जान नहीं गयी. इस बार मत प्रतिशत भी बढ़ा है पर हिंसा नहीं हुई.”

शाह ने लोकसभा में कहा कि आतंकवाद पर हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति है. शाह ने 6 महीने के लिए राष्‍ट्रपति शासन बढ़ाने का प्रस्‍ताव पेश करते हुए कहा कि ‘जम्मू-कश्मीर में लोकतंत्र बहाल रहे, हम ये चाहते है और इसमें हम लीपापोती नहीं चाहते.’

उन्‍होंने कहा कि सीमा पर रहने वालों के लिए 15 हज़ार बंकर बनेंगे. अब तक 44 सौ बनकर बन चुके हैं. शाह ने यह भी कहा कि साल के अंत में जम्मू-कश्मीर में चुनाव संभव है.

जम्मू एवं कश्मीर आरक्षण अधिनियम, 2004 में संशोधन के जरिए अंतरराष्‍ट्रीय सीमा के आसपास रहने वाले लोगों को नौकरियों, पदोन्नति और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ उसी तरह मिलेगा जिस तरह नियंत्रण रेखा के पास रहने वालों को मिलता है.

इस विधेयक से अंतरराष्‍ट्रीय सीमा (IB) के पास रहने वाले लोगों को नियंत्रण रेखा (LoC) के पास रहने वालों की तरह ही लाभ मिलेगा. अभी तक आईबी के पास रहने वालों को जम्मू एवं कश्मीर आरक्षण अधिनियम 2004 व नियम 2005 से बाहर रखा गया था.

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