CAB 2019: राज्यसभा में पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थियों की कहानी गृह मंत्री अमित शाह की जुबानी

गृह मंत्री ने अमित शाह ने पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों की कहानी सुनाई. शाह ने बताया कि जब यह बिल लोकसभा में पास हुआ, तो दिल्ली के बाहरी इलाके भाटी माइंस (Bhati Mines) में खुशी का माहौल था.

राज्यसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री ने अमित शाह ने पाकिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों की कहानी सुनाई. शाह ने बताया कि जब यह बिल लोकसभा में पास हुआ, तो दिल्ली के बाहरी इलाके भाटी माइंस (Bhati Mines) में खुशी का माहौल था.

पाकिस्तान में फोन कर बोला जय श्री राम
गृह मंत्री अमित शाह ने बोल की बलराम जो की एक हिंदु शरणार्थी हैं वो पाकिस्तान के सिंध प्रांत से आए हैं और अभी भाटी माइंस में रहते हैं. जिस दिन यह बिल लोकसभा में पास हुआ था. उस दिन बलराम ने सिंध में अपने एक दोस्त को फोन किया कर बोला, “जय श्रीराम…हमारा सालों पुराना सपना साकार होने वाला है.”

जबरदस्ती कबूल कराया जाता था इस्लाम
शाह ने बताया कि दो बहनें साहिबा और राबिजा अपने पति और बच्चों के साथ 2013 में बड़ी मुश्किल से कराची से भाग कर भारत आई थीं. इन महिलाओं ने बताया कि वहां उनके साथ यौन हिंसा की जाती थी. इस्लाम कबूल करने को कहा जाता था और मना करने पर मार पीट की जाती थी. इस के पास होने के बाद इन बहनों में एक आशा जगी है.

गिरफ्तारी के डर छुपाई पहचान
भाटी मांइस की एक गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाली किरण ने बताया कि हम लोग गिरफ्तारी के डर से हम किसी को नहीं बता पाते थे कि हम शरणार्थी हैं. किरण ने रोते हुए कहा कि यहां के लोग हमें पाकिस्तानी समझते हैं लेकिन अब समय आया है कि हम सम्मान के साथ जी सकेंगे.

शौकत राम और जमुना की आपबीती
गृह मंत्री ने बताया कि शौकत राम 13 साल के थे जब पाकिस्तान से भारत आए थे. अब वो 32 साल के हो चुके हैं. उनकी तमन्ना है कि अब वो भारत में सम्मान से जी सकें. वहीं 44 साल की जमुना ने कहा कि इस नए आरंभ के लिए वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देती हैं. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में नरक की जिंदगी जीनी पड़ती है, लेकिन भारत में अब नई शुरुआत होने वाली है.

भाटी माइंस इलाका
दिल्ली-हरियाणा बार्डर पर स्थित भाटी माइंस में करीब 3000 से 4000 पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी रहते हैं. इस इलाके में आज भी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं. इस क्षेत्र को 1976 में भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी ने बसाया था. वहीं से इसका नाम संजय कॉलोनी पड़ा. तब लगभग 200 घर बने थे. पहले ये केवल एक गांव था. यहां के लोग गांव सभा के मतदाता थे. फिर 1991 में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर एक नोटिस जारी कर इसे रिज़र्व्ड फॉरेस्ट एक्ट के तहत वन विभाग के अधीन कर दिया गया.

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