महाराष्‍ट्र में 50-50 फॉर्मूले का सस्‍पेंस! बीजेपी-शिवसेना की ‘सीक्रेट डील’ का ये है पूरा खेल

महाराष्‍ट्र में परेशानी यहां आकर अटक गई है कि शिवसेना का 50-50 अलग है, बीजेपी का 50-50 अलग है, जनता का 50-50 अलग और इतने सारे 50-50 के चक्‍कर में बेचारा मीडिया भी 50-50 के फेर में फंस गया है.
बीजेपी-शिवसेना की सीक्रेट डील, महाराष्‍ट्र में 50-50 फॉर्मूले का सस्‍पेंस! बीजेपी-शिवसेना की ‘सीक्रेट डील’ का ये है पूरा खेल

नई दिल्‍ली: महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव 2019 के रिजल्‍ट करीब-करीब सामने आ चुके हैं. परिणामों से स्‍पष्‍ट है कि महाराष्‍ट्र में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को जनता ने सरकार बनाने के लिए जनादेश दिया है. रिजल्‍ट आने के बाद बीजेपी की ओर से देवेंद्र फड़नवीस और शिवसेना की ओर से उद्धव ठाकरे ने जनता का धन्‍यवाद दिया.

गुरुवार को नतीजे आने के बाद देवेंद्र फड़नवीस ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्‍व और शिवसेना दोनों को स्‍पष्‍ट संकेत दिया कि उनकी लीडरशिप में पार्टी ने जो प्रदर्शन किया है, वह पिछली बार से बेहतर है. फड़नवीस ने कहा कि 2014 लोकसभा चुनाव बीजेपी महाराष्‍ट्र में 260 सीटों पर लड़ी और 122 पर जीतने में सफल रही थी, लेकिन 2019 में पार्टी 164 सीटों पर लड़कर 100 से ज्‍यादा सीटों पर जीत रही है. मतलब 2019 में बीजेपी 96 सीटों पर प्रत्‍याशी नहीं उतारे, इसके बाद भी पार्टी को करीब 20 सीटों का ही नुकसान हुआ.

आधी इधर और आधी उधर की बात कर गए उद्धव ठाकरे 

बहरहाल, फड़नवीस का बयान अपनी जगह ठीक है, लेकिन रिजल्‍ट आने के बाद सुर्खियां बटोरीं उद्धव ठाकरे ने. पत्रकारों से बातचीत में उद्धव ठाकरे ने सबकुछ 50-50 अंदाज में कहा. उनकी आधी इधर और आधी उधर की बात का सही-सही मतलब क्‍या निकला? ये समझने में बड़े पत्रकार भी 50-50 को समझने में माथ पकड़ रहे हैं.

परेशानी यहां आकर अटक गई है कि शिवसेना का 50-50 अलग है, बीजेपी का 50-50 अलग है, जनता का 50-50 अलग और इतने सारे 50-50 के चक्‍कर में बेचारा मीडिया भी 50-50 के फेर में फंस गया है. एक लाइन में कहा जाए तो चुनाव नतीजे आने के बाद बीजेपी पर दबाव बनाने के मकसद से उद्धव ठाकरे ने हर बात इस तरह से कही कि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे.

उद्धव ठाकरे की इन बातों से स्‍पष्‍ट है कि मोल-भाव तगड़ा होगा  

उद्धव ठाकरे ने बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने को लेकर सिर्फ दो बातें बेहद स्‍पष्‍ट तरीके से कहीं. पहली-उद्धव ने कहा- पिछले चुनाव में भी बीजेपी के साथ बातचीत में 15 दिन लगे थे. मतलब उद्धव ठाकरे ने स्‍पष्‍ट कर दिया कि इस बार वह सत्‍ता में कम भागीदारी पर नहीं मानेंगे. दूसरी बात जो उन्‍होंने अहम कही, वो यह थी कि शिवसेना और बीजेपी दोनों साथ मिलकर सरकार बनाएंगे. मतलब बीजेपी को धमकी देने के साथ ही उद्धव ठाकरे ने यह संकेत भी दे दिया कि आप घबराइए नहीं, हम मोल-भाव करेंगे, अब यह आपके ऊपर है कि आप कहां तक बारगेनिंग कर सकते हैं.

तीसरा अहम सवाल जो उद्धव ठाकरे के सामने आया वह था सीएम पद के लिए आदित्‍य ठाकरे की दावेदारी का. गुरुवार को प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में दो बार यह प्रश्‍न आया. पहली बार- उद्धव ने कहा- अभी रुको, एक-एक सीढ़ी चढ़ने दो. दूसरी बार जब यह सवाल आया तो उद्धव ठाकरे बोले- आपके मुंह में घी शक्‍कर.

इन सब बातों से उद्धव ठाकरे ने सबसे ज्‍यादा आत्‍मविश्‍वास के साथ जो कही है- वह 50-50 फॉर्मूला. उद्धव ठाकरे ने कहा कि 50-50 के फॉर्म्युले पर पहले बीजेपी के साथ सहमति हुई थी, आगे जब स्थिति साफ होगी तो बीजेपी-शिवसेना के वरिष्ठ नेता साथ में चर्चा करके फैसला लें.

बीजेपी और शिवसेना का अपना-अपना 50-50 फॉर्मूला 

अब यहां पेंच फंसा है, यह बात सही है कि लोकसभा चुनाव 2019 के लिए जब अमित शाह के साथ उद्धव की बातचीत हुई थी, तब दोनों दलों के बीच विधानसभा चुनाव के लिए 50-50 फॉर्मूला हुआ था. लेकिन ये है क्‍या इसे लेकर स्‍पष्‍टता नहीं है. उस समय जिस प्रकार से बीजेपी और शिवसेना के बयान आए उससे 50-50 के दो मतलब निकले. पहला अर्थ- बीजेपी और शिवसेना के बीच विधानसभा में आधी-आधी सीटों पर चुनाव लड़ने का बंटवारा और उसके बाद जिसकी जितनी ज्‍यादा सीटें, उसकी उतनी भागीदारी.

दूसरा मतलब इसका यह निकला कि ढाई साल बीजेपी का सीएम रहे और ढाई साल शिवसेना का मुख्‍यमंत्री पद संभाले. बीजेपी ने कभी ढाई-ढाई साल वाले 50-50 फॉर्मूले की बात नहीं. शिवसेना इस पर विधानसभा चुनावों से पहले से ही बात कर रही है.

अब बची जनता तो महाराष्‍ट्र के लोगों ने जो जनादेश दिया है कि उसका मतलब स्‍पष्‍ट है कि बीजेपी-शिवसेना मिलकर सरकार चलाएं. अब बचा मीडिया तो उसे यह पता लगाने में कुछ और दिन लगेंगे कि महाराष्‍ट्र में कौन सा 50-50 फॉर्मूला लागू होता है? बीजेपी वाला 50-50 या शिवसेना वाला 50-50!

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