दिल्ली: आर्थिक तंगी में कोरोना वॉरियर्स, 4 महीने से नहीं मिला वेतन, 2 अस्पतालों में हड़ताल

हिंदू राव अस्पताल (Hindu Rao Hospital) के डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और बाकी सभी कर्मचारी 4 महीने से सैलरी न मिलने के चलते पिछले कई हफ्तों से हड़ताल पर हैं. अब तक सभी डॉक्टर अस्पताल परिसर में हड़ताल कर रहे थे, लेकिन अब वे सड़क पर उतरते दिखाई देने लगे हैं.

  • manav yadav
  • Publish Date - 4:23 pm, Thu, 15 October 20
सैलरी नहीं मिलने से गुस्साए हिंदू राव हॉस्पिटल के डॉक्टर-कर्मचारी, कल जंतर-मंतर करेंगे प्रदर्शन

कोरोना काल में दिल्ली MCD के कर्मचारी चाहे वे डॉक्टर्स हों या सफाईकर्मी, सभी आर्थिक मार झेलने को मजबूर हैं. एक तरफ पिछले 4 महीने से सैलरी ना मिलने के चलते एमसीडी के अस्पतालों के डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ हड़ताल कर रहे हैं तो दूसरी तरफ दिल्ली के तीन नगर निगमों के कर्मचारियों की कई महीने का वेतन बकाया. इस सब पर MCD और दिल्ली सरकार एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप मढ़ रहे हैं लेकिन कोरोना वॉरियर्स की आर्थिक तंगी की फिक्र किसी को नहीं है.

जब देश में कोरोना शुरू हुआ तो कोरोना वॉरियर्स के लिए थालियां बजवाई गईं, कोरोना वॉरियर्स के लिए दिए जलवाए गए लेकिन कोरोनाकाल के 6 महीने में ही कोरोना वॉरियर्स को आर्थिक तौर पर अंधकार में धकेल दिया गया.

हिंदू राव अस्पताल के स्टाफ को 4 महीने से नहीं मिला वेतन

दिल्ली के हिंदू राव अस्पताल के डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और बाकी सभी कर्मचारियों 4 महीने से सैलरी न मिलने के चलते पिछले कई हफ्तों से हड़ताल पर हैं. जो कोरोना वारियर्स कोरोना के मरीज़ों का ध्यान रख रहे थे उनका ध्यान महामारी के समय में नार्थ MCD नहीं रख पा रही.

पिछले हफ्ते तक हिंदू राव अस्पताल कोविड हॉस्पिटल था, जहां पर कोरोना के मरीजों का इलाज किया जाता था लेकिन हड़ताल के चलते मरीजों की जान पर ना बन आए इसलिए दिल्ली सरकार ने हिंदू राव अस्पताल के सभी कोरोना मरीजों को दिल्ली सरकार के अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया. इसके बाद इस अस्पताल को नॉन कोविड अस्पताल घोषित कर दिया गया. लेकिन डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ के सामने सैलरी न मिलने की समस्या अभी भी जस की तस बनी हुई है.

हड़ताल पर गए अस्पताल कर्मचारी

अब वेतन ना मिलने के चलते हिंदू राव अस्पताल के साथ-साथ कस्तूरबा गांधी हॉस्पिटल के डॉक्टर्स और कर्मचारी भी बुधवार से हड़ताल पर चले गए हैं. वहीं राजन बाबू टीबी हॉस्पिटल के डॉक्टर भी हड़ताल के समर्थन में उतर आए हैं. इन अस्पतालों के डॉक्टर और कर्मचारियों की मांग है कि एमसीडी जल्द से जल्द उनकी बकाया सैलरी का भुगतान करें.

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि अब तक जिस एमसीडी में सब कुछ ठीक चल रहा था वह पाई पाई के लिए क्यों भटक रही है? आखिर बीते सालों में ऐसा क्या हुआ कि दिल्ली MCD डॉक्टर से लेकर सफाई कर्मचारियों तक को समय पर वेतन नहीं दे पा रही है. अगर आंकडों की बात करें तो दिल्ली के तीनों नगर निगम में कर्मचारियों की कई महीने का वेतन बकाया है.

  • पूर्वी दिल्ली नगर निगम – कर्मचारियों की सैलरी – तीन महीने लेट
  • उत्तरी दिल्ली – चार महीने की देरी
  • दक्षिण दिल्ली में – एक महीने की देरी से

जो नगर निगम के कर्मचारी एडहॉक पर हैं उन्हें चार महीने से वेतन नहीं नहीं मिला है. कोरोना काल में हो रही इस फंड की कमी के लिए नगर निगमों के मेयर दिल्ली सरकार को जिम्मेदार ठहराया रहे हैं.

क्या कहते हैं मेयर

एमसीडी नॉर्थ दिल्ली के मेयर जयप्रकाश का कहना है क़ि डॉक्टरों की जो सैलरी है वह 4 महीने की नहीं 3 महीने की बकाया है, जून तक की सैलरी हम उन्हें दे चुके हैं, जुलाई अगस्त और सितंबर की सैलरी बची हैॽ जब वे प्रदर्शन कर रहे थे तो मैंने उनसे बात की और मैंने उनसे कहा था कि आने वाले 10 दिन में 1 महीने की सैलरी आपको दे दी जाएगी.कल शाम को हिंदू राव, कस्तूरबा गांधी हॉस्पिटल और समेत 6 अस्पतालों की सैलरी कल जारी की गई है.

हमें निगम में सिर्फ डॉक्टर की चिंता नहीं करनी है बाकी 77000 कर्मचारियों की भी चिंता करनी है, माली से लेकर डॉक्टर तक की चिंता करनी है और सभी का वेतन समय पर जारी करना है. पिछले चार-पांच महीने से दिल्ली सरकार ने एक रुपया नहीं दिया हमारी फाइल पर सत्येंद्र जैन पालथी मारकर बैठे हैं. मैं सत्येंद्र जैन से कहना चाहूंगा कि हॉस्पिटल लेने से पहले वे दिल्ली के तीन कूड़ा घरों को पहले लेकर सुधारें फिर अस्पतालों के बारे में सोचेंगे.

दिल्ली नगर निगमों के कमाई के दो साधन

दिल्ली की तीनों नगर निगम की कमाई के दो साधन होते हैं.एक राजस्व, संपत्ति कर, विज्ञापन, कार पार्किंग, लाइसेंस, नक्शे पास करने की फीस, चालान और जुर्माने इकट्ठा होने वाला पैसा और दूसरा साधन वो जो पैसा ग्रांट के तौर पर दिल्ली सरकार से मिलता है.

दिल्ली सरकार से ग्रांट के तौर पर मिलने वाले फंड को लेकर पूर्वी दिल्ली नगर निगम के मेयर दिल्ली सरकार पर राजधर्म ना निभाने का आरोप लगा रहे हैं, मेयर के मुताबिक दिल्ली सरकार ने मौजूदा साल में वह पैसा भी दिया जिसके लिए दिल्ली सरकार बाध्य है.पूर्वी दिल्ली MCD द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक इस साल कुल 1677 करोड़ रुपए देने थे जिसमें से सिर्फ 94 करोड़ रुपए ही पूर्वी दिल्ली MCD को मिले.

लेकिन इस सबके इतर दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन एमसीडी पर ही लापरवाही के आरोप लगा रहे हैं उनका कहना है कि एमसीडी पैसा कहां खर्च कर रही है इसकी हमें जानकारी नहीं एमसीडी कर्मचारियों को वेतन देने की जिम्मेदारी एमसीडी की ही है .

2011 में हुआ दिल्ली नगर निगम का तीन हिस्सों में बंटवारा

शीला दीक्षित ने साल 2011 में दिल्ली नगर निगम का तीन हिस्सों में बंटवारा किया था. शीला दीक्षित का दावा था कि इससे निगम के काम काज में सहूलियत होगी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. एमसीडी 3 भाग में बांटा गया. जिससे कि इसकी ऑपरेशन कॉस्ट काफी बढ़ गई है.

जब दिल्ली में नगर निगम एक थे तो वहां का ऑपरेशनल कॉस्ट 5800 करोड़ थी. अब तीनों निगमों को चलाने का खर्च 17 से 18 हजार करोड़ हो गया है.यानी दिल्ली में एमसीडी कर्मचारियों को वेतन ना मिलने की समस्या नई जरूर है लेकिन इसकी नींव 8 साल में ही रख दी गई थी.

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