2 दिनों तक बिना कुछ खाए पीए रह सकते हैं भारतीय जाबांज, जानें कैसी होती है इंडियन आर्मी की ट्रेनिंग

कोई भारतीय सेना का कमांडो ऐसे ही नहीं बन जाता है. उसे ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है. दिन-रात की मेहनत करनी पड़ती है. तब जाकर तैयार होता है भारतीय सेना का जांबाज.

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उरी और पुलवामा में आतंकी हमला हुआ तो भारतीय सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक कर आतंकियों का खात्मा किया. कई लॉन्चिंग पैड को तबाह किया. कोर बैटल स्कूल रजौरी ट्रेनिंग करने आए जवान और ऑफिसर को यह सिखाया जाता है कि दुश्मन के घर में घुसकर कैसे प्रहार करना है और बिना अपना नुकसान किए वापस अपनी सरजमीं में वापस आना है. ये सब देखने के लिए स्वतंत्रता दिवस के मौके पर TV9 भारतवर्ष भारतीय सेना के कोर बैटल स्कूल रजौरी पहुंचा…

पाकिस्तान लगातार लाइन ऑफ कंट्रोल यानी कि LoC पर सीजफायर का उल्लंघन कर आतंकियों की घुसपैठ करवाने की फिराक में होता है लेकिन हमने कई बार सुना है कि किस तरीके से भारतीय सेना के जवान आतंकियों की इस चाल को ना काम करते आए हैं. भारतीय सेना के जवान घुसपैठ कर रहे आतंकियों को लाइन ऑफ कंट्रोल पर मौत के घाट उतारते हैं यह एक्शन भी इस ट्रेनिंग का हिस्सा है.

कॉटन एंड सर्च ऑपरेशन

कॉटन एंड सर्च ऑपरेशन यानी कि CASO कैसे करना होता है यह भी इस ड्रिल का हिस्सा है. एक मकान के अंदर अगर आतंकी छुपा है तो उसको सबसे पहले सरेंडर करने को कहा जाता है और अगर वह ना माने और सुरक्षाबलों पर फायर करें तब भारतीय सेना उसके खिलाफ कार्रवाई करती है.

2 दिनों तक बिना कुछ खाए पीए रह सकते हैं भारतीय जाबांज

हमारे जांबाज भारतीय सेना के सिपाही और भारतीय सेना के कमांडो जंगलों में छिपे आतंकियों का सामना बड़ी हिम्मत और सूझबूझ से करते हैं. इन भारतीय सेना के जांबाजों की क्षमता यह है कि वो 2 दिनों तक बिना कुछ खाए पीए जंगल में छिपे रह सकते हैं वह भी एक ही जगह बैठे हुए यानी बिना हिले. इनको एक विशेष सूट दिया जाता है जिसे जेली सूट कहा जाता है. इस सूट की खासियत यह है कि अगर मान लीजिए जंगल में यह छिपे हुए हैं तो दुश्मन को पता नहीं चलता और उसका खात्मा किया जाता है.

एक गोली एक निशाना

भारतीय सेना दुश्मन का कैसे खात्मा करती है और दुश्मन को बड़ी चतुराई से धूल चटाई जाती है. भारतीय जवान अपने टारगेट की तरफ ताबड़तोड़ फायर करते हैं. इन जवानों का मकसद यह रहता है कि एक गोली चलाई जाए और दुश्मन का खात्मा हो जाए.

  • आतंकी लगातार सुरक्षाबलों पर आईडी के जरिए हमले की फिराक में रहते हैं. पुलवामा आतंकी हमले में भी सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए, जिसकी वजह थी आईडी. भारतीय सेना की ट्रेनिंग में आईडी को कैसे डिफ्यूज करना होता है और ऑपरेशनल ग्राउंड में भारतीय सेना किन खास चीजों का ध्यान रखा जाता है, ये सब सिखाया जाता है.
  • कोर बैटल स्कूल रजौरी में भारतीय सेना के जवान और ऑफिसर को यह भी सिखाया जाता है कि अगर आतंकियों के साथ जंगल में मुठभेड़ होती है तो किस तरीके से इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम देना होता है और अपनी सुरक्षा कैसे करनी है.
  • कई बार ऐसा होता है की हेलीकॉप्टर जमीन पर लैंड नहीं कर पाता लेकिन हवा से जमीन तक और अपने टारगेट तक पहुंचने के लिए भारतीय सेना के जवानों को किस तरीके से ऊंचाई की परवाह ना करते हुए अपने टारगेट तक पहुंचना और उसका खात्मा करना है यह भी भारतीय सेना के जवानों और ऑफिसर को भारतीय सेना के कोर बैटल स्कूल रजौरी मै सिखाया जाता है.
  • कारगिल वॉर में खड़ी पहाड़ी को कैसे पार किया और पाकिस्तान की आर्मी को कैसी धूल चटाई यह बात हर किसी को पता है लेकिन अगर जरूरत पड़ने पर खड़ी पहाड़ी को पार करना हो तो वह कैसे की जाती है और अपने दुश्मन का सामना कैसे किया जाता है यह जवानों को यहां पर सिखाया जाता है.

कोई भारतीय सेना का कमांडो ऐसे ही नहीं बन जाता है. उसे ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है. दिन-रात की मेहनत करनी पड़ती है. तब जाकर तैयार होता है भारतीय सेना का जांबाज. जिसे देश पर गर्व होता है. जब यह जांबाज किसी ऑपरेशनल ड्यूटी पर जाते हैं तो रास्ते में कई नदी और नाले पड़ते हैं और कई चुनौतियों को पार करते हैं.

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