सालभर पहले शहीद पति के कानों में कहा था ‘आई लव यू’, अब खुद आर्मी का हिस्‍सा होंगी मेजर विभूति की पत्नी

उन्होंने अपने अनुभवों को शेयर करते हुए बताया कि मेरे लिए उस परीक्षा हॉल में प्रवेश करना बहुत ही भावुक पल था. लेकिन, उस समय मैं यही सोच रही थी कि मेरे पति सेना में भर्ती होने से पहले इसी स्थिति से गुजरे होंगे. यह मुझे विभू के करीब महसूस कराता रहा.

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में पिछले साल फरवरी में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल शहीद हो गए थे. अब शहीद मेजर की 28 साल की पत्नी निकिता कौल भारतीय सेना ज्वाइन करने के लिए तैयार है. बता दें कि साल 2017 के अप्रैल में ही मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल की शादी निकिता कौल से हुई थी.

निकिता कौल मूल रूप से कश्मीर से हैं. निकिता कौल ने शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) की परीक्षा के साथ-साथ साक्षात्कार को भी पास कर लिया है. अब वह मेरिट सूची घोषित होने का इंतजार कर रही है, जिसके बाद वह कैडेट के रूप में सेना में शामिल हो जाएगी.

निकिता कौल ने कहा कि सेना ज्वाइन करने से वह खुद को अपने पति मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल के करीब महसूस करेंगी. उन्होंने कहा कि इस तरह से वह मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल को ‘वास्तविक श्रद्धांजलि’ दे पाएंगी. फिलहाल निकिता कौल अपने माता-पिता के साथ दिल्ली में रहती हैं. वह एक एमएनसी कंपनी में काम करती हैं, लेकिन वह अब अपने पति की तरह एक सेना की एक अच्छी अधिकारी बनना चाहती हैं.

‘पति के पदचिन्‍हों पर ही चलना चाहती हूं’

उन्होंने कहा कि मैं नई चीजें सीखना चाहता हूं. मैं एक कॉर्पोरेट कल्चर से निकलकर सेना के अनुशासित कल्चर में जाऊंगी. मेरे लिए यह एक बड़ा बदलाव होगा. निकिता कौल ने कहा कि मुझे इस सदमे से निकलने और शॉर्ट सर्विस कमीशन की परीक्षा में बैठने में समय लगा. मेरे लिए पिछले साल सितंबर में एसएससी का फॉर्म भरना एक बड़ा फैसला था. लेकिन मैंने तय कर लिया था कि मैं अपने पति के पदचिन्‍हों पर ही चलना चाहती हूं.

उन्होंने अपने अनुभवों को शेयर करते हुए बताया कि मेरे लिए उस परीक्षा हॉल में प्रवेश करना बहुत ही भावुक पल था. उस समय मैं यही सोच रही थी कि मेरे पति सेना में भर्ती होने से पहले इसी स्थिति से गुजरे होंगे. यह मुझे विभू के करीब महसूस कराता रहा. आगे निकिता कौल कहती हैं कि पति की मौत के बाद सामान्य जीवन में वापस आना इतना आसान नहीं था. लेकिन मैंने खुद को काम में डुबो दिया. उम्मीद है कि इससे दर्द कम हो जाएगा.

‘एक बार फिर अपने पैरों पर खड़े होना था’

निकिता बताती है कि पति की मृत्यु के लगभग 15 दिनों बाद ही वह वापस काम पर चली गई, क्योंकि मैं खुद को व्यस्त रखना चाहती थी. वह कहती हैं कि टूटना स्वाभाविक है, लेकिन हमें स्थिति को स्वीकार करने की बहुत जरूरत है. मुझे अपनी दिनचर्या में सकारात्मकता तलाशनी थी और एक बार फिर अपने पैरों पर खड़े होना था. वे बताती हैं कि पति के मौत के बाद पहली बार घर से बाहर अपने भाई-बहनों के साथ निकलना, उनके लिए एक बड़ा कदम था.

उन्होंने कहा कि एक आंतरिक प्रतिरोध था. मैं बाहर जाने के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं थी. लेकिन, फिर जब कोई आपका करीबी व्यक्ति आपको छोड़कर जाता है, तो आपको यह सोचना होगा कि क्या वे आपको इस तरह से दुख की स्थिति में देखना चाहता हैं. मैंने हमेशा सोचा था कि विभू मुझे कैसे देखना चाहते थे और मुझे मेरा जवाब मिल गया.

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