आर्टिकल 370 में संशोधन पर राहुल, प्रियंका की चुप्‍पी के पीछे है ये वजह!

अगर कांग्रेस के भीतर से अनुच्‍छेद 370 में संशोधन के पक्ष में आवाजें उठ रही हैं तो नेतृत्‍व क्‍यों मौन है? राहुल और प्रियंका इतने बड़े परिवर्तन पर चुप्‍पी क्‍यों साधे हुए हैं?

नई दिल्‍ली: संविधान के आर्टिकल 370 संशोधन पर मुख्‍य विपक्षी दल कांग्रेस में अलग-अलग सुर उठ रहे हैं. हालांकि निवर्तमान अध्‍यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी ने अब तक इतने महत्‍वपूर्ण घटनाक्रम पर कुछ नहीं कहा है. संसद में पार्टी की ऑफिशियल लाइन संशोधन के तीखे विरोध की है, मगर एका देखने को नहीं मिल रहा. राहुल से जब NDTV ने सवाल किया तो उन्‍होंने वही टका सा जवाब दिया कि वे कांग्रेस अध्‍यक्ष नहीं हैं, इसलिए कुछ नहीं कहेंगे.

राज्‍यसभा में कांग्रेस के चीफ व्हिप रहे भुवनेश्‍वर कलिता ने पार्टी के रुख से खफा होकर त्‍यागपत्र दे दिया है. वो कह रहे हैं कि पार्टी विनाश के रास्‍ते पर जा रही है. वरिष्‍ठ कांग्रेस जनार्दन द्विवेदी ने अपने गुरु डॉ राममनोहर लोहिया का जिक्र करते हुए इस बदलाव का स्‍वागत किया. मुंबई कांग्रेस प्रमुख मिलिंद देवड़ा और पूर्व सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी खुलकर केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन किया है.

सवाल ये है कि अगर कांग्रेस के भीतर से आर्टिकल 370 संशोधन के पक्ष में आवाजें उठ रही हैं तो नेतृत्‍व क्‍यों मौन है? राहुल और प्रियंका इतने बड़े परिवर्तन पर चुप्‍पी क्‍यों साधे हुए हैं? इस प्रश्‍न का जवाब इतिहास में मिल सकता है.

इसलिए आर्टिकल 370 संशोधन पर चुप हैं राहुल, प्रियंका?

आर्टिकल 370 को संविधान का हिस्‍सा बनाने के लिए संसद की मंजूरी नहीं ली गई थी, जो कि संशोधनों के लिए जरूरी है. भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राष्‍ट्रपति की उद्घोषणा के जरिए इस लागू कराया था.

संविधान के भाग 21 में जब अनुच्‍छेद 370 जोड़ा गया तब डॉ. बीआर अम्‍बेडकर ने उसका टाइटल “Temporary, Transient and Special Powers” दिया था. बिल का ड्राफ्ट तैयार करने वाले गोपालास्‍वामी आयंगर ने भी कहा था कि राज्‍य में ‘विशेष परिस्थित‍ियों’ की वजह से आर्टिकल 370 का जन्‍म अस्‍थायी प्रावधान के रूप में हुआ. कांग्रेस ने साल 1952 और 1962 में अनुच्छेद 370 में बदलाव किए थे.

जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल जगमोहन ने अपनी किताब ‘दहकते अंगारे’ में लिखा है कि नेहरू खुद कहते थे कि धारा 370 एक दिन खत्‍म हो जाएगी. किताब में नेहरू द्वारा कश्‍मीरी नेता पं. प्रेमनाथ बजाज की चिट्ठी भेज दिए गए जवाब का जिक्र है. इस पत्र में नेहरू ने लिखा था कि ‘वास्तविकता यह है कि संविधान में इस धारा के रहते हुए भी, जो कि जम्मू-कश्मीर को एक विशेष दर्जा देती है, बहुत कुछ किया जा चुका है और जो कुछ थोड़ी बहुत बाधा है, वह भी धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी.’

जगमोहन इसे आर्टिकल 370 के खात्‍मे की नेहरू की भविष्‍यवाणी बताते हैं. ऐसे में एक संभावना बनती है कि कहीं राहुल और प्रियंका कहीं इस वजह से तो चुप नहीं कि अगर वह आर्टिकल 370 में संशोधन का विरोध करेंगे तो नेहरू की बात गलत न हो जाए. कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम में फंस गई है.

यह भी हो सकता है कि कांग्रेस नेतृत्‍व वेट एंड वॉच की रणनीति पर अमल कर रही हो. कुछ दिन रुककर इस बड़े कदम पर लोगों की प्रतिक्रिया देखी जाए और फिर राहुल या प्रियंका कोई स्‍टैंड लें. संशोधन बिल के समर्थन में पार्टी के भीतर से उठ रही आवाजों पर भी कांग्रेस नेतृत्‍व की नजर होगी.

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