हमने जिन्‍ना की टू नेशन थ्‍योरी को रिजेक्‍ट किया, आप याद दिला रहे, नागरिकता बिल पर बोले ओवैसी

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि नागरिकता संशोधन बिल संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है. उत्तर-पूर्वी राज्यों को इससे बाहर किया गया है.
asaduddin owaisi on citizenship Amendment Bill, हमने जिन्‍ना की टू नेशन थ्‍योरी को रिजेक्‍ट किया, आप याद दिला रहे, नागरिकता बिल पर बोले ओवैसी

संसद के शीतकालीन सत्र में कैबिनेट ने नागरिकता संशोधन विधेयक (Citizenship Amendment Bill) को मंजूरी दे दी है. नागरिकता बिल में केंद्र सरकार के प्रस्तावित संशोधन से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं के साथ ही सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए बगैर वैध दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा.

दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियां इसके विरोध में उतर गई हैं. AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin owaisi) ने नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर बीजेपी पर एक बार फिर निशाना साधा है. असदुद्दीन ने कहा कि भारतीय संविधान में लिखा गया है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है. अगर वे (केंद्र सरकार) देश को धार्मिक देश बनाना चाहते हैं तो यह उन पर निर्भर है.

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ये बिल लाना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के लिए एक बेईमानी होगी क्योंकि आप दो राष्ट्र सिद्धांत को पुनर्जीवित करेंगे. एक भारतीय मुसलमान के रूप में मैंने जिन्ना के सिद्धांत को खारिज कर दिया है, अब आप एक कानून बना रहे हैं, जिसमें दुर्भाग्य से आप दो राष्ट्र सिद्धांत की याद दिला रहे होंगे.

असदुद्दीन ओवैसी Asaduddin owaisi) ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक अगर भारत में लागू हो जाता है तो देश की स्थिति धर्मशासित देश की हो जाएगी. नागरिकता बिल संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है. उत्तर-पूर्वी राज्यों को इससे बाहर किया गया है.

असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin owaisi) ने कहा कि नागरिकता (संशोधन) विधेयक लाने का मकसद क्या है कि हिन्दुस्तान को एक धर्म आधारित देश बना दिया जाए. हिन्दुस्तान और इस्राइल में अब कोई फर्क नहीं रहेगा. संविधान में मजहब के आधार पर सिटिजनशिप की कोई बात ही नहीं है.

उन्होंने सवाल पूछा कि कोई नास्तिक होगा तो क्या करेंगे आप? इस तरह का कानून बनाने के बाद पूरी दुनिया में हमारा मजाक बनेगा. बीजेपी सरकार हिन्दुस्तान के मुसलमानों को संदेश देना चाहती है कि आप अव्वल दर्जे के शहरी नहीं हैं बल्कि दूसरे दर्जे के शहरी हैं.

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