तथागत रॉय की राह पर चले राजस्थान के राज्यपाल, मोदी विजय की दुआ मांग फंस गए कल्याण

राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह भी अब मेघालय के राज्यपाल तथागत रॉय की राह चलते नज़र आ रहे हैं. एक के बाद एक विवादित बयान देकर वो आलोचनाओं के केंद्र में हैं. कल्याण को बर्खास्त करने की मांग हो रही है.
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राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह पर चौतरफा हमले हो रहे हैं. हालत ये है कि उन्हें बर्खास्त करने की मांग की जा रही है. इसकी वजह उनका वो बयान है जिसे मर्यादा का उल्लंघन बताया जा रहा है.

दरअसल 23 मार्च को कल्याण सिंह अलीगढ़ में जैसा बयान दे आए उससे लग रहा है कि वो कुछ देर के लिए भूल ही गए कि उनके पास एक राज्य के राज्यपाल पद की संवैधानिक ज़िम्मेदारी है. उन्होंने कहा था कि हम सब लोग भाजपा के कार्यकर्ता हैं और हम सभी ये चाहते हैं कि आम चुनाव 2019 में भाजपा एक बार फिर सरकार बनाए. कल्याण सिंह ने ये भी कहा था कि हम सब चाहते हैं कि एक बार फिर मोदी दोबारा पीएम बनें.

ज़ाहिर है, कल्याण सिंह जिस पद पर बैठे हैं उस पर आसीन शख्स से निष्पक्ष होने की उम्मीद की जाती है. वो किसी राजनैतिक दल का समर्थन ना करे यही अपेक्षा होती है लेकिन कल्याण सिंह के शब्दों और तेवर से नहीं लगता कि वो अपने पद की गरिमा का कोई ख्याल रख रहे हैं. उनके बयान पर प्रतिक्रिया दर्ज कराते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कल्याण का बयान उस पद की गरिमा के अनुरूप नहीं जिस पर वो बैठे हैं.

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और डिप्टी सीएम सचिन पायलट  ने भी कल्याण के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण ठहराया. इससे पहले कल्याण सिंह ने अलीगढ़ से बीजेपी प्रत्याशी सतीश गौतम को टिकट मिलने का विरोध किया था. उन्होंने ये कहते हुए टिकट पर आपत्ति जताई कि एक ऐसे व्यक्ति को टिकट दिया गया है जो कभी अतरौली (लोकसभा क्षेत्र में एक इलाका) नहीं गया. इस बयान तक तो विपक्षी शांत थे लेकिन जब कल्याण सिंह खुलकर मोदी और बीजेपी के समर्थन में आ गए तो उन पर हमले होना लाज़िमी था.

कल्याण सिंह की विवादों से पुरानी दोस्ती है. 1992 में जब कारसेवकों ने अयोध्या में बाबरी को ढहाया तब वही सूबे के सीएम थे. उसी दिन घटना की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए कल्याण सिंह ने इस्तीफा दे दिया था और अगले दिन केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को बर्खास्त कर दिया.

आपको बता दें कि कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया एटा से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. इससे पहले अलग पार्टी बनाकर राजनीति करने की उनकी कोशिशें धराशायी हो चुकी हैं. साल 1999 में कल्याण पार्टी छोड़ गए थे और 2004 में ही उनकी वापसी हो सकी थी. 2014 में उन्हें राजस्थान का गवर्नर बनाया गया.

इससे पहले मेघालय के गवर्नर तथागत रॉय भी अपने बयान को लेकर काफी चर्चा में रहे थे. उन्होंने पुलवामा हमले के बाद कश्मीरियों के बहिष्कार का आह्वान किया था. एक राज्यपाल की तरफ से पहली बार इस तरह का बयान देख पूरा देश हैरान था. चारों तरफ से हुई आलोचना के बावजूद तथागत रॉय अपने स्टैंड पर ना सिर्फ कायम रहे थे बल्कि ट्वीट करके खुद को सही ठहराते रहे. बार बार केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग होती रही लेकिन तथागत आज तक कायम हैं.

लगता है कल्याण सिंह को उसी घटना से प्रेरणा मिली है.

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