जानकारी पाने के लिए देते थे iPhone और 25,000 रुपये, जानें हाई कमीशन जासूसी कांड की पूरी कहानी

ये लोग हर जानकारी के 25,000 रुपये और मंहगे-मंहगे गिफ्ट्स जैसे Apple iPhones वगेराह दिया करते थे. इसबार वह जब पकड़े गए तब वह मुखबिर को iPhone और नकद दे रहे थे.

Pakistan high commission espionage case, जानकारी पाने के लिए देते थे iPhone और 25,000 रुपये, जानें हाई कमीशन जासूसी कांड की पूरी कहानी

भारत स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन में वीजा ऑपरेटर्स के तौर तैनात ISI के जासूसों का एक ऑडियो और वीडियो सामने आया है. जानकारी के मुताबिक इस वीडियो में आबिद हुसैन करोल बाग स्थित एक रेस्तरां में अपने मुखबिर से मिल रहा है. बताया जा रहा है कि ये वीडियो लॉकडाउन से पहले फरवरी महीने में शूट किया गया. जानकारी के मुताबिक इंटेलिजेंस एजेंसियां उन्हें लंबे समय से ट्रैक कर रही थीं.

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सोमवार को एजेंसियों ने दोनों पाकिस्तानी जासूसों को रंगे हाथों पकड़ लिया. इसके बाद हुई पूछताछ में सामने आया कि आरोपी आबिद कई फर्जी पहचान पत्रों के साथ ऑपरेट करता था और इस दौरान उसके काम में आने वाले विभागों के लोगों को अपने जाल में फंसाता था.

जानकारी पाने के लिए देते थे iPhone और 25,000 रुपये

उसने भारतीय रेलवे में काम करने वाले एक व्यक्ति के साथ संपर्क बनाने के लिए एक मीडियाकर्मी के भाई गौतम के नाम से पहचान पत्र बनाया. उसने यह दावा करते हुए रेलवे कर्मी का विश्वास हासिल करने की कोशिश की कि उसका भाई भारतीय रेलवे पर एक रिपोर्ट बना रहा है, इसलिए उसे रेलवे मूवमेंट की जानकारी चाहिए और इसके लिए वह पैसे देने को भी तैयार था.

हालांकि इसके जरिए उसका असली मकसद कर्मचारियों को लुभाना और फंसाना था ताकि वह सेना की यूनिटों और हार्ड वेयर की आवाजाही की जानकारी हासिल कर सके. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ये लोग हर जानकारी के 25,000 रुपये और मंहगे-मंहगे गिफ्ट्स जैसे Apple iPhones वगेराह दिया करते थे.

Pakistan high commission espionage case, जानकारी पाने के लिए देते थे iPhone और 25,000 रुपये, जानें हाई कमीशन जासूसी कांड की पूरी कहानी

हालांकि पाकिस्तान ने आबिद हुसैन और मोहम्मद ताहिर के खिलाफ भारत की कार्रवाई का खंडन किया है. इसी के साथ पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई में इस्लामाबाद स्थित भारतीय हाई कमीशन के दो वरिष्ठ राजनयिकों को तलब किया है. लेकिन भारत का दावा है कि उसके पास जरूरी दस्तावेज हैं जो इन दोनों आरोपियों के पास से बरामद किए गए हैं.

कौन हैं ये पाकिस्तानी जासूस?

आबिद हुसैन और मोहम्मद ताहिर को भारतीय अधिकारियों ने जासूसी गतिविधियों के लिए गिरफ्तार किया था. एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, हुसैन पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से ताल्लुक रखता है जबकि ताहिर जो उसका सहयोगी है इस्लामाबाद का है. दोनों पाकिस्तानी हाई कमीशन के लिए काम करते हैं.

आबिद हुसैन की उम्र 42 वर्ष है और वग पाकिस्तान हाई कमीशन में डिपार्टमेंट ऑफ ट्रेड में असिसटेंट था. वहीं 44 वर्षीय मोहम्मद ताहिर हाई कमीशन में अपर डिविजन क्लर्क था. दोनों ने पूछताछ के दौरान पाकिस्तानी जासूस एजेंसी ISI से अपने संबंध का खुलासा किया.

कैसे पकड़े गए दोनों जासूस?

रिपोर्ट्स के मुताबिक ताहिर और हुसैन किसी भारतीय से भारतीय सुरक्षा संस्थानों से संबंधित जरूरी दस्तावेज ले रहे थे, तभी उन्हें पकड़ लिया गया. वो मुखबिरों को गिफ्ट भी देते थे और पैसे देने के लिए वह पेटीएम और अन्य मोबाइल वॉलेट का इस्तेमाल करते थे. इसबार वह जब पकड़े गए तब वह मुखबिर को iPhone और नकद दे रहे थे.

इन पाकिस्तानी जासूसों को पकड़ने के लिए मिलिट्री इंटेलिजेंस, स्पेशल एंड इंफोर्मेशन ब्यूरो ने जॉइंट ऑपरेशन किया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक ये दोनों पिछले दो साल से हाई कमीशन में काम कर रहे थे. इनके साथ इनका ड्राइवर जावेद अख्तर भी था. अख्तर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत का रहने वाला था, उसे भी स्पेशल ऑपरेशन के दौरान पकड़ा गया था.

कैसे टूटा पाक हाई कमीशन की गाड़ी का शीशा?

इस मामले में दर्ज हुई FIR में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान हाई कमीशन में काम करने वाले ISI एजेंट आबिद और ताहिर को करोल बाग में जब पकड़ा गया तो उनके पास से क्लासिफाइड सीक्रेट डॉक्युमेंट बरामद हुए, डॉक्युमेंट सेना के मूवमेंट और डिप्लॉयमेंट से सम्बंधित थे. जब आबिद और ताहिर को एजेंसियों ने मौके से पकड़ा तो प्लान के तहत ड्राइवर के तौर पर काम कर रहे ISI एजेंट ने भागने की कोशिश की, जिसमें पाकिस्तान हाई कमीशन की गाड़ी के शीशे भी टूट गए. काफी मुश्किलों के बाद जावेद को पकड़ा गया.

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