अयोध्या मामले में दिवाली से पहले फैसला! वकील ने कहा- गवाह ऐसे थे जो उर्दू पढ़ तक नहीं पाते

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मुस्लिम पक्षकार से पूछा कि अपनी बात रखने के लिए उन्हें और कितने दिन चाहिए?


अयोध्या मामले (Ayodhya case hearing) में आज 26वें दिन की सुनवाई जारी है. सीजेआई ने 18 अक्टूबर तक सुनवाई पूरी करने को कहा है. यानि कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो दिवाली तक अयोध्या मामले ( Ayodhya case hearing ) में फैसला आ जाएगा. अदालत ने यह भी कहा है कि अगर ज़रूरत पड़ी तो शनिवार को भी पांच बेंच की पीठ सुनवाई करेगी.

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मुस्लिम पक्षकार से पूछा कि अपनी बात रखने के लिए उन्हें और कितने दिन चाहिए? इसके जवाब में  राजीव धवन ने कहा कि मुस्लिम पक्षकारों को मौजूदा सप्ताह और अगला पूरा सप्ताह अपनी दलीलें खत्म करने में लग जायेगा.

हिन्दू पक्षकारों ने कहा कि उस पर क्रॉस आर्गुमेंट के लिए हमें 2 दिन लगेंगे. धवन ने कहा कि उसके बाद मुझे भी 2 दिन लगेंगे.

मध्यस्थता करके हमें बताएं
CJI ने कहा कि मध्यस्थता को लेकर हमें पत्र मिला है. अगर पक्ष आपसी बातचीत कर मसले का समझौता करना चाहते हैं तो करके कोर्ट के समक्ष रखें. CJI ने कहा कि इस मामले में मध्यस्थता कर सकते हैं. CJI ने कहा कि मध्यस्थता को लेकर गोपनीयता पूरी तरह बनी रहेगी.

सही जगह नहीं बताई गई
धवन ने कहा कि रामचरितमानस में भी भगवान राम के जन्मस्थान के बारे में सही जगह नहीं बताई गई है. बस यही कहा गया है कि भगवान राम अयोध्या में पैदा हुए थे. धवन ने कहा कि प्राचीन काल में भारत में मंदिरों पर हमला किसी धर्म या नफरत की वजह से नहीं किया बल्कि संपत्ति लूटने के लिए किया गया था. सुनवाई के दौरान सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने कई ऐतिहासिक किताबों का भी ज़िक्र किया. धवन ने कहा कि 1855 में हिन्दू और मुस्लिम दोनों विवादित जगह पर पूजा करते थे. मुस्लिम अंदर नमाज पढ़ते थे और हिन्दू बाहर नमाज पढ़ते थे.

गज़ेटियर में भी चबूतरे की कोई जानकारी नही दी गई है.
धवन ने कहा कि हिन्दू पक्ष की तरफ से कहा गया कि विलियम फिंच ने अयोध्या में विवादित जगह पर किसी मस्जिद के बारे में नहीं लिखा है, लेकिन एक विदेशी यात्री विलियम फॉर्स्टर ने विवादित स्थल पर मस्जिद की बात कही है. धवन ने कहा कि यह भी साफ नहीं है कि मंदिर को बाबर ने तोड़ा या औरंगजेब ने. धवन ने एक गज़ेटियर का हवाला देते हुए कहा कि गज़ेटियर में भी चबूतरे की कोई जानकारी नही दी गई है.

1949 से पहले विवादित ढांचे के अंदर मूर्ति नहीं थी
सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने कहा कि 1949 से पहले विवादित ढांचे के अंदर मूर्ति नहीं थी और अंदर पूजा भी नही होती थी. वहां पर पूजा के लिए कोई जगह नहीं थी. न ही कोई वहां दर्शन के लिए जाते थे. 84-85 में गर्भ गृह में बाहर से ही मूर्ति का दर्शन शुरू हुआ. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने पूछा कि मस्जिद के गर्भगृह से राम चबूतरे के बीच की दूरी कितनी है? धवन ने कहा कि उसकी दूरी 50 यार्ड है. जस्टिस बोबडे ने कहा कि उसकी दूरी 40 फ़ीट है.

नहीं पहचान पाए तस्वीर
राजीव धवन ने कहा कि वह पूजा करने की बात करके पूरी ज़मीन मांग रहे हैं. लोग एक-एक इंच के लिए लड़ रहे हैं. गवाहों ने जिससे सुना या जिसने बताया और उसको भी किसी और ने बताया, पूरी गवाही एक झूठ के आधार पर चल रही है जो एक के बाद एक व्यक्ति से बार-बार से बोली गई. राजीव धवन ने हिंदू पक्षकारों की गवाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब गवाहों को विवादित जगह की 10 तस्वीर दिखाई गई तो उस जगह को नहीं पहचान पाए कि तस्वीर कहां की है.

धवन ने कहा कि जब गवाहों को तस्वीर दिख कर पूछा गया कि अल्लाह कहां लिखा है तो उन्होंने कहा कि उर्दू नही पढ़ पाते है कि क्या लिखा हुआ है. धवन ने कहा कि जब स्ट्रक्चर में अल्लाह लिखा हो तो वह कैसे मंदिर हो सकता है. तस्वीर में कई जगह पर अल्लाह लिखा दिखा था.