अयोध्‍या केस: 1935 से पूजा कर रहे थे हौसला प्रसाद त्रिपाठी, मंदिर में थी मूर्ति और फोटो

मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने जब हौसला प्रसाद त्रिपाठी की गवाही का सिर्फ थोड़ा सा अंश पढ़ा तो जस्टिस अशोक भूषण ने पूरी गवाही की ओर धवन का ध्यान खींचा.

अयोध्‍या केस मामले में 27वें दिन की सुनवाई में गुरुवार को मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने रामलला की ओर से हाई कोर्ट में पेश किए गए गवाह हौसला प्रसाद त्रिपाठी का बयान पढ़ा जिसमें त्रिपाठी ने कहा है, मैं वहां जाता था और रेलिंग के बाहर से भगवान का दर्शन करता था.

रेलिंग के पास ही प्रसाद रख दिया करता था. धवन ने जब त्रिपाठी की गवाही का सिर्फ इतना सा अंश पढ़ा और उस गवाही को अविश्वसनीय बताकर न स्वीकारे जाने की दलील देनी शुरू की तो जस्टिस अशोक भूषण ने पूरी गवाही की ओर धवन का ध्यान खींचा.

‘गवाही का पूरा हिस्सा पढ़ें’

जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि वह गवाही का पूरा हिस्सा पढ़ें जिसमें कहा गया है कि वह (हौसला प्रसाद त्रिपाठी) 12-13 वर्ष के थे जब दिसंबर 1935 में अपने अंकल के साथ अय़ोध्या राम जन्मभूमि मंदिर गए थे. वह नियमित रूप से वहां जाया करते थे.

‘एक मूर्ति थी और एक फोटो’

वहां गर्भ गृह में एक मूर्ति थी और एक फोटो. वह रेलिंग के पार दर्शन किया करते थे. वह 1949 के बाद भी वहां गए थे और आप (धवन) कह रहे हैं कि इस बारे में कोई साक्ष्य नहीं हैं जबकि इसमें गवाह ने साफ कहा है कि वह 1935 में गया था.

‘गवाही की चर्चा नहीं की’

धवन ने कहा कि रामलला के वकील ने इस गवाही की चर्चा नहीं की है. जस्टिस भूषण ने कहा कि इससे क्या फर्क पड़ता है कि किसी ने इसका हवाला दिया है कि नहीं, यह रिकॉर्ड पर मौजूद है.

आज सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

अयोध्या जमीन विवाद (Ayodhya Land Dispute Case) मामले में शुक्रवार को Supreme Court में 28वें दिन की सुनवाई पूरी हो गयी है. अब सोमवार को मामले की सुनवाई होगी. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट 1 घंटे ज़्यादा यानी 5 बजे तक मामले की सुनवाई करेगा. आइये जानते हैं सुनवाई के दौरान किस पक्ष ने क्या दी दलील…

  • धवन ने कहा कि भगवान विष्णु स्वयंभू है और इसके सबूत मौजूद है. भगावन राम के स्वयंभू होने पर यह दलील दी जा रही है कि रात में भगवान राम किसी के ख्वाब में आये और उसको बताया कि उनका सही जन्म स्थान किस जगह पर है. क्या इस पर विश्वास किया जा सकता है?
  • राजीव धवन ने कहा कि जन्मभूमि को न्यायिक व्यक्ति बनने के पीछे का मकसद यह है कि भूमि को कही शिफ्ट नही किया जा सकता है.
  • राजीव धवन ने कहा कि 1992 में मस्जिद को गिराए जाने का मकसद हकीकत को मिटाया जाना है. इसके बाद कोर्ट में दावे किए जा रहे हैं. सब कुछ बेवजह ध्वस्त किए जाने का इरादा स्पष्ट होता है और कोर्ट में दावे को सही साबित करने के लिए ऐसा किया गया. मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ‘बाबरनामा’ के अलग-अलग संस्करण और अनुवाद से साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि मस्जिद बाबर ने ही बनवाया था. उन दस्तावेजों को पढ़ रहे हैं जिसके मुताबिक विवादित संरचना पर अरबी और फारसी शिलालेख में अल्लाह लिखा था.
  • राजीव धवन ने कुछ चित्र, फोटो कोर्ट को दिखाए और बताया कि मेहराब पर अल्लाह लिखा हुआ है. मसला सिर्फ इतना है कि जबरन इस स्थान पर कब्जा करने वाले अब जमीन उनकी होने का दावा कर रहे हैं.
  • धवन ने कहा- हिन्दू पक्षकार तो गजेटियर का हवाला अपनी सुविधा के मुताबिक दे रहे हैं, लेकिन गजेटियर कई अलग-अलग समय पर अलग नजरिये से जारी हुए थे. लिहाज़ा सीधे तौर पर ये नहीं कहा जा सकता कि बाबर ने मन्दिर तोड़कर मस्जिद बनाई.
  • मुस्लिम पक्षकारों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने इस्माइल फारूकी के फैसले का हवाला देना शुरू किया.

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