अयोध्या मामले की लाइव स्ट्रीमिंग की मांग पर 16 सितंबर को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट

राजीव धवन ने हिंदू पक्ष के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि 'क्या रामलला विराजमान कह सकते हैं कि उस जमीन पर मालिकाना हक उनका है?'

सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या राम मंदिर-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले की 21वें दिन सुनवाई हुई. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग की मांग वाली जनहित याचिका पर 16 सितंबर को सुनवाई करेगा. इसे लेकर पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि यह बहुत ही संवेदनशील मामला है.

पूर्व आरएसएस विचारक एन गोविंदाचार्य ने याचिका दायर करके अयोध्या मामले की सुनवाई के सीधे प्रसारण या रिकॉर्डिंग की मांग की गई है.

‘गलती को जारी नहीं रख सकते’
सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने 1962 में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाया और कहा कि जो गलती हुई उसे जारी नहीं रखा जाए. यही कानून के तहत होगा.

राजीव धवन ने हिंदू पक्ष के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘क्या रामलला विराजमान कह सकते हैं कि उस जमीन पर मालिकाना हक उनका है? नहीं, उनका मालिकाना हक कभी नहीं रहा है!

गौरतलब है कि राजीव धवन ने इससे पहले दलील दी थी कि निर्मोही अखाड़ा जो दावा कर रहा है उस पर हमें यही कहना है कि वे बाहरी आंगन में राम चबूतरे पर 1855 से पूजा करते आ रहे थे. राम चबूतरे पर पूजा और पूजा के अधिकार को कभी मना नहीं किया गया. लेकिन वहां का मालिकाना हक कभी भी निर्मोही अखाड़ा के पास न होकर हमारे पास था.

जज का कार्यकाल बढ़ाया गया
यूपी सरकार ने अयोध्या विध्वंस के अपराधिक मामले का ट्रायल कर रहे जज का कार्यकाल मामले का फैसला देने तक बढ़ा दिया है. जज 30 सितंबर को रिटायर हो रहे थे.

सुप्रीम कोर्ट ने कार्यकाल बढ़ाने को लेकर यूपी सरकार को आदेश दिया था. इस मामले में कल्याण सिंह, मुरली मनोहर जोशी, लालकृष्ण आडवाणी समेत अन्य नेताओं के खिलाफ ट्रायल चल रहा है.

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