अयोध्‍या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान आया रेस ज्युडी काटा का जिक्र, जानें ये है क्‍या

मुस्लिम पक्षकार शेखर नाफड़े की दलीलों में बार-बार रेस ज्यूडी काटा का जिक्र आया. आइए आपको बताते हैं कि इसका मतलब आखिर है क्‍या?
race judicata, अयोध्‍या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान आया रेस ज्युडी काटा का जिक्र, जानें ये है क्‍या

नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को अयोध्‍या विवाद पर हुई सुनवाई के दौरान रेस ज्युडी काटा (Section 11 of CPC) का जिक्र हुआ. मुस्लिम पक्ष की ओर से दलील दे रहे शेखर नाफड़े ने रेस ज्युडी काटा का हवाला देते हुए कहा, ‘यह मामला रेस ज्यूडी काटा के तहत इसलिए आता है, क्योंकि 1885 में निर्मोही महंत की ओर से फैजाबाद में सूट दाखिल किया गया, जो खारिज हो गया.’

शेखर नाफड़े के तर्क पर जस्टिस चंद्रचूण ने कहा- 1885 का जो सूट है वह निर्मोही अखाड़ा की तरफ से नहीं है, उसे एक महंत ने दाखिल किया था. ये कहना कि हिंदू पक्ष दोबारा केस फाइल नहीं कर सकते, ठीक नहीं लगता. इस पर नाफड़े ने कहा कि यह साफ है कि 1885 में जो सूट दाखिल किया गया था वह चबूतरे पर पूजा के अधिकार पर दाखिल किया गया था.

नाफड़े ने कहा कि 1885 वाले सूट पर न्यायिक कमिश्नर ने अपने आदेश में साफ किया था कि हिंदुओं की पहुंच सीमित क्षेत्र तक थी. वह उसे बढ़ाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन यह चिन्हित हुआ कि उनका अधिकार सीमित है और उन्हें मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता.

मुस्लिम पक्षकार शेखर नाफड़े के इस तर्क के दौरान बार-बार रेस ज्यूडी काटा का जिक्र आया. आइए आपको बताते हैं कि इसका मतलब आखिर है क्‍या?

दीवानी प्रक्रिया संहिता की धारा 11 के तहत रेस ज्युडिकाटा का मतलब किसी न्यायिक आदेश का अंतिम आदेश होना. अगर दो पक्षकारों के बीच किसी विवाद का निपटारा हो जाने के बाद उन्हीं पक्षकारों के बीच उसी मामले में उसी विवाद के लिए दोबारा सिविल सूट दाखिल नहीं किया जा सकता है. किसी भी न्यायिक आदेश को चुनौती देने की एक निर्धारित अवधि होती है.

रेस ज्युडिकाटा लैटिन के रेस और ज्युडिकाटा दो शब्दों से मिलकर बना है. रेस शब्द का अर्थ है एक वस्तु या वाद वस्तु और ज्युडिकेटा का अर्थ पूर्ण निर्णित विषय वस्तु से है. एक ही वाद में एक ही संपत्ति के मामले में एक ही पक्षकारों के मध्य एक ही न्यायालय द्वारा विवाद का निस्तारण कर वाद का अंतिम निर्णय कर आदेश पारित कर दिया गया हो, लेकिन उसी संपत्ति के मामले में उन्हीं पक्षकारों के बीच फिर से विवाद उत्पन्न हो तो न्यायालय द्वारा वाद में पारित आदेश दूसरे वाद में पक्षकारों के बीच बाध्यकारी होगा.

ऐसे में रेस ज्युडीकाटा के तहत एक ही वाद कारण को फिर से विवादित नहीं किया जा सकता है. इस मुख्य मकसद व्यर्थ कि मुकदमेबाजी को बढ़ावा नहीं दिया जाना है. इसके तहत पहले के वाद में और बाद के वाद में पक्षकार समान होना, पहले के वाद में और बाद के वाद में शीर्षक समान होना, पहले के वाद में और बाद के वाद में विवाद की विषय वस्तु समान होना माना जाता है.

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