अयोध्या मामला: रामलला के मुख्य पुजारी ने की सुन्नी वक्फ बोर्ड के फैसले की तारीफ

अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया था कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही कहीं और 5 एकड़ जमीन दी जाए.
sunni waqf board review petition, अयोध्या मामला: रामलला के मुख्य पुजारी ने की सुन्नी वक्फ बोर्ड के फैसले की तारीफ

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर सुन्नी वक्फ बोर्ड रिव्यू पिटिशन दाखिल नहीं करेगा. मंगलवार को सुन्नी वक्फ बोर्ड की बैठक हुई. इस बैठक में बोर्ड ने 6-1 के बहुमत से यह फैसला लिया. केवल एक सदस्य अब्दुल रज्जाक रिव्यू पिटिशन दाखिल करने के पक्ष में थे.

अयोध्या बाबरी मस्जिद पक्षकार इकबाल अंसारी ने सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के रिव्यू पिटीशन में नही जाने के फैसले को सही ठहराया है. उन्होंने कहा, ‘कोर्ट के फैसले का सम्मान, इससे राजनीति खत्म हुई, हमारी कौम चाह रही कि फैसले के खिलाफ आगे नहीं बढ़ें. अब विकास की राजनीति होनी चाहिए. हिन्दू मुसलमानों में आपसी सौहार्द बढ़ना चाहिए.’

‘सुन्नी सेंट्रल बोर्ड का निर्णय स्वागत योग्य है. जिस बात को वह आर्डर के पहले कह चुके हैं कि जो सुप्रीम कोर्ट का आदेश जो होगा हम सभी उसको मानेंगे, उसी बात पर अगर सुन्नी सेंट्रल बोर्ड कायम है तो यह अच्छी बात है.’

वहीं रामलला मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि, ‘कोर्ट का आदेश किसी पक्ष में नहीं होता है. कोर्ट का आदेश न्याय युक्त होता है. न्याय संगत होने से हिंदू पक्ष ने इस को मान लिया है और मुस्लिम पक्ष को भी मान  लेना चाहिए. जो लोग इस प्रकार से पुनर याचिका दायर करने का विचार कर रहे हैं, वह गलत है सुन्नी सेंट्रल बोर्ड ने जो कहा है उसको मानना चाहिए. सुन्नी सेंट्रल उस मामले में पक्षकार था.’

SC ने 9 नवंबर को सुनाया था फैसला

बता दें कि अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने 9 नवंबर को सर्वसम्मति से ऐतिहासिक फैसला सुनाया था. निर्मोही अखाड़े के दावे को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान और सुन्नी वक्फ बोर्ड को ही पक्षकार माना था.

SC ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा विवादित जमीन को तीन पक्षों में बांटने के फैसले को अतार्किक करार दिया था. आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाया था.

कोर्ट ने साथ में यह भी आदेश दिया था कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही कहीं और 5 एकड़ जमीन दी जाए. कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने में ट्रस्ट बनाए. इस ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े को भी प्रतिनिधित्व देने को कहा है.

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