‘1935 से नहीं पढ़ रहे नमाज, अगर हिंदुओं को जमीन दें तो परेशानी नहीं’

बुधवार को वरिष्ठ वकील सी एस वैधनाथन ने कहा कि अयोध्या के भगवान रामलला नाबालिग हैं, नाबालिक की संपत्ति को न तो कब्जाया जा सकता और न ही बेचा जा सकता.

नई दिल्ली: अयोध्या विवाद मामले में 6 अगस्त के बाद से सुप्रीम कोर्ट में लगातार दसवें दिन सुनवाई हो रही है. गुरुवार को गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार ने ट्रायल कोर्ट के सामने पेश किए गए दस्तावेजों को सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा.

उन्होंने कहा कि यह स्थान स्वयं एक दिव्य स्थान है और पूजक होने के नाते पूजा करने का मेरा अधिकार है जो कि सिविल अधिकार है, इसे छीना नही जाना चहिए.

वकील रंजीत कुमार ने 80 साल के अब्दुल गनी की गवाही का हवाला देते हुए कहा, ‘गनी ने कहा था बाबरी मस्जिद जन्मस्थान पर बनी है बिर्टिश राज में मस्जिद में सिर्फ जुमे की नमाज़ होती थी हिन्दू भी वहां पर पूजा करने आते थे.

गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार ने कहा कि मस्जिद गिरने के बाद से मुस्लिम समुदाय के लोगों ने नमाज़ पढ़ना बंद कर दिया, लेकिन हिंदुओं ने जन्मस्थान पर पूजा जारी रखी.

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# गोपाल सिंह विशारद की ओर से वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार ने अपनी दलीलें शुरू की. रंजीत कुमार ने कहा कि मैं उपासक हूं और मुझे विवादित स्थल पर उपासना का अधिकार है. यह अधिकार मुझसे छीना नहीं जा सकता.

# बोबड़े ने रंजीत कुमार से पूछा कि उन्हें यह हलफनामे दर्ज कराने का आवेदन पत्र कहां से लिया? क्या इसके संबंध में मजिस्ट्रेट का आदेश था?

रंजीत कुमार ने कहा कि 20 लोगों में 14 ने एफिडेविट दाखिल कर कहा था कि विवादित स्थल पर मंदिर था. जिसको गोपाल सिंह विशरद ने हाई कोर्ट के समक्ष रखा था.

# रंजीत कुमार ने कहा कि 1949 में मुस्लिम पक्ष ने कहा था कि वह 1935 से वहां पर नमाज नहीं पढ़ रहे हैं, ऐसे में अगर जमीन को हिंदुओं को दिया जाता है तो कोई परेशानी नहीं होगी. SC ने हलफनामे की वैधता को पूछा और पूछा कि क्या यह हलफनामे वेरिफाई हैं.

जस्टिस बोबड़े ने कहा कि यह हलफनामा तब दिया गया था जब सरकार विवादित जमीन को रिसीवर को देना चाहती थी, क्या यह बातें कभी मजिस्ट्रेट के सामने साबित हो पाई थी?

# जस्टिस बोबड़े, ये हलफनामे कैसे हाई कोर्ट के रिकॉर्ड में रखे गए?

रंजीत: ये हलफनामे मुकदमे में दायर किये गए थे. मुकदमे को बाद में हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया था.

# गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार ने कहा कि 1949 में मुस्लिम पार्टी ने कहा था कि वह 1935 से वहां पर नमाज नहीं पढ़ रहे हैं, ऐसे में अगर जमीन को हिंदुओं को दिया जाता है तो कोई परेशानी नहीं होगी. सुप्रीम कोर्ट ने हलफनामे की वैधता को पूछा और पूछा कि क्या ये हलफनामे वेरिफाई हैं. जस्टिस बोबड़े ने कहा कि यह हलफनामा तब दिया गया था जब सरकार जमीन को रिसीवर को सौंपना चाह रही थी, क्या ये बातें कभी मजिस्ट्रेट के सामने प्रूव हो पाई थी?

# रंजीत कुमार ने अयोध्या मामले में दायर कुल 20 हलफनामों की प्रति कोर्ट के सामने पेश की. इनमें से कुछ हलफनामे मुस्लिम लोगों द्वारा दायर किये गए थे. जिन्होंने अपने हलफनामों में कहा है कि उन्हें इसमें कोई आपत्ति नहीं है कि विवादित जमीन को अगर हिंदुओं को दे दिया जाता है, क्योंकि विवादित जमीन पर मुसलमानों ने 1935 के बाद से नमाज अदा नहीं कि है, इसलिए ये जगह उनके लिए अब कोई महत्व नहीं रखती.

# 1858 में इसकी जांच कि गई कि जहां राम जन्म भूमि पर मस्जिद बनी है. वह नजूल कि जमीन थी, उस जमीन 5 नवम्बर 1885 को लीज भी का ऑफर किया गया.

# सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या उन मुसलमान गवाहों से कोर्स एग्जामिन किया गया था? रंजीत कुमार बताया कि उनका क्रॉस एग्जामिन नही किया गया, लेकिन वह लोग खुद सामने आए थे और उन्होंने बयान दिया था. रंजीत कुमार कई गवाहों के बयान को सुप्रीम कोर्ट के सामने रख था

# रंजीत कुमार ने कुछ मुसलमानों द्वारा फैजाबाद जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष 1950 में दायर किये गए कुछ हलफनामों को रखा. जिसमे सभी ने कहा है कि विवादित जमीन पर मंदिर था और उसे मस्जिद बनाने के लिए तोड़ा गया.

# रंजीत कुमार ने अब्दुल गनी द्वारा दायर हलफनामे को कोर्ट के सामने रखते हुए कहा कि गनी ने अपने हलफनामे में कहा था कि मस्जिद का निर्माण राम मंदिर को तोड़कर किया गया था. मस्जिद के गिरने के बाद मुसलमानों ने वहां नमाज पढ़ना बंद कर दिया लेकिन हिंदुओं ने जन्मस्थान की पूजा जारी रखी.

इससे पहले बुधवार को अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में रामलला विराजमान की तरफ से बहस की शुरुआत की गई. बहस करते हुए वरिष्ठ वकील सी एस वैधनाथन ने कहा कि अयोध्या के भगवान रामलला नाबालिग हैं, नाबालिक की संपत्ति को न तो कब्जाया जा सकता और न ही बेचा जा सकता. कोर्ट में वकील वैधनाथन ने कहा, ‘जन्मस्थान अगर देवता है, तो कोई भी उस जमीन पर बाबरी मस्जिद होने के आधार पर दावा पेश नहीं कर सकता. अगर वहां पर मन्दिर था और लोग पूजा करते है तो कोई भी उस जमीन पर अपना दावा नहीं कर सकता, क्योंकि जन्मस्थान खुद में एक देवता है.’

साथ ही वकील ने कहा, ‘अगर ये मान भी लिया जाए कि वहां कोई मंदिर नहीं, कोई देवता नहीं, फिर भी लोगों का विश्वास ही बहुत है कि राम जन्मभूमि पर ही भगवान राम का जन्म हुआ था. वहां पर मूर्ति रखना उस स्थान को पवित्रता प्रदान करता है. अयोध्या के भगवान रामलला नाबालिग हैं. नाबालिग की संपत्ति को न तो बेचा जा सकता है और न ही छीना जा सकता है. जब संपत्ति भगवान में निहित होती है तो कोई भी उस संपत्ति को ले नहीं सकता. उस संपत्ति से ईश्वर का हक नहीं छीना जा सकता. ऐसी संपत्ति पर एडवर्स पजेशन का कानून लागू नहीं होगा.’