ayodhya hearing, ‘हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत दी गई थी लेकिन टाइटल मुसलमानों के पास’
ayodhya hearing, ‘हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत दी गई थी लेकिन टाइटल मुसलमानों के पास’

‘हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत दी गई थी लेकिन टाइटल मुसलमानों के पास’

सुनवाई के 18वें दिन मुस्लिम पक्ष ने कहा कि मस्जिद में राम की मूर्तिंया छिपाकर रखी गई थीं.
ayodhya hearing, ‘हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत दी गई थी लेकिन टाइटल मुसलमानों के पास’

नई दिल्ली: अयोध्या मामले में आज 19वें दिन सुप्रीम कोर्ट में दलील शुरू हो चुकी है. फिलहाल कोर्ट में मुस्लिम पक्ष की दलीलें चल रही हैं. सुन्नी वक्फ बोर्ड कि ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने तर्क शुरू किए. धवन ने कहा कि अंसारी को पुलिस ने हमलावर से बचाया. हम सुरक्षा बढ़ाने की मांग नहीं कर रहे है, जो सुरक्षा मिली है उसमे हमला कैसे हुआ, किस तरह की सुरक्षा है यह? धवन ने आगे कहा कि इकबाल अंसारी मेरे दरवाज़े सभी के लिए खुले हुए है, मेरे यहां सभी का स्वागत होता है.

राजीव धवन ने कोर्ट को बताया हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल पर हमला हुआ, वह भी इन मामले में याचिकाकर्ता हैं. इकबाल अंसारी पर एक शूटर ने उन पर हमला किया है. अंसारी को पुलिस ने हमलावर से बचाया. हम सुरक्षा बढ़ाने की मांग नही कर रहे है, जो सुरक्षा मिली हुई उसमे हमला कैसे हुए, किस तरह की सुरक्षा है यह??

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# धवन ने कहा कि निर्मोही अखाड़े ने पूजा का अधिकार मांगा था वो हमने उनको रामचबूतरा दिया था. लेकिन पूरी इमारत और अहाते के प्रबंधन का अधिकार हमारे पास ही था. हिन्दू निर्मोही अखाड़ा वहां पूजा ज़रूर कर रहे थे लेकिन उनके पास ओनरशिप नहीं थी. कई दशकों तक राम चबूतरे पर ही खस की चिक से घेर कर बनाए गए छोटे से मन्दिर में रामलला की पूजा होती रही थी.

# जस्टिस बोबडे ने कहा कि आप कह रहे है कुरानिक कानून मस्जिद पर लागू नही होगा?

धवन ने कहा कुरानिक कानून को भारतीय कानून ने माना है आप कुरानिक कानून की अनदेखी नही कर सकते है.

# धवन ने कहा कि मैं पहले ही कह चुका हूं कि देवता के अधिकार सीमित है. 1885 में शेबेट ने याचिका दाखिल की लेकिन कब्ज़ा को चुनौती नही दी गई. आधुनिक ऐंग्लो मस्लिम कानून के साथ हमको चलना होगा हम यह नही कह सकते कि वह अच्छे लोग थे या बुरे.

# जस्टिस DY चंद्रचूड़ ने कहा कि शेबेट का अधिकार देवता के प्रबंधन के बारे में है, लेकिन देवता का अधिकार अल्पविकसित है.

# धवन ने कहा कि 1885 में उन्होंने अंदरूनी हिस्से पर अधिकार की बात कही और पूजा के अधिकार की बात कही, शेबेटशिप उनकी न्यायिक स्थिति है. निर्मोही अखाड़ा, प्रबंधन अधिकारों की मांग कर रहे हैं, वह प्रबंधन अधिकारों के हकदार हैं, लेकिन बाहरी आंगन में क्या था और पूजा कहां की जा रही थी इसका फैसला होना है. मैं प्रस्तुत कर चुका हूं कि देवता के अधिकार सीमित हैं. 1885 में शेबेट ने दावा दायर किया लेकिन उपाधित्व का दावा नहीं किया गया.

# धवन ने कहा कि हिंदुओं को पूजा करने की अनुमति दी गई थी लेकिन टाइटल मुसलमानों के साथ था. वे पूजा करना चाहते थे? मुसलमानों ने उन्हें अनुमति दी लेकिन टाइटल हमेशा हमारे साथ था. 1885 में इन्होंने (निर्मोही अखाड़ा) राम चबूतरा पर पूजा का अधिकार कोर्ट से मांगा था, मालिकाना हक का दावा नहीं किया.

# धवन ने कहा कि हम निर्मोही अखाड़ा के शेबेट(सेवादार) के अधिकार को नही छीन रहे. न्यायमूर्ति भूषण ने धवन से पूछा की इसका मतलब है कि आप स्वीकार कर रहे हैं कि वह बाहरी आंगन में प्रार्थना कर रहे थे.

धवन ने कहा कि 1885 में उन्हींने अंदरूनी हिस्से पर अधिकार की बात कही और पूजा के अधिकार की बात कही, शेबेटशिप उनकी न्यायिक स्तिथि है.

# धवन ने कहा – मैं नहीं जानता कि इस हमले की जांच कराए जाने की जरूरत है या नहीं लेकिन इस घटना पर कोर्ट की सामान्य टिप्पणी भी मायने रखती है.

कोर्ट ने कहा – हम देखेंगे कि इस मामले में क्या किया जा सकता है और जो कुछ जरूरी होगा हम करेंगे.

# राजीव धवन ने कोर्ट को बताया हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल पर हमला हुआ, वह भी इन मामले में याचिकाकर्ता हैं. इकबाल अंसारी पर एक शूटर ने उन पर हमला किया है. अंसारी को पुलिस ने हमलावर से बचाया. हम सुरक्षा बढ़ाने की मांग नही कर रहे है, जो सुरक्षा मिली हुई उसमे हमला कैसे हुए, किस तरह की सुरक्षा है यह??

# सुन्नी वक्फ बोर्ड कि ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने तर्क शुरू किए. धवन ने कहा कि अंसारी को पुलिस ने हमलावर से बचाया. हम सुरक्षा बढ़ाने की मांग नहीं कर रहे है, जो सुरक्षा मिली है उसमे हमला कैसे हुआ, किस तरह की सुरक्षा है यह? धवन ने आगे कहा कि इकबाल अंसारी मेरे दरवाज़े सभी के लिए खुले हुए है, मेरे यहां सभी का स्वागत होता है.

निरुहोही अखाड़ा, प्रबंधन अधिकारों की मांग कर रहे हैं, वह प्रबंधन अधिकारों के हकदार हैं, लेकिन बाहरी आँगन में क्या था और पूजा कहाँ की जा रही थी इसका फैसला होना है

बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संवैधानिक पीठ 2.77 एकड़ की जमीन विवाद मामले की सुनवाई कर रही है. इस संवैधानिक पीठ में जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. ए. नजीर भी शामिल हैं. पूरा विवाद 2.77 एकड़ की जमीन को लेकर है.

ayodhya hearing, ‘हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत दी गई थी लेकिन टाइटल मुसलमानों के पास’
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